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Meerut News: लंबी से बचाव को कैली, कोल और पांची में चला टीकाकरण अभियान, बीमार गोवंश का किया इलाज

Fri, 11 Sep 2026 06:23 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 06:23 PM IST
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Vaccination drive against Lumpy disease conducted in Kelly, Kol, and Panchi; sick cattle treated.
खरखौदा के गांव कैली में पशुपालन विभाग की टीम बीमार पशुओं का इलाज करते हुए(किसान)
संवाद न्यूज एजेंसी
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खरखौदा। पशुपालन विभाग की ओर से शुक्रवार को गांव कैली, कोल और पांची में लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए गोवंशों का टीकाकरण कराया गया। इस दौरान लंपी से पीड़ित गोवंशों का उपचार भी किया गया।
पशुपालक विपिन कुमार, सर्वेश कुमार, ओंकार सिंह, पिंटू और पंकज के यहां पहुंचकर पशु चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र के नेतृत्व में विभागीय टीम ने बीमार पशुओं की जांच कर उपचार किया। टीम ने पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने तथा शुरुआत में बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी।
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पशुपालन विभाग की टीम ने पशुपालकों को बताया कि लंपी स्किन डिजीज गोवंश में फैलने वाली बीमारी है। बीमारी की जानकारी मिलते ही पशुपालक सतर्क रहें और संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। चिकित्सकों के अनुसार बीमारी में मृत्यु दर सामान्य तौर पर काफी कम रहती है, इसलिए पशुपालकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि बीमारी की शुरुआत में ही पशु का उपचार शुरू करना और उसकी उचित देखभाल करना जरूरी है।
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विभागीय टीम के अनुसार शुरुआती अवस्था में इवरमेक्टिन और लेवामिसोल जैसी दवाओं का प्रयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है। पशु को बुखार होने की स्थिति में एंटीपायरेटिक दवा दी जा सकती है। टीम ने विशेष रूप से पशुपालकों को सलाह दी कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के शुरुआत में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें। बीमारी की रोकथाम के लिए गांवों में टीकाकरण अभियान चलाकर गोवंशों को वैक्सीन लगाई जा रही है।

टीम के अनुसार, यदि कोई पशुपालक देसी उपचार अपनाना चाहता है तो 100-100 ग्राम आंवला, काली जीरी, सेंधा नमक, अंबा हल्दी और खाने का सोडा मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकता है। इसमें से करीब 50 ग्राम प्रतिदिन पशु को खिलाने की सलाह दी गई। इसके अलावा करीब 500 ग्राम नीम के पत्तों को पांच किलो पानी में उबालकर उसकी चटनी तैयार कर पशु को खिलाने की जानकारी भी दी गई। टीम ने पशुपालकों से कहा कि लंपी के लक्षण दिखने पर बीमारी को छिपाने के बजाय तत्काल पशुपालन विभाग को सूचना दें।
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