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ऊपरी गंगनहर हुई चालू, रजबहों की सफाई अधूरी
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ऊपरी गंगनहर हुई चालू, रजबहों की सफाई अधूरी
मेरठ। रजबहों और माइनरों की वार्षिक सफाई के नाम पर पश्चिमी यूपी के दोआबा क्षेत्र के किसानों की लाइफलाइन ऊपरी गंगनहर को एक माह बंद रखने के बाद चालू कर दिया। लेकिन आधी-अधूरी तैयारी और बजट के बावजूद रजबहों की सफाई पूरी नहीं हो सकी। करीब सौ किमी रजबहों की सफाई अभी बाकी है। किसानों को पानी की बेहद आवश्यकता है। ऐसे में सफाई नहीं होने वाले रजबहों से किस तरह पानी की आपूर्ति की जाएगी।
सिंचाई विभाग हर साल रजबहों और माइनरों की वार्षिक सफाई के लिए ऊपरी गंगनहर को एक महीने के लिए बंद करता है। विभाग ने गत 15 अक्तूबर को गंगनहर को बंद किया था। इसके बाद मेरठ खंड ने रजबहों और माइनरों की सफाई करानी शुरू की। शासन ने इसके लिए 1.60 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। लेकिन निर्धारित समय में विभाग शत प्रतिशत रजबहों की सफाई कराने में नाकाम रहा। गंगनहर में गत 14 नवंबर की आधी रात हरिद्वार से पानी छोड़ दिया गया। पानी मंगलवार सुबह मेरठ पहुंच गया।
करीब 100 किमी रजबहों की सफाई बाकी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मेरठ खंड में रजबहों की लंबाई करीब 353 किमी और माइनरों की लंबाई 295 किमी है। माइनरों की सफाई कर दी गई है। रजबहों की सफाई केवल 261 किमी ही हो सकी है। बाकी रजबहे साफ कराए जा रहे हैं।
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नॉन सिल्टिंग मॉडल के चलते नहीं होती सफाई
ब्रिटिश काल में 1842 से 1854 के मध्य बनी गंगनहर को अंग्रेजों ने नॉन सिल्टिंग मॉडल पर बनाया है। इसमें अंग्रेज इंजीनियर कर्नल प्रोबी कोटले ने हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया था। नॉन सिल्टिंग मॉडल के चलते नहर में सिल्ट जमा नहीं होती है। इसके चलते इसकी सफाई नहीं की जाती।
गंगनहर पुलों पर पसरी है गंदगी
सरधना। सरधना क्षेत्र में सोमवार रात गंगनहर में पानी आ गया। सिंचाई विभाग ने नहर की सफाई तो दूर माइनर व रजबहों की सफाई तक नहीं कराई। अधिशासी अभियंता ने नहर में पानी आने से पूर्व नहर पुलों के निकट से गंदगी की सफाई कराने की बात कही थी, लेकिन कपसाड, अटेरना माइनर में सिल्ट जमा है। पुल भी अटे पडे़ हैं। झिटकरी-मढ़ियाई माइनर की भी सफाई नहीं कराई गई। नंगला आर्डर रोड के निकट माइनर गोबर से अटी है।
रजबहों में पानी के लिए करना होगा इंतजार
जानीखुर्द। रजबहों की सफाई का काम पूरा नहीं होने के कारण पानी आने में अभी समय लगेगा। जानी क्षेत्र में गंगनहर से जानी, टिकरी, बाफर, टिमकिया और पूठ रजबहे की सफाई की गई। जानी, बाफर रजबहों की सफाई का काम पूरा नहीं हो पाया है। सिंचाई विभाग के जिलेदार रविपाल के अनुसार गंगनहर का पानी साफ नहीं है। गंगनहर में पीछे से कूड़ा करकट बहकर आ रहा है। चार-पांच दिन में पानी साफ आने पर रजबहों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
दस फीसदी काम बाकी
मेरठ खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आशुतोष सारस्वत का कहना है कि करीब 90 फीसदी रजबहों की सफाई करा दी है। 10 फीसदी काम बाकी है। माइनरों की पूरी सफाई हो चुकी है। किसान जिन माइनरों की बात कर रहे हैं, उनका निरीक्षण किया जाएगा।
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मेरठ। रजबहों और माइनरों की वार्षिक सफाई के नाम पर पश्चिमी यूपी के दोआबा क्षेत्र के किसानों की लाइफलाइन ऊपरी गंगनहर को एक माह बंद रखने के बाद चालू कर दिया। लेकिन आधी-अधूरी तैयारी और बजट के बावजूद रजबहों की सफाई पूरी नहीं हो सकी। करीब सौ किमी रजबहों की सफाई अभी बाकी है। किसानों को पानी की बेहद आवश्यकता है। ऐसे में सफाई नहीं होने वाले रजबहों से किस तरह पानी की आपूर्ति की जाएगी।
सिंचाई विभाग हर साल रजबहों और माइनरों की वार्षिक सफाई के लिए ऊपरी गंगनहर को एक महीने के लिए बंद करता है। विभाग ने गत 15 अक्तूबर को गंगनहर को बंद किया था। इसके बाद मेरठ खंड ने रजबहों और माइनरों की सफाई करानी शुरू की। शासन ने इसके लिए 1.60 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। लेकिन निर्धारित समय में विभाग शत प्रतिशत रजबहों की सफाई कराने में नाकाम रहा। गंगनहर में गत 14 नवंबर की आधी रात हरिद्वार से पानी छोड़ दिया गया। पानी मंगलवार सुबह मेरठ पहुंच गया।
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करीब 100 किमी रजबहों की सफाई बाकी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मेरठ खंड में रजबहों की लंबाई करीब 353 किमी और माइनरों की लंबाई 295 किमी है। माइनरों की सफाई कर दी गई है। रजबहों की सफाई केवल 261 किमी ही हो सकी है। बाकी रजबहे साफ कराए जा रहे हैं।
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नॉन सिल्टिंग मॉडल के चलते नहीं होती सफाई
ब्रिटिश काल में 1842 से 1854 के मध्य बनी गंगनहर को अंग्रेजों ने नॉन सिल्टिंग मॉडल पर बनाया है। इसमें अंग्रेज इंजीनियर कर्नल प्रोबी कोटले ने हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया था। नॉन सिल्टिंग मॉडल के चलते नहर में सिल्ट जमा नहीं होती है। इसके चलते इसकी सफाई नहीं की जाती।
गंगनहर पुलों पर पसरी है गंदगी
सरधना। सरधना क्षेत्र में सोमवार रात गंगनहर में पानी आ गया। सिंचाई विभाग ने नहर की सफाई तो दूर माइनर व रजबहों की सफाई तक नहीं कराई। अधिशासी अभियंता ने नहर में पानी आने से पूर्व नहर पुलों के निकट से गंदगी की सफाई कराने की बात कही थी, लेकिन कपसाड, अटेरना माइनर में सिल्ट जमा है। पुल भी अटे पडे़ हैं। झिटकरी-मढ़ियाई माइनर की भी सफाई नहीं कराई गई। नंगला आर्डर रोड के निकट माइनर गोबर से अटी है।
रजबहों में पानी के लिए करना होगा इंतजार
जानीखुर्द। रजबहों की सफाई का काम पूरा नहीं होने के कारण पानी आने में अभी समय लगेगा। जानी क्षेत्र में गंगनहर से जानी, टिकरी, बाफर, टिमकिया और पूठ रजबहे की सफाई की गई। जानी, बाफर रजबहों की सफाई का काम पूरा नहीं हो पाया है। सिंचाई विभाग के जिलेदार रविपाल के अनुसार गंगनहर का पानी साफ नहीं है। गंगनहर में पीछे से कूड़ा करकट बहकर आ रहा है। चार-पांच दिन में पानी साफ आने पर रजबहों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
दस फीसदी काम बाकी
मेरठ खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आशुतोष सारस्वत का कहना है कि करीब 90 फीसदी रजबहों की सफाई करा दी है। 10 फीसदी काम बाकी है। माइनरों की पूरी सफाई हो चुकी है। किसान जिन माइनरों की बात कर रहे हैं, उनका निरीक्षण किया जाएगा।