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Meerut News: यूपीआई पर 0.4% एमडीआर से कारोबारियों में आक्रोश

Wed, 16 Sep 2026 06:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 06:45 PM IST
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व्यापारी बोले- एमडीआर से लागत के साथ लेखा-दस्तावेजीकरण का भी बढ़ेगा बोझ
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। 15 अक्तूबर से यूपीआई पी2एम लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट (एमडीआर) रेट लागू होगा। यह 0.4 फीसदी एमडीआर दो हजार रुपये से अधिक के पात्र लेनदेन पर लगेगा। इस नए प्रावधान से कारोबारियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
नए नियम के तहत 75 हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। ग्राहक से सीधे कोई यूपीआई शुल्क नहीं लिया जाएगा। चैंबर फॉर डेवलपमेंट एंड प्रमोशन ऑफ एमएसएमई के सचिव आशुतोष अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई बिना एमडीआर के एक सुविधाजनक डिजिटल भुगतान माध्यम था। उनके अनुसार इस प्रावधान से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और नकद लेनदेन को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी देनी चाहिए थी।
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लेखा और दस्तावेजीकरण का बोझ
सीए सलोनी गुप्ता ने बताया कि जीएसटी टीडीएस के बाद अब एमडीआर का हिसाब रखना होगा। बैंक से सेटलमेंट का मिलान और अन्य लेखा संबंधी काम बढ़ेंगे। इससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त दस्तावेजी बोझ पड़ेगा। सराफ व्यापारी संजीव अग्रवाल ने कहा कि सराफ बाजार में चांदी की बिछिया और पायल जैसी वस्तुओं की कीमत भी दो हजार रुपये से अधिक होती है। मार्जिन पहले ही कम है और तीन प्रतिशत जीएसटी के बाद 0.4 प्रतिशत एमडीआर का भार व्यापारियों के लिए मुश्किल बढ़ाएगा।
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छोटे दुकानदारों और सीमित मार्जिन पर असर
दवा व्यापारी मयंक गुप्ता ने कहा कि छोटी दवा की दुकान भी रोजाना पांच से सात हजार रुपये तक यूपीआई भुगतान लेती है। ऐसे में महीने में डेढ़ से दो लाख रुपये का यूपीआई कारोबार हो जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि व्यवहार में छोटे दुकानदार भी इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। किराना विक्रेता शिवम बंसल ने कहा कि एमडीआर से व्यापारी पर लागत और दस्तावेजीकरण, दोनों का बोझ बढ़ेगा। वहीं कपड़ा व्यापारी फिरोज आलम ने कहा कि व्यापारियों का मार्जिन पहले ही सीमित है ऐसे में अतिरिक्त लागत का असर पड़ेगा।
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