Exclusive: करोड़ों हुए खर्च मगर हीमोग्लोबिन की कमी से जूझ रहीं गर्भवती महिलाएं, दोगुना हुआ प्रतिशत
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यूपी के मेरठ जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी का प्रतिशत दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। यह खुलासा हेल्थ मैनेजमेंट इंर्फोमेशन सिस्टम की रिपोर्ट में हुआ है। साल 2017-18 में 68 हजार 651 गर्भवती महिलाओं में से 19.3 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से ग्रसित मिली थीं, जबकि साल 2018-19 में 39 हजार 317 गर्भवती महिलाओं में से 42.8 प्रतिशत महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी निकली है।
एक सामान्य महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन लेवल 11.5 से 15 ग्राम पर डेसिलीटर होता है। 10 ग्राम डेसिलीटर तक भी हीमोग्लोबिन लेवल सामान्य मान लिया जाता है, मगर इससे कम खतरनाक होता है। इन महिलाओं में 10 ग्राम डेसिलीटर से कम हीमोग्लोबिन लेवल निकला है। कम हीमोग्लोबिन गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी घातक है।
महिला जिला अस्पताल में पिछले छह माह में 713 महिलाओं का सिजेरियन डिलिवरी कराई गई। इन महिलाओं को 122 यूनिट रक्त भी चढ़ा है। इनमें हीमोग्लोबिन की कमी थी। हालत गंभीर होने केकारण इनमें से 218 महिलाओं को हायर सेंटर (मेडिकल) के लिए भी रेफर किया गया।
-2018-19 में 42.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में निकली खून की कमी।
-2017-18 में 19.3 प्रतिशत महिलाओं में कम हीमोग्लोबिन निकला था।
-जिले की 39,317 गर्भवती महिलाओं पर की गई स्टडी।
67 लाख से ज्यादा आयरन टेबलेट बांटी गई थीं
गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए सरकार की तरफ से तमाम तरह की योजनाएं हैं, बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं को सेहतमंद रखने में फेल साबित हो रहा है। दरअसल, एक गर्भवती महिला को आयरन की 180 टेबलेट दी जाती हैं। इस तरह सालभर में 67 लाख से ज्यादा आयरन टेबलेट बांटी गई हैं।
जननी सुरक्षा योजना के तहत साढ़े चार करोड़ से ज्यादा रुपये स्वास्थ्य विभाग के पास आए हैं, इसके अलावा 6 करोड़ 87 लाख से ज्यादा पैसा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना के तहत महिलाओं को दिया गया है, मगर गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन बढ़ने के बजाय‘घटता’ जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग नहीं निभा रहा जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा रहा है। अफसर इसका ठीकरा कर्मचारियों और आशाओं पर फोड़ते हैं तो आशा और कर्मचारी अफसरों पर। आयरन टेबलेट का वितरण सही तरीके से नहीं हो पाता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले पैसों के लिए भी महिलाओं को भटकना पड़ता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसकी वजह महिलाओं का सरकार से मिलने वाले पैसों का सही इस्तेमाल न करना बताते हैं।
लापरवाही की होगी जांच
समय-समय पर आयरन की टेबलेट बांटी जाती हैं। हीमोग्लोबिन सिर्फ आयरन टेबलेट से नहीं बढ़ता है, इसके लिए पौष्टिक आहार भी लेना होता है, महिलाएं शायद इसमें कमी कर जाती हैं। फिर अगर स्कहीं कोई लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
हीमोग्लोबिन कम होने की वजह
एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की देखभाल करने के लिए शरीर का आकार तो बढ़ जाता है, मगर उसमें लाल रक्त कोशिका की वृद्धि नहीं होती है। इसलिए हीमोग्लोबिन लेवल कम हो जाता है। इसमें पौष्टिक आहार और आयरन टेबलेट खाने पड़ती हैं। महिलाओं में जागरूकता की कमी भी इसकी एक वजह है।
खून की कमी के कारण
शरीर में फॉलिक एसिड की कमी
विटामिन बी की कमी
आयरन की कमी समेत और भी अन्य कारण हैं।
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