यूपी: पिंक-पिंक या रेड-रेड, महिला जिला अस्पताल में अब कलर कोड से होगी सुरक्षा
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महिला जिला अस्पताल में आपदा के दौरान, बच्चा चोरी होने या अन्य किसी गंभीर हादसे की स्थिति में अफरातफरी न मचे, इसके लिए सुरक्षा प्लान तैयार किया गया है। यह प्लान रंगों के कोड के जरिए बनाया गया है। मसलन, अगर किसी का बच्चा चोरी हो जाता है तो अनाउंसमेंट किया जाएगा पिंक-पिंक (गुलाबी-गुलाबी) और अगर चिकित्सालय में आग लग जाती है तो अनाउंस किया जाएगा रेड-रेड (लाल-लाल)।
दरअसल, महिला जिला अस्पताल में सामान्यत: महिलाएं और उनके बच्चे रहते हैं। ऐसे में अगर कोई घटना हो जाए तो अफरातफरी मच सकती है। लिहाजा तय किया गया है कि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले, इसलिए यह कोड व्यवस्था लागू की गई है। महिला जिला अस्पताल में हर माह ढाई से तीन हजार महिलाएं-गर्भवती आती हैं। उनके साथ काफी संख्या में बच्चे भी होते हैं। अफरातफरी मचने से गर्भवती महिला और बच्चों को भी नुकसान हो सकता है।
100 बेड का है अस्पताल
महिला जिला अस्पताल 100 बेड का है। करीब चार माह पहले ही अस्पताल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है। अलग-अलग फ्लोर पर गर्भवती महिलाओं के लिए वार्ड बने हुए हैं। इसके अलावा कंगारू केयर यूनिट शुरू होने वाली है। एसएनसीयू है, जिसमें प्रीमैच्योर बच्चे रखे जाते हैं।
स्टाफ को दी जा रही ट्रेनिंग
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कर्मचारी और स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। कोशिश है कि महिलाओं और बच्चों की बेहतर सुरक्षा हो सके। उम्मीद है कि कोड व्यवस्था से अफरातफरी की स्थिति नहीं रहेगी। -डॉ. मनीष वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल
यह तय किया गया है रंगों का कोड
कोड येलो (पीला): बाहरी आपदा, भूकंप, ट्रेन एक्सीडेंट, बाढ़ आदि की स्थिति में।
कोर्ड ब्लैक (काला): चिकित्सालय में बम रखे होने की स्थिति में।
कोड ब्लू (नीला): चिकित्सालय में दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में।
कोड रेड (लाल): चिकित्सालय में आग लगने की स्थिति में।
कोड पिंक (गुलाबी): बच्चा चोरी होने या खो जाने की स्थिति में।
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