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UP: सियासत की हांडी में पक रही जलालाबाद किले की जांच रिपोर्ट, कब्जा RLD विधायक का, हिंदू सगठन ठोक रहे दावा

Mon, 31 Mar 2025 03:12 PM IST
डिंपल सिरोही राजेंद्र माैर्य, अमर उजाला, मेरठ
राजेंद्र माैर्य, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 31 Mar 2025 03:12 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के शामली स्थित जलालाबाद स्थित किले की जांच अभी अधर में लटकी है। हिंदू संगठनों का दावा है कि किला उनके पूर्वजों का है जबकि रालोद विधायक अशरफ अली इसे अपने पूर्वजों की धरोहर बता रहे हैं। फिलहाल किले के विवाद को लेकर जांच सियासत की हांडी में पक रही है।

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UP: Investigation report of Jalalabad fort is being cooked in the pot of politics, RLD MLA is in possession
दुर्ग कल्याण समिति सचिव भानू प्रताप सिंह, रालोद विधायक अशरफ अली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलालाबाद में ऐतिहासिक किला विवादों में है, इस पर भाजपा सरकार के साथ गठबंधन में रालोद विधायक अशरफ अली खान कई पीढ़ियों से काबिज हैं। वे इसे अपने पूर्वजों द्वारा बनाए जाने का दावा करते हैं, लेकिन निर्माण कराने वाले अपने किसी पूर्वज का नाम नहीं बता पाते हैं। 

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दूसरी तरफ कुछ हिंदू अपने पूर्वजों द्वारा बनाया गया बताकर इसको पुरातत्व विभाग को सौंपे जाने की मांग कर रहे हैं। दो वर्षों से इसकी भूलभुलैया जांच प्रशासन कर रहा है। यह जांच कब पूरी होगी और उसकी रिपोर्ट कब पुरातत्व विभाग को भेजी जाएगी, यह जिले का कोई भी अधिकारी बताने के लिए तैयार नहीं है। 
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जलालाबाद कस्बे में कई सौ साल पुराना ऐतिहासिक किला है, जो वर्तमान में पुराने निर्माण के साथ आधुनिक निर्माण का मिश्रित नमूना बन चुका है। नगर में सबसे ऊंचाई पर स्थित इस किले का मुख्य द्वार इतना बड़ा है, जिसमें हाथी भी आसानी से प्रवेश कर जाए। रालोद विधायक अशरफ अली अपने परिवार के साथ इसमें काबिज हैं। उन्होंने अपने रहने के लिए इसके परिसर में नया भवन भी बनवाया है।
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अशरफ अली खान का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी सियासत करने वाला खानदान है। उनके पिता शौकत अली खान नगर पंचायत के चेयरमैन थे, जबकि उनके ताऊ गय्यूर अली खान कई बार विधायक व सांसद रहे। उनके दादा लियाकत अली भी अंग्रेजी शासन काल में ऑनरेरी मजिस्ट्रेट थे। अशरफ अली यह दावा तो करते हैं कि यह किला उनके पूर्वजों ने बनवाया है, जिसके दस्तावेज उनके पास हैं लेकिन जब उनसे सवाल किया गया कि उनके किस पूर्वज ने यह किला बनवाया तो वह निरुत्तर हो गए। 

दूसरी तरफ इस किले को हिंदुओं का बता रहे लोगों ने मनहार खेड़ा दुर्ग कल्याण समिति बनाई हुई है। इस समिति के सचिव भानू प्रताप सिंह किले को अपने पूर्वजों का बताते हुए संरक्षण किए जाने की मांग कर रहे हैं। 27 जनवरी 2023 को पुरातत्व विभाग के उत्खनन और अन्वेषण अधिकारी रामविनय ने पहली बार प्रशासन को पत्र लिखकर किले के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। अब तक चार बार पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। समिति अफसरों से मिलकर, प्रदर्शन आदि के जरिए निरंतर दबाव बना रही है कि किले को कब्जामुक्त कराया जाए और पुरातत्व विभाग को सौंपकर संरक्षित किया जाए। 

पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर किले का सरकारी रिकॉर्ड, खसरा खतौनी, राजस्व नक्शा गाटा संख्या, रकबा आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, मगर जिला प्रशासन ने खानापूर्ति करते हुए 29 दिसंबर 2025 को आधी-अधूरी एक रिपोर्ट एसडीएम शामली विनय कुमार ने पुरातत्व विभाग को भेजी थी, जिसको दो दिन बाद ही पुरातत्व विभाग ने अस्पष्ट बताकर नए सिरे से  स्पष्ट रिपोर्ट भेजने को कहा था। इस निर्देश को भी अब तीन माह बीत चुके हैं। 

किला हमारे पूर्वजों का है। मुस्लिम संप्रदाय के लोगों ने जबरन इस पर कब्जा कर लिया था। अब यहां रालोद विधायक काबिज हैं। जल्द से जल्द किले को मनहार किला घोषित कर संरक्षित किया जाना चाहिए। -भानू प्रताप सिंह, सचिव मनहार खेड़ा दुर्ग कल्याण समिति। 

किला मेरे पूर्वजों का है, जिसके सभी कागजात मेरे पास हैं। बयान भी एसडीएम के समक्ष दर्ज करा दिए गए हैं। कुछ लोग बेवजह किले को अपने पूर्वजों का बताकर विवाद खड़ा कर रहे हैं। -अशरफ अली, रालोद विधायक, थानाभवन क्षेत्र।

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पहली रिपोर्ट में यह बातें आईं सामने 
प्रशासन की प्राथमिक जांच में राजस्व रिकॉर्ड में किले की जमीन आबादी के नंबर के रूप में तो दर्ज है, लेकिन इसमें किसी की पैतृक संपत्ति या किले का इंद्राज नहीं मिला था।

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