दरोगा पिटाई मामला: मुख्यमंत्री योगी तक पहुंचा केस, भाजपा नेताओं ने पुलिस पर उठाए ये सवाल
मेरठ में दरोगा पिटाई प्रकरण में भले ही पुलिस की तरफ से पार्षद के ऊपर लगी डकैती की धारा को हटाने के लिए कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर दिया गया हो। लेकिन कार्यकर्ताओं का आक्रोश थम नहीं रहा है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने जिस तरह कार्रवाई की है, उसे कार्यकर्ता ही नहीं भाजपा नेता भी एकतरफा मान रहे हैं। ऐसे में लोकसभा 2019 को सामने रखते हुए भाजपा का स्थानीय नेतृत्व सोशल मीडिया पर हो रही पोस्ट के स्क्रीनशॉट हाईकमान को भेजते हुए पूरे मामले की स्थिति से अवगत करा रहा है। भाजपा नेता तुषार गुप्ता और रितेश कुमार और अन्य नेता सोशल साइट पर वीडियो वायरल कर रहे हैं।
दरोगा के खिलाफ सिर्फ लाइन हाजिर की कार्रवाई होना भाजपाइयों के गले नहीं उतर रहा है। एक तरफ जहां लोकसभा 2019 के चुनाव की तैयारी को लेकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की बात चल रही है। वहीं, इस घटना को लेकर भाजपा कार्यकर्ता हताशा के बीच आक्रोश से भरे हैं। भाजपा का स्थानीय संगठन और जनप्रतिनिधि भी इस मामले में पुलिस कार्रवाई से हैरत में हैं। इस पूरे प्रकरण पर फेसबुक पर लगातार मैसेज वायरल हो रहे हैं, जिसमें कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ नजर आ रहा है।
भाजपा महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने बताया कि पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह एकतरफा है। जिसमें एसएसपी का हठधर्मिता और पक्षपातपूर्ण रवैया साफ नजर आता है। घटना के दिन ही पुलिस को दरोगा और महिला का मेडिकल कराना चाहिए था। लेकिन एक तरफ जहां महिला का कोई मेडिकल नहीं कराया गया तो दरोगा के ब्लड का सैंपल तो लिया गया। लेकिन जांच नहीं हुई। जबकि जिला अस्पताल में जांच की सुविधा है और रिपोर्ट तुरंत मिल जाती है। ऐसे में साफ है कि केस को कमजोर करने के लिए ऐसा किया गया।
दरोगा पर कार्रवाई के नाम पर चुप्पी क्यों?
होटल मालिक (भाजपा पार्षद) को जेल भेजने और दरोगा पर कार्रवाई न करने को लेकर भाजपाइयों और व्यापारियों में पुलिस के प्रति गुस्सा है। दरोगा के साथ होटल में मौजूद रही महिला वकील पर मेरठ व जिला बार एसोसिएशन ने बड़ी कार्रवाई कर दी। लेकिन पुलिस अधिकारी दरोगा के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हैं। यह प्रकरण अब मुख्यमंत्री तक पहुंच गया और शासन ने रिपोर्ट तलब कर ली है।
इस पूरे प्रकरण पर सोशल साइटों पर मेरठ पुलिस के खिलाफ भाजपा नेता व व्यापारी पोस्ट डाल रहे हैं, जिससे मेरठ पुलिस की किरकिरी हो रही है। व्यापारियों ने 29 अक्तूबर को मेरठ बंद करने का ऐलान भी किया हुआ है। इसके बावजूद आला अधिकारी दरोगा की गलती मानने को तैयार नहीं हैं। जबकि सार्वजनिक स्थल पर पुलिस वर्दी में दरोगा का आचरण पूरी तरह से आपत्तिजनक और पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाला है। जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें दरोगा अनुचित आचरण के लिए दोषी माना जा रहा है। वहीं, भाजपा और व्यापारियों के आक्रोश का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा तो मामला गंभीर होने के चलते लखनऊ ने मेरठ पुलिस से इस प्रकरण की सारी रिपोर्ट तलब कर ली।
हो सकता है एक्शन
पुलिस ने इस केस में डकैती की धारा गलत तरीके से लगाने की बात मान ली। कोर्ट में इसकी अर्जी दाखिल कर दी। लेकिन दरोगा पर कार्रवाई न करने को लेकर अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं। शुरूआती प्रकरण के बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया था कि मामला खाकी की बदनामी से जुड़ा है। क्योंकि भाजपा पार्षद सरेआम दरोगा को थप्पड़ मार रहा है। लेकिन उसके बाद वायरल वीडियो में दरोगा के दावे झूठे निकलने शुरू हुए तो सब कुछ सामने आने पर भी अधिकारी खामोश है। इस मामले में लखनऊ से एक्शन हो सकता है।
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