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Indo-Pak Tension: साइबर एक्सपर्ट कर रहे अलर्ट, किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, हो सकता है बड़ा नुकसान
Mon, 12 May 2025 01:41 PM IST
डिंपल सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: डिंपल सिरोही
Updated Mon, 12 May 2025 01:41 PM IST
सार
सर्जिकल स्ट्राइक से संबंधित कोई लिंक आए, जिसमें आप सहमत हैं या नहीं, इस लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से आपके मोबाइल या लैपटॉप का पूरा डाटा शेयर हो सकता है। यहां तक कि बैंक खाता भी खाली हो सकता है।
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भारत-पाकिस्तान तनाव (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत-पाकिस्तान में संघर्ष के बीच साइबर एक्सपर्ट अलर्ट कर रहे हैं कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अन्यथा आपके मोबाइल और लैपटॉप का पूरा डाटा शेयर हो सकता है। यह डाटा पाकिस्तान के साइबर अपराधियों के पास भी जा सकता है। साइबर एक्सपर्ट और साइबर थाने के प्रभारी जय प्रकाश यादव ने बताया कि 2025 में अब तक 41 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि पांच सौ से ज्यादा साइबर ठगी के प्रार्थना पत्र आ गए हैं। इन्हें संबंधित थानों में भेजा गया है।
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भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष से संबंधित किसी लिंक पर क्लिक न करें। इससे साइबर अपराधी आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं। ऐसी जानकारी मिल रही है कि साइबर अपराधी संघर्ष से संबंधी फोटाे या वीडियो का लिंक भेजकर ठगी कर सकते हैं।
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सर्जिकल स्ट्राइक से संबंधित कोई लिंक आए, जिसमें आप सहमत हैं या नहीं, इस लिंक पर क्लिक करने से बचें। इससे साइबर अपराधी आपकी निजी जानकारी एकत्र कर आपका खाता खाली करने के साथ आईडी हैक और साइबर अटैक भी कर सकते हैं। आपके पूरे परिवार के साथ साइबर ठगी कर सकते हैं। भारत-पाक संघर्ष के बीच साइबर एक्सपर्ट लोगों को अनजान लिंक से बचने के तरीके भी बता रहे हैं।
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साइबर अपराधी का यह भी है शिकार बनाने का तरीका
ठगी करने के लिए साइबर अपराधी ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में बड़े मुनाफे का झांसा देते हैं। शेयर, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो करेंसी, सोना और रियल एस्टेट आदि में निवेश करने के लिए शिकार को प्रेरित करते हैं। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम ग्रुप और इंस्टाग्राम का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। फर्जी वेबसाइट भी इसके लिए बनाई जाती हैं। शुरुआत में यहां निवेशक को छोटी रकम पर जल्द मुनाफा दिखाकर जाल में फंसाया जाता है। इसके बाद लालच में आकर लोग बड़ी रकम गंवा देते हैं।
ये बरतें सावधानी
- कम निवेश पर थोड़े समय में बड़े मुनाफे की योजनाओं की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें। बहुत ज्यादा रिटर्न के ऑफर से बचें, निवेश पर शर्तिया मुनाफे जैसा कुछ नहीं होता। - निवेश संबंधी सलाह लेने से पहले हमेशा वेरिफिकेशन के लिए सेबी या आरबीआई से जारी लाइसेंस मांगें।
- अनचाही कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए आने वाले मैसेज से सावधान रहें।
- अगर कोई ब्रोकर बार-बार किसी खास तरह के निवेश के बारे में बात कर रहा है, तो हो सकता है कि वो ठगने की कोशिश कर रहा हो। ऐसे में आपको सावधान होने की जरूरत है।
- साइबर ठग लोगों के पैसों को निवेश में लगाने के बाद टैक्स या फीस के तौर पर कई बार पैसों की मांग करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का शुल्क देने से पहले अच्छी तरह से जांच करें।
- अगर आप किसी धोखेबाज के जाल में फंस गए हैं तो निवेश किया पैसा दोबारा नहीं मिलता है। इस बात को चेक करने के लिए आप निवेश की गई रकम को मांगकर देख सकते हैं।
- इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी साइबर ठग सच्चाई सामने आने से पहले तक अलग-अलग तरीकों से पैसों की मांग करता रहेगा। जालसाज धमकी के जरिए भी पैसों की मांग कर सकते हैं।
- अगर आप किसी व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में शामिल हो रहे हैं तो उसका एडमिन कौन है, इसकी जांच जरूर करें। अगर यह फाइनेंस से जुड़ा हुआ है तो उनका रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर मांगें। सेबी या संबंधित लाइसेंसिंग प्लेटफॉर्म से इसके सर्टिफिकेशन की जांच करें।
- स्टॉक मार्केट स्कैम से खुद को बचाने का आसान तरीका यह है कि बिना सबूत के किसी पर भी भरोसा न करें। निवेश करने से पहले सेबी की वेबसाइट पर जाकर पुष्टि करें। अगर संस्थान रजिस्टर नहीं है तो लेन-देन न करें।
- किसी नए एप या वेबसाइट के जरिए निवेश करने से पहले यह वेरिफाई करें कि यह असली है या नकली। अगर यह स्टॉक निवेश एप है तो सेबी का लाइसेंस देखें और अगर यह एनएफबीसी (नॉन फाइनेंस बैंकिंग कंपनी) है तो आरबीआई लाइसेंस की जांच करें।
- ऐसे एपीके एप डाउनलोड करने से बचें, जो गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर पर नहीं हैं। ठगी होने पर टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
- अपनी पर्सनल या फाइनेंशियल जानकारी जैसे लॉगिन आईडी, पासवर्ड, बैंक डिटेल्स या ओटीपी कभी किसी के साथ शेयर न करें। भले ही कोई किसी प्रतिष्ठित फर्म, कंपनी या बैंक से होने का दावा करता हो।
ठगी करने के लिए साइबर अपराधी ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में बड़े मुनाफे का झांसा देते हैं। शेयर, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो करेंसी, सोना और रियल एस्टेट आदि में निवेश करने के लिए शिकार को प्रेरित करते हैं। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम ग्रुप और इंस्टाग्राम का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। फर्जी वेबसाइट भी इसके लिए बनाई जाती हैं। शुरुआत में यहां निवेशक को छोटी रकम पर जल्द मुनाफा दिखाकर जाल में फंसाया जाता है। इसके बाद लालच में आकर लोग बड़ी रकम गंवा देते हैं।
ये बरतें सावधानी
- कम निवेश पर थोड़े समय में बड़े मुनाफे की योजनाओं की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें। बहुत ज्यादा रिटर्न के ऑफर से बचें, निवेश पर शर्तिया मुनाफे जैसा कुछ नहीं होता। - निवेश संबंधी सलाह लेने से पहले हमेशा वेरिफिकेशन के लिए सेबी या आरबीआई से जारी लाइसेंस मांगें।
- अनचाही कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए आने वाले मैसेज से सावधान रहें।
- अगर कोई ब्रोकर बार-बार किसी खास तरह के निवेश के बारे में बात कर रहा है, तो हो सकता है कि वो ठगने की कोशिश कर रहा हो। ऐसे में आपको सावधान होने की जरूरत है।
- साइबर ठग लोगों के पैसों को निवेश में लगाने के बाद टैक्स या फीस के तौर पर कई बार पैसों की मांग करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का शुल्क देने से पहले अच्छी तरह से जांच करें।
- अगर आप किसी धोखेबाज के जाल में फंस गए हैं तो निवेश किया पैसा दोबारा नहीं मिलता है। इस बात को चेक करने के लिए आप निवेश की गई रकम को मांगकर देख सकते हैं।
- इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी साइबर ठग सच्चाई सामने आने से पहले तक अलग-अलग तरीकों से पैसों की मांग करता रहेगा। जालसाज धमकी के जरिए भी पैसों की मांग कर सकते हैं।
- अगर आप किसी व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में शामिल हो रहे हैं तो उसका एडमिन कौन है, इसकी जांच जरूर करें। अगर यह फाइनेंस से जुड़ा हुआ है तो उनका रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर मांगें। सेबी या संबंधित लाइसेंसिंग प्लेटफॉर्म से इसके सर्टिफिकेशन की जांच करें।
- स्टॉक मार्केट स्कैम से खुद को बचाने का आसान तरीका यह है कि बिना सबूत के किसी पर भी भरोसा न करें। निवेश करने से पहले सेबी की वेबसाइट पर जाकर पुष्टि करें। अगर संस्थान रजिस्टर नहीं है तो लेन-देन न करें।
- किसी नए एप या वेबसाइट के जरिए निवेश करने से पहले यह वेरिफाई करें कि यह असली है या नकली। अगर यह स्टॉक निवेश एप है तो सेबी का लाइसेंस देखें और अगर यह एनएफबीसी (नॉन फाइनेंस बैंकिंग कंपनी) है तो आरबीआई लाइसेंस की जांच करें।
- ऐसे एपीके एप डाउनलोड करने से बचें, जो गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर पर नहीं हैं। ठगी होने पर टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
- अपनी पर्सनल या फाइनेंशियल जानकारी जैसे लॉगिन आईडी, पासवर्ड, बैंक डिटेल्स या ओटीपी कभी किसी के साथ शेयर न करें। भले ही कोई किसी प्रतिष्ठित फर्म, कंपनी या बैंक से होने का दावा करता हो।
इन माध्यमों से करते है साइबर ठगी
- सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी।
- बिजली या गैस कनेक्शन काटने का हवाला देकर ठगी।
- परिचित बनकर खाते में पैसा डालने व मांगने के नाम पर ठगी।
- फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर भय दिखा कर डिजिटल अरेस्ट करके ठगी।
- बेटे की फर्जी करतूत का हवाला देकर मुकदमे में फंसाने के नाम पर ठगी।
- गूगल पर फर्जी नंबर देकर ठगी।
- कस्टमर केयर के नाम पर झांसा देकर ठगी।
- ओएलएक्स पर विज्ञापन देखकर ठगी।
- कूपन व ऑफर का लालच देकर लिंक क्लिक करने के नाम पर ठगी।
- लड़की की फोटो लगाकर कॉल करना बाद में ब्लैकमेल करके ठगी।
- लालच से बचे, किसी ऑफर को लेकर दो मिनट जरूर सोचें कि क्या ऐसा हो सकता है।
- डर दिखाने वालों से बचे, आपस में चर्चा जरूर करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत सूचना 1930 पर दें ताकि पैसे को समय पर होल्ड कराया जा सके।
- साइबर अपराध से बचने के लिए परिवार व मित्रों के साथ रिश्तेदारों को जरूर जागरूक करें।
- अपना पासवर्ड किसी को न बताएं।
- अपना ओटीपी शेयर करने से बचें।
- किसी भी तरह की आशंका पर पुलिस को जरूर सूचित करें।
इन्होंने कहा...
- साइबर ठगी के मामलों में जागरूकता की ज्यादा आवश्यकता है। ठगी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। जल्द सूचना मिलने पर साइबर एक्सपर्ट कार्रवाई करते हैं, कई बार पैसा समय रहते वापस भी आ जाता है। किसी अंजान लिंक पर क्लिक न करें। - अवनीश कुमार, एसपी क्राइम, मेरठ।
- सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी।
- बिजली या गैस कनेक्शन काटने का हवाला देकर ठगी।
- परिचित बनकर खाते में पैसा डालने व मांगने के नाम पर ठगी।
- फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर भय दिखा कर डिजिटल अरेस्ट करके ठगी।
- बेटे की फर्जी करतूत का हवाला देकर मुकदमे में फंसाने के नाम पर ठगी।
- गूगल पर फर्जी नंबर देकर ठगी।
- कस्टमर केयर के नाम पर झांसा देकर ठगी।
- ओएलएक्स पर विज्ञापन देखकर ठगी।
- कूपन व ऑफर का लालच देकर लिंक क्लिक करने के नाम पर ठगी।
- लड़की की फोटो लगाकर कॉल करना बाद में ब्लैकमेल करके ठगी।
- लालच से बचे, किसी ऑफर को लेकर दो मिनट जरूर सोचें कि क्या ऐसा हो सकता है।
- डर दिखाने वालों से बचे, आपस में चर्चा जरूर करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत सूचना 1930 पर दें ताकि पैसे को समय पर होल्ड कराया जा सके।
- साइबर अपराध से बचने के लिए परिवार व मित्रों के साथ रिश्तेदारों को जरूर जागरूक करें।
- अपना पासवर्ड किसी को न बताएं।
- अपना ओटीपी शेयर करने से बचें।
- किसी भी तरह की आशंका पर पुलिस को जरूर सूचित करें।
इन्होंने कहा...
- साइबर ठगी के मामलों में जागरूकता की ज्यादा आवश्यकता है। ठगी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। जल्द सूचना मिलने पर साइबर एक्सपर्ट कार्रवाई करते हैं, कई बार पैसा समय रहते वापस भी आ जाता है। किसी अंजान लिंक पर क्लिक न करें। - अवनीश कुमार, एसपी क्राइम, मेरठ।