यूपी: धरती के 230 फुट नीचे किया ब्लास्ट, तेल भंडारण की खोज शुरू
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यहां धरती के भीतर 230 फुट बोरिंग कराया गया। इसके बाद लोहे के पाइपों को बाहर निकाला गया। फिर डेटोनेटर (छोटे बम) को धरती में छोड़ गया। आगे जानिए पूरा अपडेट।
केंद्र सरकार ने बरेली से लेकर मुजफ्फरनगर तक धरती में गैस और तेल का भंडारण खोजने के लिए दक्षिण भारत की कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी है। गूगल नेट पर हवाई सर्वे कराने के बाद तेल व गैस का भंडारण पता लगाने के लिए तहसील जानसठ के गांव जड़वड़ के जंगल में कंपनी ने धरती में भंडारण की जांच करने का काम प्रारंभ कर दिया है।
कंपनी की ओर से जमीन में बोरिंग कराए जा रहे हैं। कंपनी के इंजीनियर के मुताबिक जांच प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन साल का समय लग सकता है। गांव जड़वड़ के जंगल में किसान किताबू पुत्र दिलेराम के खेत में धरती के अंदर गैस व तेल के भंडारण होने की संभावना पर काम शुरू करा दिया गया है।
कंपनी के अधिकारी अनीस ने बताया कि 20 वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने गूगल नेट पर एक हवाई सर्वे कराया था। इस सर्वे में बरेली से मुजफ्फरनगर तक गैस या तेल का भंडारण होने की संभावना जताई गई थी। पहले सर्वे के दो वर्ष बाद फिर एक सर्वे किया गया, जिसमें भंडारण होने की संभावना की यह बात फिर से दोहराई गई थी। इस पर ओएनजीसी ने दक्षिण भारत की जीइओ 8-आई नामक कंपनी को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच का कार्य इंडोनेशिया के इंजीनियर हेरी पीटर की देखरेख में चल रहा है।
इंजीनियर हेरी पीटर ने बताया कि गैस और तेल का भंडारण को तलाशने की जांच का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। यह कार्य लगभग तीन साल में पूरा होगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी गुजरात, राजस्थान, बर्मा में जांच की गई थी। परीक्षण के बाद काफी हद तक उनको सफलता मिली।
230 फुट धरती में डेटोनेटर से ब्लास्ट किया
इंजीनियर हेरी पीटर ने बताया कि धरती के भीतर 230 फुट बोरिंग कराया गया। इसके बाद लोहे के पाइपों को बाहर निकाला गया। गड्ढे में रस्सी में बांधकर डेटोनेटर (छोटे बम) को धरती में छोड़ गया। इन डेटोनेटर को लैपटॉप से नेट के जरिये धरती में ब्लास्ट कर पृथ्वी के कंपन की क्षमता आंकी गई। इंजीनियर ने बताया कि तीन तीन किलोमीटर के दायरे में 250-250 फुट के बोरिंग कराए जाएंगे। इसके बाद धरती में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। फिर 250 किलो आरडीएक्स से धरती में ब्लास्ट कराया जाएगा। धमाके से पृथ्वी कंपन की क्षमता आंकने पर धरती के अंदर तेल और गैस का पता लग सकेगा।
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