जमानत पर रिहा जरायम के खिलाड़ी बने पुलिस के लिए चुनौती, इनके इशारों पर कर रहे क्राइम
वारदात हुई तो आए याद
शहर में कोई बड़ी वारदात होने पर पुलिस को जेल से जमानत पर छूटे बदमाश अनीस, नौशाद, इरशाद, इरशाद उर्फ काला, शाहिद उर्फ कबूतर, शाहिद उर्फ लंगड़ा, जावेद उर्फ कचरा, हसनैन, मांगे उर्फ श्यामू, वसीम उर्फ सोबी, योगेंद्र उर्फ डब्बू, शब्बीर, कलीम, नौसी, विनोद जैसे करीब 120 अपराधी याद आते हैं। इन बदमाशों के मोबाइल नंबर व फोटो पुलिस के पास हैं। लेकिन इसके बावजूद ये बदमाश घटनाएं कर रहे हैं। खास बात यह है कि इनके से कई बदमाश अपनी पहचान और ठिकाने बदल चुके हैं। जिसके चलते यह कानून के हाथ से दूर हैं।
और दूसरा फरार हो जाता है
जमानत पर बाहर आए शातिर अपराधी ही पुलिस के टारगेट पर होते हैं। जब भी कोई मुठभेड़ होती है तो एक बदमाश के पैर में पुलिस की गोली लगती है और उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो जाता है। ये फरार बदमाश कौन होता है, इसकी पुलिस को नहीं होती। लेकिन शातिर अपराधी को पुलिस मुठभेड़ में नामजद कर लेती है, ताकि उस पर शिकंजा कसा जा सके।
मुखबिरों पर भी संकट मंडराया
डकैती होते ही खंगाला था रिकॉर्ड
मोहनपुरी में सीओ सिविल लाइन ऑफिस के सामने दो घरों में डकैती हुई थी। जिसमें पुलिस ने जेल से छूटे अपराधियों का रिकॉर्ड खंगाला। उनके फोटो का मिलान भी कराया। एक बदमाश शानू की पहचान हुई। उसके जरिये पूरा गैंग पकड़ा गया। जानी के बाफर गांव में जितेंद्र की हत्या में भी ऐसा खेल हुआ। जेल में बंद शातिर ने प्लानिंग करके शूटरों को एक लाख में हायर किया और फिर हत्या करा दी। खरखौदा के उलधन गांव में शातिर बदमाशों ने जेल से छूटते ही वारदात की। हस्तिनापुर के अलीपुर मोरना में हाल ही में हुए हत्याकांड की पटकथा भी जेल से रची गई थी।
नोएडा की घटना में शातिर बदमाश
बदमाशों की हर गतिविधि रहे पता
जेल से छूटे अपराधियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। क्राइम मीटिंग में थानेदारों को निर्देश दिए हैं कि अपराधियों की हर गतिविधि पुलिस को पता होनी चाहिए। थाने में हाजिरी रजिस्टर होता है, जो अपराधी जेल से छूटकर लापता हो जाता है, उसकी खोजबीन कर उचित कार्यवाही की जाए।
-अखिलेश कुमार, एसएसपी
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