फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   udhar me ganna

उधार में गन्ना डाल रहे किसान

Sat, 26 Nov 2016 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 26 Nov 2016 02:22 AM IST
विज्ञापन
 udhar me ganna
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के चलते किसान गेहूं बुआई के लिए खाद और बीज खरीदने में असमर्थ हैं। वहीं खेत खाली करने के लिए कोल्हुओं पर कम दाम के चलते भी अपना गन्ना उधार में डालने को मजबूर है। किसानों ने कालेधन को खत्म करने के लिए नोटबंदी का तो स्वागत किया लेकिन इससे उन्हें हो रही परेशानियों को खत्म करने की मांग की है।
विज्ञापन

केंद्र सरकार ने जब नोटबंदी का एलान किया था तो उस वक्त अधिकतर किसान गढ़मुक्तेश्वर और मखदूमपुर गंगा मेले में डेरा जमाए थे। वहां से आने के बाद किसानों के सामने गेहूं बुआई के लिए गन्ना काटकर खेत खाली करने की चुनौती थी। शुगर मिलों ने पेराई तो शुरू कर दिया, लेकिन किसानों के सामने करेंसी का संकट खड़ा हो गया। जिला सहकारी बैंक और सहकार समितियों में 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने से किसानों को गेहूं का बीज, डीएपी और दवा आदि खरीदने में दिक्कत हो रही है। गेहूं बुआई के लिए गन्ना काटकर खेत खाली कर रहे किसानों के सामने कोल्हू और शुगर मिल ही विकल्प है। शुगर मिलों से पर्याप्त पर्ची नहीं मिलने पर किसान कोल्हुओं को गन्ना दे रहे हैं। लेकिन नकदी का संकट बताकर कोल्हू संचालक भी किसान को नकद पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन


किसान बोले, नोटबंदी से हो रही परेशानी
गांव रोहटा निवासी बुजुर्ग किसान चौधरी भोपाल सिंह ने बताया कि किसानों को इस समय गन्ने की कटाई और गेहूं बुआई करनी है। नोटबंदी के बाद नकदी पास नहीं होने से किसान बीज, दवा, खाद नहीं खरीद पा रह हैं। गांव रासना निवासी अलाउद्दीन ने बताया कि उनका फर्नीचर का व्यवसाय हैं। किसानों ने शादी के लिए फर्नीचर बुक करा रखा है। लेकिन नकदी नहीं होेने के चलते किसानों को जान-पहचान के चलते उधार में ही फर्नीचर बनाकर देना पड़ रहा है। गांव जटपुरा निवासी चांदवीर सिंह ने बताया कि कालेधन को खत्म करने के लिए सरकार की पहल सही है। लेकिन इससे किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। अपना पैसा भी बैंक से नहीं मिल रहा है। गांव पाथौली निवासी मांगेराम ने बताया कि गेहूं की बुआई करनी है, लेकिन किसानों के पास नकदी नहीं है। कोल्हू वाले भी उधार में ही गन्ना ले रहे हैं। खेत खाली करने के लिए मजबूरी में किसान कोल्हुओं को गन्ना दे रहे हैं। रालोद के मीडिया प्रभारी सुनील रोहटा ने कहा कि कालेधन को खत्म करने के लिए नोटबंदी का कदम सही है, लेकिन तैयारी के साथ होना चाहिए था। किसानों के हाथ में नकदी नहीं पहुंच रही है। किसान खाद, बीज तक नहीं खरीद पा रहा है। बच्चों की फीस जमा नहीं हो रही और शादी भी पीछे हटानी पड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed