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Meerut News: कछुआ तस्करी में दो गिरफ्तार, 30 हजार का जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। वन रेंज हस्तिनापुर की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर दो लोगों को संरक्षित प्रजाति के कछुओं और रंगीन मछलियों के साथ गिरफ्तार किया। आरोपियों पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके बाद उन्हें नियमानुसार छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अनुसार संयुक्त कार्रवाई के दौरान नाजिम और फरमान निवासी असौड़ा जनपद हापुड़ को दो जीवित कछुओं और रंगीन मछलियों के साथ पकड़ा गया। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की संबंधित धाराओं में वन अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई।
वन विभाग विशेषज्ञों की जांच में बरामद कछुओं की पहचान ब्राउन रूफ्ड टर्टल के रूप में हुई। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-2 में संरक्षित है। ऐसे कछुओं का शिकार करना, पकड़ना, खरीद-फरोख्त करना, परिवहन करना या कब्जे में रखना कानूनन अपराध है।
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वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोनों आरोपियों पर कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल न होने का शपथपत्र देने और जुर्माना जमा करने के बाद उन्हें नियमानुसार मुक्त कर दिया गया। बरामद कछुओं का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
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हस्तिनापुर (मेरठ)। वन रेंज हस्तिनापुर की टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर दो लोगों को संरक्षित प्रजाति के कछुओं और रंगीन मछलियों के साथ गिरफ्तार किया। आरोपियों पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके बाद उन्हें नियमानुसार छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अनुसार संयुक्त कार्रवाई के दौरान नाजिम और फरमान निवासी असौड़ा जनपद हापुड़ को दो जीवित कछुओं और रंगीन मछलियों के साथ पकड़ा गया। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की संबंधित धाराओं में वन अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई।
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वन विभाग विशेषज्ञों की जांच में बरामद कछुओं की पहचान ब्राउन रूफ्ड टर्टल के रूप में हुई। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-2 में संरक्षित है। ऐसे कछुओं का शिकार करना, पकड़ना, खरीद-फरोख्त करना, परिवहन करना या कब्जे में रखना कानूनन अपराध है।
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वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोनों आरोपियों पर कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल न होने का शपथपत्र देने और जुर्माना जमा करने के बाद उन्हें नियमानुसार मुक्त कर दिया गया। बरामद कछुओं का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।