{"_id":"60df7e798ebc3ebf4950db30","slug":"turtles-pythons-seen-in-kali-river-there-is-hope-for-protection-city-news-mrt545594983","type":"story","status":"publish","title_hn":"काली नदी में दिखे कछुए और अजगर, जगी जलीय जीव-जंतु के सरंक्षण की आस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काली नदी में दिखे कछुए और अजगर, जगी जलीय जीव-जंतु के सरंक्षण की आस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काली नदी में दिखे कछुए और अजगर, संरक्षण की जगी आस
मेरठ। निर्मल होती काली नदी में एक और नजारा देखने को मिला है। गांवड़ी के दो किमी के हिस्से में नदी को साफ कर लिया गया। दोनों तरफ पटरी दूर से चकाचक नजर आ रही है। वहीं, दूसरी और नदी में कछुए और अजगर मिलने से जलीय जीव-जंतु के संरक्षण की आस जगी है। एक तरफ गंगा में कछुओं को संरक्षित करने के लिए वन विभाग प्रयास करता रहा है। इसके अलावा नदी को आगे बड़े स्तर पर ले जाने के लिए शासन से भी प्रोजेक्ट के लिए मांग की जाएगी।
शहर के जेल चुंगी चौराहे से किला-परीक्षितगढ़ मार्ग स्थित गांवड़ी नदी के पास आठ दिन से दो किमी के हिस्से को साफ करने का कार्य किया जा रहा है। इसमें मनरेगा श्रमिकों को लगाया गया है। वहीं, पोकलेन और जेसीबी भी नदी के खोदाई कर रही है। इन आठ दिनों में ही नदी की रंगत बदल गई है। इससे अधिकारियों में भी इस कार्य को करने के लिए रुचि बढ़ गई है। दो किमी के हिस्से में नदी की चमकती सूरत को देखते हुए दौराला क्षेत्र में भी सफाई शुरू कर दी गई।
प्रयास हो तो बन जाए रिवर फ्रंट जैसा नजारा
सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधि गौर करें तो इस दो किमी के हिस्से को रिवर फ्रंट जैसा बनाया जा सकता है। किला-परीक्षितगढ़ रोड पर बने पुल से देखने पर नदी के दोनों तरफ पटरी चकाचक दिखने लगी है। वहीं, दूर तक नदी में पानी भी दिखाई दे रहा है। इसके लिए शासन से बजट की मांग करने पर पॉथवे बनाकर रिवर फ्रंट जैसी शुरुआत की जा सकती है।
विज्ञापन
शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
मनरेगा श्रमिकों को काफी संख्या में कछुए और अजगर दिखाई दिए हैं। इससे आस जगी है कि यहां रिवर फ्रंट जैसा प्रोजेक्ट भी बनाया जा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। -शशांक चौधरी, मुख्य विकास अधिकारी
पूरा करेंगे प्रयास
श्रमिकों से सूचना मिली है कि कछुए दिखे हैं। ये अच्छी बात है कि प्रदूषित नदी में भी जलीय जीव जंतु आशियाना बना रहे हैं। हम इसको उसी तरीके से निर्मल करेंगे, जिससे बारिश में अन्य जलीय जीवों को भी प्राणवायु मिल सके। -राजेश कुमार, डीएफओ, मेरठ
विज्ञापन
मेरठ। निर्मल होती काली नदी में एक और नजारा देखने को मिला है। गांवड़ी के दो किमी के हिस्से में नदी को साफ कर लिया गया। दोनों तरफ पटरी दूर से चकाचक नजर आ रही है। वहीं, दूसरी और नदी में कछुए और अजगर मिलने से जलीय जीव-जंतु के संरक्षण की आस जगी है। एक तरफ गंगा में कछुओं को संरक्षित करने के लिए वन विभाग प्रयास करता रहा है। इसके अलावा नदी को आगे बड़े स्तर पर ले जाने के लिए शासन से भी प्रोजेक्ट के लिए मांग की जाएगी।
शहर के जेल चुंगी चौराहे से किला-परीक्षितगढ़ मार्ग स्थित गांवड़ी नदी के पास आठ दिन से दो किमी के हिस्से को साफ करने का कार्य किया जा रहा है। इसमें मनरेगा श्रमिकों को लगाया गया है। वहीं, पोकलेन और जेसीबी भी नदी के खोदाई कर रही है। इन आठ दिनों में ही नदी की रंगत बदल गई है। इससे अधिकारियों में भी इस कार्य को करने के लिए रुचि बढ़ गई है। दो किमी के हिस्से में नदी की चमकती सूरत को देखते हुए दौराला क्षेत्र में भी सफाई शुरू कर दी गई।
विज्ञापन
प्रयास हो तो बन जाए रिवर फ्रंट जैसा नजारा
सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधि गौर करें तो इस दो किमी के हिस्से को रिवर फ्रंट जैसा बनाया जा सकता है। किला-परीक्षितगढ़ रोड पर बने पुल से देखने पर नदी के दोनों तरफ पटरी चकाचक दिखने लगी है। वहीं, दूर तक नदी में पानी भी दिखाई दे रहा है। इसके लिए शासन से बजट की मांग करने पर पॉथवे बनाकर रिवर फ्रंट जैसी शुरुआत की जा सकती है।
विज्ञापन
शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
मनरेगा श्रमिकों को काफी संख्या में कछुए और अजगर दिखाई दिए हैं। इससे आस जगी है कि यहां रिवर फ्रंट जैसा प्रोजेक्ट भी बनाया जा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। -शशांक चौधरी, मुख्य विकास अधिकारी
पूरा करेंगे प्रयास
श्रमिकों से सूचना मिली है कि कछुए दिखे हैं। ये अच्छी बात है कि प्रदूषित नदी में भी जलीय जीव जंतु आशियाना बना रहे हैं। हम इसको उसी तरीके से निर्मल करेंगे, जिससे बारिश में अन्य जलीय जीवों को भी प्राणवायु मिल सके। -राजेश कुमार, डीएफओ, मेरठ