{"_id":"69ecd23237034df946064996","slug":"true-peace-lies-in-contentment-bhav-bhushan-meerut-news-c-228-1-mwn1001-104795-2026-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"संतोष में ही छिपी है सच्ची शांति : भाव भूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संतोष में ही छिपी है सच्ची शांति : भाव भूषण
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन भक्तों ने प्रातः जाप्य अनुष्ठान किया। शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। शांतिधारा वीरेंद्र कुमार जैन ने की। श्रद्धालुओं ने शांतिधारा के मंत्रों को श्रवण किया। श्रद्धालुओं ने मांडले पर 512 अर्घ्य चढ़ाए।
क्षेत्र पर विराजमान मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र विधान के माध्यम से सिद्धों का गुणगान करने से एक दिन हम भी ऐसे सिद्ध परमात्मा बन सकते हैं। कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं हैं जितना कि पड़ोसी के सुख को देख करके दुखी है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति अगर अपने किए कराए पर संतोष रखे तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। उसका जीवन पावन होगा। अगर वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथाह संपदा भी प्राप्त हो जाए तो वह सुखी नहीं हो सकता है क्योंकि वह मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच के मद में चूर हो कर असहज और अशांति का अनुभव करता है।
विधानाचार्य पंडित शरद कुमार जैन, पंडित आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। विधान में विपिन जैन, सुधीर जैन, गौरव जैन, राकेश जैन, प्रफुल्ल जैन, ऋषि जैन, अरुण जैन, सुधीर जैन, सुभाष चंद जैन, सिद्धांत जैन, आलोक जैन, कमलेश जैन आदि श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से अर्घ्य समर्पित किए। पंचपरमेष्ठी भगवान की आरती, सिद्धचक्र विधान की आरती एवं शास्त्र प्रवचन किए।
विज्ञापन
इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, कुणाल जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, कुश जैन, शुभम जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
विज्ञापन
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन भक्तों ने प्रातः जाप्य अनुष्ठान किया। शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। शांतिधारा वीरेंद्र कुमार जैन ने की। श्रद्धालुओं ने शांतिधारा के मंत्रों को श्रवण किया। श्रद्धालुओं ने मांडले पर 512 अर्घ्य चढ़ाए।
क्षेत्र पर विराजमान मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र विधान के माध्यम से सिद्धों का गुणगान करने से एक दिन हम भी ऐसे सिद्ध परमात्मा बन सकते हैं। कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं हैं जितना कि पड़ोसी के सुख को देख करके दुखी है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति अगर अपने किए कराए पर संतोष रखे तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। उसका जीवन पावन होगा। अगर वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथाह संपदा भी प्राप्त हो जाए तो वह सुखी नहीं हो सकता है क्योंकि वह मोह, राग, द्वेष, ईर्ष्या और लालच के मद में चूर हो कर असहज और अशांति का अनुभव करता है।
विज्ञापन
विधानाचार्य पंडित शरद कुमार जैन, पंडित आशीष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। विधान में विपिन जैन, सुधीर जैन, गौरव जैन, राकेश जैन, प्रफुल्ल जैन, ऋषि जैन, अरुण जैन, सुधीर जैन, सुभाष चंद जैन, सिद्धांत जैन, आलोक जैन, कमलेश जैन आदि श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से अर्घ्य समर्पित किए। पंचपरमेष्ठी भगवान की आरती, सिद्धचक्र विधान की आरती एवं शास्त्र प्रवचन किए।
विज्ञापन
इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, कुणाल जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, कुश जैन, शुभम जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।