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कवायद तेज: जंगल में नहीं, शहर के पास बस अड्डा चाहता है परिवहन निगम, जमीन की तलाश में जुटे अफसर
Wed, 08 Sep 2021 12:31 PM IST
Dimple Sirohi
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 08 Sep 2021 12:31 PM IST
सार
मेरठ में पिछले पांच साल से बस अड्डों को बाहर करने की मांग उठ रही है। मामला एनजीटी और हाईकोर्ट तक जा चुका है। प्रदेश सरकार ने सोहराबगेट बस अड्डे को पीपीपी योजना के अंतर्गत विकसित करने को मंजूरी दे रखी है।
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भैसाली बस अड्डा मेरठ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेरठ शहर में जाम की वजह बन रहे रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन, एमडीए, नगर निगम और रोडवेज अधिकारी अड्डे के लिए जमीन की तलाश में जुटे हैं। परिवहन निगम जंगल के बजाए शहर के नजदीक ही बस अड्डा चाहता है, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
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नगर निगम का कहना है कि 40 फीट चौड़ी रोड वाली जगह अड्डे के लिए चाहिए। इसके लिए परतापुर से आगे दिल्ली रोड और मोदीपुरम से आगे रुड़की रोड पर जमीन तलाशी जा रही है। जो जमीन मिल रही है वह मुख्य सड़क से काफी अंदर हैं।
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अधिकारियों का कहना है कि बस अड्डा ऐसी जगह हो जहां यात्री आसानी से आ जा सके। मेरठ महायोजना 2021 में रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर किया जाना था, लेकिन इस पर कोई काम नहीं हो सका। पिछले पांच साल से बस अड्डों को बाहर करने की मांग उठ रही है। मामला एनजीटी और हाईकोर्ट तक जा चुका है।
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इस तरह बनेगा सोहराबगेट बस अड्डा
प्रदेश सरकार ने सोहराबगेट बस अड्डे को पीपीपी योजना के अंतर्गत विकसित करने को मंजूरी दे रखी है। तीन मंजिला बस अड्डे में जहां ग्राउंड फ्लोर से बसों का संचालन होगा वहीं पहली मंजिल पर विभागीय कार्यालय बनाया जाएगा। दूसरी और तीसरी मंजिल पर मॉल का निर्माण किया जाना है।
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वर्कशाप से मिलेगी राहत
दिल्ली रोड स्थित रोडवेज की सेंट्रल वर्कशाप और अधिकारी आवास की जमीन पर रैपिड रेल वर्कशाप बनाई जा रही है। रोडवेज वर्कशाप को पल्हैडा में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे अब खराब बसें वर्कशाप में नहीं आ पाएगी। भैसाली अड्डे पर यात्री बसें ही आ पाएगी। इससे जाम की समस्या हल होगी। इसके साथ ही रैपिड रेल स्टेशन होने के चलते भैसाली बस अड्डा यात्रियों के लिए जरूरी है। रैपिड स्टेशन यहां अंडरग्राउंड प्रस्तावित है।
एक नजर में बस अड्डे
बस अड्डे के लिए संबंधित विभागों के साथ जमीन की तलाश की जा रही है। लेकिन अभी तक उपयुक्त जमीन दिखाई नहीं दी है। जमीन मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -केके शर्मा, आरएम रोडवेज मेरठ रीजन
दिल्ली रोड स्थित रोडवेज की सेंट्रल वर्कशाप और अधिकारी आवास की जमीन पर रैपिड रेल वर्कशाप बनाई जा रही है। रोडवेज वर्कशाप को पल्हैडा में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे अब खराब बसें वर्कशाप में नहीं आ पाएगी। भैसाली अड्डे पर यात्री बसें ही आ पाएगी। इससे जाम की समस्या हल होगी। इसके साथ ही रैपिड रेल स्टेशन होने के चलते भैसाली बस अड्डा यात्रियों के लिए जरूरी है। रैपिड स्टेशन यहां अंडरग्राउंड प्रस्तावित है।
एक नजर में बस अड्डे
- भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल 11671 वर्गमीटर
- 1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज
- मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल 13430 वर्गमीटर
- सोहराबगेट डिपो की स्थापना वर्ष 1978
- सोहराबगेट अड्डे का क्षेत्रफल 4954 वर्गमीटर
- सोहराबगेट कार्यशाला का क्षेत्रफल 12733 वर्गमीटर
- दोनों बस अड्डों से संचालित होने वाली बसें 650
- भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 60 हजार प्रतिदिन
- सोहराबगेट अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 20 हजार प्रतिदिन
- दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालयों द्वारा ए श्रेणी में रखा गया है।
बस अड्डे के लिए संबंधित विभागों के साथ जमीन की तलाश की जा रही है। लेकिन अभी तक उपयुक्त जमीन दिखाई नहीं दी है। जमीन मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -केके शर्मा, आरएम रोडवेज मेरठ रीजन