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नई शिक्षा नीति 2020: समय की जरूरत थी, कई बदलाव लाएगी नई शिक्षा नीति
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नई शिक्षा नीति 2020
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समय की जरूरत थी, कई बदलाव लाएगी नई शिक्षा नीति
मेरठ। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। यह बहु प्रतीक्षित नीति स्कूल से कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव लाएगी। यह समय की जरूरत थी। ऐसा माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षकों और अधिकारियों का मानना है।
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है नई शिक्षा नीति से प्रत्येक छात्र की क्षमताओं को बढ़ावा देना प्राथमिकता होगी। वैचारिक समझ पर जोर होगा। रचनात्मकता और महत्वपूर्ण सोच को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों के लिए कला और विज्ञान के बीच कोई कठिनाई, अलगाव नहीं होगा। नैतिकता, संवैधानिक मूल्य पाठ्यक्रम का प्रमुख हिस्सा होंगी। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य फतेह चंद का कहना है कि मैंने जहां तक इस नीति का अध्ययन किया है उससे लगता है कि पूरी तरह संरचना पर विचार किया गया है। इसमें संस्था को एक ढांचे पर लाने की कोशिश है। संस्कृत के अध्ययन पर बल दिया जाए ताकि छात्र भारत की संस्कृति को समझ सकें। शिक्षा सिर्फ मस्तिष्क ही नहीं, शरीर और मन की आवश्यकताओं को पूरा कर सके, इस पर बल दिया गया है।
डीएन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुशील कुमार का कहना है कि नई शिक्षा नीति में सबसे ज्यादा शिक्षकों के प्रशिक्षण को बदलने पर जोर है। इसमें स्कूलों के अध्यापक से लेकर उच्च शिक्षा तक अच्छे अध्यापक हों, इसके लिए ट्रेनिंग प्रोग्रामों और पद्धतियों में बदलाव की सिफारिश की गई थी। अध्यापक प्रशिक्षण पर विशेष रूप से बल देने की बात कही गई है। चावली देवी आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ नीलम का कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत तकनीक को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। ऑनलाइन शिक्षा पर जोर देने की बात कही गई है। इसके अलावा शिक्षा में तकनीक को जोड़ने की बात कही गई है। बच्चों के पढ़ाई के बोझ को कैसे संतुलित किया जाए, इस पर ध्यान दिया गया है।
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मेरठ। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। यह बहु प्रतीक्षित नीति स्कूल से कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव लाएगी। यह समय की जरूरत थी। ऐसा माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षकों और अधिकारियों का मानना है।
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है नई शिक्षा नीति से प्रत्येक छात्र की क्षमताओं को बढ़ावा देना प्राथमिकता होगी। वैचारिक समझ पर जोर होगा। रचनात्मकता और महत्वपूर्ण सोच को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों के लिए कला और विज्ञान के बीच कोई कठिनाई, अलगाव नहीं होगा। नैतिकता, संवैधानिक मूल्य पाठ्यक्रम का प्रमुख हिस्सा होंगी। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य फतेह चंद का कहना है कि मैंने जहां तक इस नीति का अध्ययन किया है उससे लगता है कि पूरी तरह संरचना पर विचार किया गया है। इसमें संस्था को एक ढांचे पर लाने की कोशिश है। संस्कृत के अध्ययन पर बल दिया जाए ताकि छात्र भारत की संस्कृति को समझ सकें। शिक्षा सिर्फ मस्तिष्क ही नहीं, शरीर और मन की आवश्यकताओं को पूरा कर सके, इस पर बल दिया गया है।
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डीएन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुशील कुमार का कहना है कि नई शिक्षा नीति में सबसे ज्यादा शिक्षकों के प्रशिक्षण को बदलने पर जोर है। इसमें स्कूलों के अध्यापक से लेकर उच्च शिक्षा तक अच्छे अध्यापक हों, इसके लिए ट्रेनिंग प्रोग्रामों और पद्धतियों में बदलाव की सिफारिश की गई थी। अध्यापक प्रशिक्षण पर विशेष रूप से बल देने की बात कही गई है। चावली देवी आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ नीलम का कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत तकनीक को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। ऑनलाइन शिक्षा पर जोर देने की बात कही गई है। इसके अलावा शिक्षा में तकनीक को जोड़ने की बात कही गई है। बच्चों के पढ़ाई के बोझ को कैसे संतुलित किया जाए, इस पर ध्यान दिया गया है।
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