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मौत से पहले कशमकश के वो 21 मिनट, सात बार बदला आत्महत्या का फैसला

Tue, 24 Jul 2018 10:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 24 Jul 2018 10:55 AM IST
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Those 21 minutes of confrontation before death, seven times changed, suicide decision

मम्मी का क्या हाल होगा? पापा और भाई कितना रोएंगे? मेरे बिना वो कैसे रहेंगे... मौत से पहले 21 मिनट तक कोमल शायद इसी कशमकश में आत्महत्या करने से खुद को रोके जा रही थी। सात बार उसने कूदने की कोशिश की। लेकिन फिर पैर पीछे कर लिए। लेकिन आखिर क्षणों में कोमल हार गई। उसने हताशा में एक ऐसा कदम उठा लिया, जिसका गम परिवार वालों को जिंदगी भर रहेगा। जो बेटी डॉक्टर बनकर सफलता की ऊंचाइयां छूना चाहती थी, उसने तीसरी मंजिल से कूदकर खुद को खत्म कर लिया।

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शास्त्रीनगर स्थित एमपीजीएस में 11 वीं की छात्रा कोमल का सपना था कि एमबीबीएस करके वो मम्मी-पापा की लाडली बनकर उनका नाम रोशन करे। इसलिए उसने 11वीं से ही कोचिंग शुरू कर दी। बायोलॉजी, फिजिक्स और केमेस्ट्री तीनों विषयों में कई कोचिंग सेंटरों पर डेमो लिया। बायोलॉजी उसे डॉक्टरेंस में अच्छी लगी। इसकी फीस उसने जमा कर दी। फिजिक्स और केमेस्ट्री में वो थर्ड आई में डेमो ले रही थी। थर्ड आई के डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि उससे फीस जमा करने को कहा गया था। लेकिन उसने कुछ दिन बाद फाइनल करने की बात कही थी। थर्ड आई में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को डॉ. नरेंद्र सिंह क्लास नहीं लेते। 
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रविवार सुबह को कोमल ने डॉक्टरेंस सेंटर में आदित्य चौहान की क्लास की। इसके बाद वो साढ़े दस बजे के करीब घर चली गई। लेकिन अचानक ऐसा कुछ हुआ कि वो दोपहर तकरीबन सवा दो बजे घर से निकलकर कोचिंग सेंटर वाली बिल्डिंग में दोबारा से पहुंच गई। रविवार होने की वजह से अधिकांश सेंटर बंद थे। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक 3 बजकर 25 मिनट पर कोमल ने बिल्डिंग के भीतर इंट्री की। वो सीढ़ियां चढ़ते हुए चौथी मंजिल तक पहुंचती दिखी। लेकिन वहां गेट पर ताला लगा होने की वजह से छत पर नहीं जा सकी। इसके बाद वो तीसरी मंजिल पर आकर रेलिंग के पास खड़ी हो गई। कोमल घर से ये सोचकर आई थी कि उसे उसी बिल्डिंग से जिंदगी खत्म करनी है, जहां से वो अपने सपने पूरे करने का ख्वाब लेकर रोज घर से आती थी।
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परिजनों की याद ने मजबूर किया
तीसरी मंजिल की रेलिंग पर कुछ देर खड़े रहने के बाद उसने कूदने की कोशिश की। लेकिन पैर कांपने पर उसने कदम खींच लिए। शायद परिवार की याद ने उसको ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। कुछ देर तक उसने खुद को रोके रखा। लेकिन फिर कूदने की कोशिश की। ऊंचाई का डर। मैं सही कर रही हूं या गलत। मेरे बाद घर वालों का क्या हाल होगा। सब क्या सोचेंगे। शायद ये सवाल उसे रोकने पर मजबूर कर रहे थे। लेकिन आखिरकार कोमल जिंदगी के सामने हार मान गई। उसने छलांग लगाकर जान दे दी।

मौत के साथ दफन राज
कोमल के पास शिनाख्त का कोई सुबूत नहीं था। न कोई मोबाइल फोन या कागज। साफ था कि उसने ऐसा जानबूझकर किया। सुसाइड नोट मौके से बरामद नहीं हुआ। घर वाले बेटी की मौत के गम में हैं। ऐसे में कोमल ही जानती थी कि वो ये कदम क्यों उठा रही है। अगर पढ़ाई इसके पीछे कारण था तो शिक्षकों का कहना है कि 11वीं का रिजल्ट उसका ठीक था। फिर ऐसा क्यों किया। क्या पढ़ाई में उस पर कोई दबाव था। शिक्षकों के मुताबिक तो नहीं। अगर कोई ओर वजह थी तो उसे परिवार वालों को बताना चाहिए था। लेकिन कोमल ने इस तरह का फैसला लेकर पूरे परिवाद को जिंदगी भर का गम दे दिया।

घर में बेटी की मौत का पता चलते ही मां हो गईं बेहोश

Those 21 minutes of confrontation before death, seven times changed, suicide decision
बेटी तुझे इतने लाड़ से पाला था, कभी कुछ नहीं कहा। लेकिन तूने यह क्या कर दिया। मुझे नहीं पता था कि यह दिन भी देखने को मिलेगा। अपनी मम्मी और भाइयों को छोड़कर चली गई और पता नहीं लोग क्या कहेंगे। जब भी कॉलेज से आती थी तो यही कहती थी कि पापा मुझे डॉक्टर बनना है। लेकिन अब तो सब कुछ ही चला गया। बेटी का शव देखकर पिता बिलखते रहे। डेयरी संचालक श्रीपाल ने जब मेडिकल कॉलेज स्थित मोर्चरी पर बेटी कोमल का शव खून से लथपथ हालत में देखा तो वह शव से लिपटकर रोने लगे।

यह देखकर कोमल का बड़ा भाई हरीश भी पापा से लिपटकर रोने लगा। अन्य परिजनों का भी बुरा हाल था। वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अन्य लोगों ने कोमल के पिता और भाइयों को सांत्वना दी। शिनाख्त होने के बाद परिवार और आसपास के लोग भी मोर्चरी पर पहुंच गये। परिवार की एक महिला भी बिलखने लगी। महिला ने कहा कि मुझे भी कोमल को देखने दो, लेकिन अन्य लोगों ने महिला को समझाते हुए कहा कि अब रात है। कोमल घर आएगी तो देख लेना।

अकेली बहन थी... चली गई
बड़ा भाई हरीश और छोटा भाई राजा पाल भी बहन की मौत के बांद आंसू नहीं रोक पा रहे थे। भाइयों ने बिलखते हुए कहा कि अकेली बहन थी। वह भी चली गई। भाई ने बताया कि कोमल ने हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी से पास हुई थी उसके बाद ही वह कहती थी कि मुझे आगे चलकर बहुत कुछ बनना है। पिता ने कहा कि दोपहर करीब सवा दो बजे परिवार के सब लोग कमरे में सोने चले गये। उस समय कोमल दूसरे कमरे में थी। अचानक वह घर से निकल गई। परिजनों ने शाम को सोचा था कि हो सकता है कि किसी सहेली के घर चली गई हो, आ जाएगी।

ऐसे हुई शिनाख्त, मां बेहोश
पुलिस ने थर्डआई और अन्य कोचिंग सेंटर के संचालकों से जानकारी ली। जिसके बाद कोचिंग सेंटर के संचालक ने कहा कि हां, छात्रा पढ़ने आती थी। जिसके बाद सीओ श्रीराम अर्ज ने छात्रा का नंबर लिया। जैसे ही सीओ ने छात्रा के पिता को फोन कर पूछा कि आपकी बेटी कहां है तो परिजनों के होश उड़ गये। परिजनों ने कहा कि दोपहर से नहीं है। उसके बाद पुलिस छात्रा के घर जयदेवीनगर में मकान नंबर 314/1 में पहुंची। छात्रा के परिवार में पिता श्रीपाल, मां गीता, बड़ा भाई हरीश और छोटा भाई राजा पाल हैं। बेटी की मौत की सूचना पर मां गीता भी बेहोश हो गईं।

मोबाइल नहीं रखती थी साथ
सिविल लाइन थाने में सीओ और इंस्पेक्टर ने छात्रा के पिता और भाई से छात्रा का मोबाइल नंबर पूछा तो परिजन चुप रहे। बाद में परिजनों ने कहा कि वह मोबाइल नहीं रखती थी। इस पर सीओ भी चुप रहे।

रात में पढ़ती थी पांच से छह घंटे
छात्रा के बड़े भाई ने बताया कि दिन में वह कॉलेज के अलावा कोचिंग सेंटर जाती थी। वहीं शाम को घर पर सात बजे ही पढ़ने बैठ जाती थी। रात में पांच या छह बजे तक पढ़ाई करती थी।
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