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...ऐसे मुकदमे दर्ज होंगे, तो भविष्य में कोई किसी की मदद नहीं करेगा

Tue, 21 Feb 2017 06:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Tue, 21 Feb 2017 06:32 PM IST
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this way nobody will help anyone
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

महिला के फर्जी अपहरण और गैंगरेप का षड्यंत्र रचने के मामले में महिला के पति के साथ सारथी संस्था की अध्यक्षा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का मामला तूल पकड़ता नजर जा रहा है। सारथी संस्था ने इसे पुलिस की दमनकारी नीति बताया है। संस्था ने कहा है कि यदि इस तरह सामाजिक संगठनों पर मुकदमे दर्ज होंगे, तो भविष्य में कोई किसी की मदद नहीं करेगा।

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सारथी संस्था के सचिव अशोक शर्मा ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में दावा करते हुए कहा है कि संस्था की अध्यक्ष कल्पना पांडे ने महिला पर बयान बदलने का कोई दबाव नहीं बनाया। घटना वाले दिन उन्हें सूचना मिली थी कि एक महिला जिला अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में पड़ी हुई है। उसकी कोई मदद नहीं कर रहा। इसी सूचना पर संस्था की टीम वहां गई। उन्होंने ही महिला का अस्पताल में इलाज कराया। सामाजिक संस्था की अध्यक्ष होने के नाते पीड़िता की मदद करना उनका कर्तव्य भी था।
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संस्था सचिव का कहना है कि संस्था ने पीड़िता को केवल न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी। लेकिन पुलिस ने उनकी मदद करने पर अध्यक्ष को ही मुकदमे में आरोपी बना दिया। पुलिस का यह कृत्य सामाजिक संस्थाओं का दमन करने के समान है। ऐसे में तो कोई भविष्य में किसी की मदद ही नहीं करेगा। सामाजिक संगठनों में इसे लेकर आक्रोश है। उधर, इंस्पेक्टर लालकुर्ती धीरज शुक्ला का कहना है कि सारथी संस्था की अध्यक्ष के खिलाफ षड्यंत्र रचने का मामला बनाया गया है। महिला के आरोपी पति और सारथी संस्था की अध्यक्ष ने सरकार से आर्थिक मदद हड़पने के लिए ही ये सब किया।
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संस्था का दावा, कई केसों के खुलासे में की पुलिस की मदद
सारथी संस्था ने पुलिस कार्रवाई पर बड़े सवाल उठाए हैं। कहा है कि जिस संस्था ने पूर्व में कई संगीन मुकदमों के खुलासे में पुलिस की मदद की, उसी संस्था की अध्यक्ष को षड्यंत्र रचने में आरोपी बना डाला। संस्था के सचिव अशोक शर्मा ने दावा किया कि पिछले साल शहर की एक रेप पीड़ित छात्रा के मां बनने पर सारथी संस्था ही मदद के लिए सामने आई थी। संस्था ने तत्कालीन डीएम से मिलकर परिवार को सरकारी आर्थिक मदद दिलाई। वहीं, कंकरखेड़ा क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को नशीले पदार्थ बेचने का मामला संस्था के प्रयासों से ही खुला। तत्कालीन डीआईजी ने उस पर कार्रवाई कराई थी। दायमपुर गांव में युवाओं को नशे की लत लगाने के मामले का खुलासा भी संस्था ने किया था। जिसके बाद गांव की महिलाओं ने घरों में बिक रही शराब नष्ट की थी।  फरवरी 2016 में ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से घरों में काम करने को मजबूर आठ साल की बच्ची को मुक्त कराया। बीते दिसंबर परीक्षितगढ़ क्षेत्र में गैंगरेप की वारदात की शिकार पीड़िता की आवाज उठाई। अक्तूबर 2016 में परतापुर के एक गेस्ट हाउस से 20 युवक-युवतियां पुलिस ने पकड़ी थीं। तब भी पुलिस ने संस्था की अध्यक्ष को मदद के लिए बुलाया था।

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