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मन में भावनाओं का जागरण होने पर शब्दों की आवश्यकता नहीं : विमर्श सागर
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 26वें दिन 91 परिवारों ने किया पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति और समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 26वें दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। कार्यक्रम की शुरुआत विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ की।
शांति धारा अमित जैन ने की, जबकि दीप प्रज्ज्वलन उमा जैन, पावन जैन और गीता जैन ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने विश्व के सभी जीवों के कल्याण की मंगल भावना के साथ शांति धारा का उच्चारण कराया। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजन तथा आदिनाथ भगवान की पूजा संपन्न हुई। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य अर्पित करने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। विधान के दौरान धर्मप्रेमियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। इस अवसर पर 91 परिवारों ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।
भक्तामर पाठ का शुभारंभ कुसुम जैन और कपिल जैन ने किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी पाठ में भाग लिया। विधान के दौरान सुनील जैन ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
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इस मौके पर मुनि 108 विमर्श सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जब मन में भावनाओं का जागरण हो जाता है, तब शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती। स्वाभाविक चरित्र ही मन को पवित्र बनाता है और अशुभ कार्यों को छोड़कर शुभ कार्य करना ही सच्ची साधना है।
कार्यक्रम के अंत में गुरुकुल के बच्चों ने विधान का विसर्जन कराया। पंच परमेष्ठी, आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थंकरों की आरती संपन्न हुई। जिसके बाद स्वर्ण कलश से तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन को सम्मानित किया गया। प्रश्न मंच के विजेताओं को कुसुमलता जैन की ओर से पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक लोगों का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति और समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 26वें दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। कार्यक्रम की शुरुआत विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ की।
शांति धारा अमित जैन ने की, जबकि दीप प्रज्ज्वलन उमा जैन, पावन जैन और गीता जैन ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने विश्व के सभी जीवों के कल्याण की मंगल भावना के साथ शांति धारा का उच्चारण कराया। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजन तथा आदिनाथ भगवान की पूजा संपन्न हुई। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य अर्पित करने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। विधान के दौरान धर्मप्रेमियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। इस अवसर पर 91 परिवारों ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।
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भक्तामर पाठ का शुभारंभ कुसुम जैन और कपिल जैन ने किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी पाठ में भाग लिया। विधान के दौरान सुनील जैन ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
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इस मौके पर मुनि 108 विमर्श सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जब मन में भावनाओं का जागरण हो जाता है, तब शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती। स्वाभाविक चरित्र ही मन को पवित्र बनाता है और अशुभ कार्यों को छोड़कर शुभ कार्य करना ही सच्ची साधना है।
कार्यक्रम के अंत में गुरुकुल के बच्चों ने विधान का विसर्जन कराया। पंच परमेष्ठी, आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थंकरों की आरती संपन्न हुई। जिसके बाद स्वर्ण कलश से तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन को सम्मानित किया गया। प्रश्न मंच के विजेताओं को कुसुमलता जैन की ओर से पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक लोगों का सहयोग रहा।