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शहर में भी हैं सौ साल से ज्यादा पुराने भवन
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शहर में भी हैं सौ साल से ज्यादा पुराने भवन
मेरठ। मुरादनगर घटना के बाद मुख्यमंत्री के सख्त रवैये ने प्रशासनिक तंत्र की आंखें खोल दी है। लेकिन यह कार्रवाई धरातल पर अंजाम दी जायेगी, इसे लेकर संदेह हैं। क्योंकि पहले भी ऐसे भी तमाम भवन चिन्हित हो चुके हैं। लेकिन आज तक भी किसी भवन को नहीं गिराया गया है।
कलक्ट्रेट परिसर में एडीएम एलए आफिस से लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक पूरा भवन, अपर जिलाधिकारी प्रशासन कार्यालय के पास स्थित एसीएम कार्यालय और जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय जीर्णशीर्ण हालत में है। इसमें चकबंदी आफिस की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है।
शहर के भीतर हालात और भी ज्यादा खराब
मेरठ भूकंप के मामले में खतरनाक जोन में है। जिसे लेकर यह सर्वे हुआ था। इसमें तमाम भवन चिन्हित हुए थे और नोटिस भी जारी हुए थे। लेकिन नोटिस से आगे की कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। वर्तमान में यदि उदाहरण के तौर पर देखें तो हापुड़ अड्डा चौराहा के पास स्थित जब्बार बिल्डिंग पूरी तरह जीर्णशीर्ण अवस्था में है। इस बिल्डिंग में करीब 85 परिवार हैं जिसमें दो सौ से ज्यादा लोग रहते हैं। लेकिन कभी भी प्रशासन ने इस भवन की तरफ नहीं देखा। ऐसे ही पुराने शहर के भीतर भी तंग गलियों, गांधी आश्रम, सदर गंज बाजार में भी जर्जर भवन आज भी खड़े हुए हैं।
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125 सरकारी स्कूलों के भवनों पर चलेगा हथोड़ा
बेसिक शिक्षा विभाग भी अब अपने जर्जर स्कूलों के भवनों पर हथोड़ा चलाने की तैयारी में है। इस संबंध में बीएसए ने नगर व देहात क्षेत्र के सभी ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर ली है जिनके ध्वस्तीकरण की जल्द ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। लोक निर्माण विभाग की जांच रिपोर्ट को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
नगर क्षेत्र के जहां 40 से अधिक स्कूल किराए पर चल रहे हैं। तो कुछ ऐसे स्कूल हैं जो जिनके भवन कई दशक पुराने हैं, और जर्जर हालत में हैं। देहात में मवाना, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ और अन्य ब्लॉकों के स्कूल शामिल हैं।
बीएसए सत्येंद्र सिंह ढाका ने बताया कि ध्वस्तीकरण के लिए 185 स्कूलों के भवनों को चिन्हित किया गया है। 87 स्कूलों की रिपोर्ट कमेटी द्वारा दी गई है। अन्य को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पीडब्ल्यूडी भी इन स्कूलों के भवनों को लेकर मूल्यांकन कर चुका है। जल्द ही ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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मेरठ। मुरादनगर घटना के बाद मुख्यमंत्री के सख्त रवैये ने प्रशासनिक तंत्र की आंखें खोल दी है। लेकिन यह कार्रवाई धरातल पर अंजाम दी जायेगी, इसे लेकर संदेह हैं। क्योंकि पहले भी ऐसे भी तमाम भवन चिन्हित हो चुके हैं। लेकिन आज तक भी किसी भवन को नहीं गिराया गया है।
कलक्ट्रेट परिसर में एडीएम एलए आफिस से लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक पूरा भवन, अपर जिलाधिकारी प्रशासन कार्यालय के पास स्थित एसीएम कार्यालय और जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय जीर्णशीर्ण हालत में है। इसमें चकबंदी आफिस की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है।
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शहर के भीतर हालात और भी ज्यादा खराब
मेरठ भूकंप के मामले में खतरनाक जोन में है। जिसे लेकर यह सर्वे हुआ था। इसमें तमाम भवन चिन्हित हुए थे और नोटिस भी जारी हुए थे। लेकिन नोटिस से आगे की कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। वर्तमान में यदि उदाहरण के तौर पर देखें तो हापुड़ अड्डा चौराहा के पास स्थित जब्बार बिल्डिंग पूरी तरह जीर्णशीर्ण अवस्था में है। इस बिल्डिंग में करीब 85 परिवार हैं जिसमें दो सौ से ज्यादा लोग रहते हैं। लेकिन कभी भी प्रशासन ने इस भवन की तरफ नहीं देखा। ऐसे ही पुराने शहर के भीतर भी तंग गलियों, गांधी आश्रम, सदर गंज बाजार में भी जर्जर भवन आज भी खड़े हुए हैं।
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125 सरकारी स्कूलों के भवनों पर चलेगा हथोड़ा
बेसिक शिक्षा विभाग भी अब अपने जर्जर स्कूलों के भवनों पर हथोड़ा चलाने की तैयारी में है। इस संबंध में बीएसए ने नगर व देहात क्षेत्र के सभी ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर ली है जिनके ध्वस्तीकरण की जल्द ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। लोक निर्माण विभाग की जांच रिपोर्ट को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
नगर क्षेत्र के जहां 40 से अधिक स्कूल किराए पर चल रहे हैं। तो कुछ ऐसे स्कूल हैं जो जिनके भवन कई दशक पुराने हैं, और जर्जर हालत में हैं। देहात में मवाना, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ और अन्य ब्लॉकों के स्कूल शामिल हैं।
बीएसए सत्येंद्र सिंह ढाका ने बताया कि ध्वस्तीकरण के लिए 185 स्कूलों के भवनों को चिन्हित किया गया है। 87 स्कूलों की रिपोर्ट कमेटी द्वारा दी गई है। अन्य को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पीडब्ल्यूडी भी इन स्कूलों के भवनों को लेकर मूल्यांकन कर चुका है। जल्द ही ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।