मेरठ: कर्ज में डूबे व्यापारी ने परिवार संग उठाया खौफनाक कदम, महिला की मौत, हर कोई हैरान
- मेरठ में एक व्यापारी ने परिवार के साथ उठाया खौफनाक कदम
- व्यापारी की पत्नी की उपचार के दौरान मौत
- पिता-पुत्र का अस्पताल में चल रहा इलाज
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक व्यापारी ने खौफनाक कदम उठाया। मेडिकल थाना क्षेत्र की अंसल कॉलोनी में कर्ज में डूबे टेंट कारोबारी संदीप आनंद (56 वर्ष), उनकी पत्नी रश्मि (52 वर्ष) और बेटे ऋषभ (26 वर्ष) ने जहरीला पदार्थ खा लिया। रश्मि की उपचार के दौरान मौत हो गई। पिता और पुत्र की हालत गंभीर बनी है।
तीन साल पहले टेंट कारोबारी संदीप आनंद के गोदाम में आग लग गई थी, जिसमें उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इसके बाद से उनका कारोबार घाटे से उबर नहीं पाया। पिछले साल कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन का भी असर पड़ा। परिवार काफी कर्ज में था। सीओ सिविल लाइन देवेश सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में कारोबार में नुकसान और अधिक कर्ज होने की स्थिति सामने आई है। परिवार काफी समय से परेशान था। इसके चलते ही संदीप, उनकी पत्नी रश्मि और बेटे ऋषभ ने जहरीला पदार्थ खा लिया। तीनों को गढ़ रोड पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां बुधवार सुबह रश्मि ने दम तोड़ दिया। संदीप की एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है।
टेंट कारोबारी ने तीन दिन पहले ही खरीद लिया था सल्फास
टेंट कारोबारी संदीप तीन दिन पहले ही सल्फास खरीद चुके थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि परिवार के लोग मौत को चुनने का प्लान बना रहे थे। दो रात से दंपती और उसका बेटा ठीक से सोए भी नहीं थे। वह बार-बार कर्ज का हिसाब लगाते थे और फिर मौत को गले लगाने की बात करते थे। तीनों की सहमति के बाद ही एक साथ तीनों ने जहरीला पदार्थ खाया।
पुलिस के मुताबिक, संदीप का परिवार कई साल से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। पहले गोदाम में भीषण आग और फिर कोरोना संक्रमण से लॉकडाउन के हालात ने कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इस तनाव से परिवार उबर नहीं पाया और यह घटना हो गई। संदीप आनंद का पीवीएस मॉल के चाणक्यपुरी में आनंद टेंट के नाम से कारोबार था।
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बताया गया कि तीन साल पहले जब गोदाम में आग से लाखों का नुकसान हो गया, तभी बेटी की शादी भी होनी थी। खुद को कर्ज से उबारने के लिए बिजली बंबा बाईपास पर एक फार्म हाउस किराए पर लिया। उम्मीद थी कि हालात सुधर जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी बीच, मार्च 2020 में कोरोना की दस्तक ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विवाह आयोजनों पर रोक के कारण कारोबार सिमटता गया, कर्ज बढ़ता गया। कर्ज देने वाले लोगों के दबाव के कारण संदीप सहित पूरा परिवार तनाव में था।
‘जीने का कोई मकसद ही नहीं बचा था’
मेडिकल थाना पुलिस ने अस्पताल में भर्ती संदीप और उसके बेटे के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक, संदीप ने बताया कि अब जीने का कोई मकसद नहीं बचा था। इसके चलते तीनों ने सल्फास खाकर जान देने का फैसला लिया था। मौत के अलावा दूसरा कोई रास्ता उनके पास नहीं था।
पत्नी और बेटे के बारे में पूछते रहे संदीप
पुलिस ने बताया कि पत्नी रश्मि की मौत के बारे में संदीप को नहीं बताया गया था। हालांकि संदीप बार-बार अपनी पत्नी और बेटे के बारे में पूछते रहे। कारोबारी के जानकार कुछ और लोग भी पहुंचे। पड़ोस के लोग भी इस घटना से हैरत में रहे।
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