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मोह का जाल ही दुख का कारण : भाव भूषण
Sat, 14 Feb 2026 07:06 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 14 Feb 2026 07:06 PM IST
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कैलाश पर्वत पर चल रहे भक्तांबर विधानपाठ में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में भक्तामर विधान एवं पाठ का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के सातवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारम्भ किया। भाव भूषण महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि मानव जीवन में दुखों का मूल कारण मोह और आसक्ति है। मनुष्य धर्म के पास तो जाता है, लेकिन उसका मन संसार के बंधनों से मुक्त नहीं हो पाता।
विधान के दौरान स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य हर्ष कुमार जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधरा अर्पित जैन, महेन्द्र जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन वैशाली जैन, आनंदिता जैन और शालिनी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधरा का उच्चारण किया।
मुनिराज भाव भूषण महाराज ने कहा कि व्यक्ति धर्मस्थल पर उसी मछली के समान आता है, जो ऑक्सीजन लेने के लिए कुछ पल पानी से बाहर उछलती है और फिर वापस उसी पानी में चली जाती है। इसी प्रकार हम राग-द्वेष, क्रोध, लोभ और व्यसनों रूपी संसार में डूबे रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने भीतर के विकारों का त्याग नहीं करेगा, तब तक सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति संभव नहीं है।
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गुरुवर ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे मोह और आसक्ति से ऊपर उठकर संयम, सदाचार और आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाएं, तभी जीवन सार्थक बन सकेगा। आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों का भक्तामर विधान का हुआ। 48 अघ्र्य चढ़ाए गए। शनिवार को 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
आज के विधान का विसर्जन गीता जैन, राजेन्द्र जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राखी जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन चंचल जैन, तमन्ना पलक पारस जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रेखा जैन और गुरुकुल के बच्चों ने किया। कार्यक्रम में जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र जैन, सुशील जैन, राकेश जैन, रोहित जैन, मुकेश जैन का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के सातवें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारम्भ किया। भाव भूषण महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि मानव जीवन में दुखों का मूल कारण मोह और आसक्ति है। मनुष्य धर्म के पास तो जाता है, लेकिन उसका मन संसार के बंधनों से मुक्त नहीं हो पाता।
विधान के दौरान स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य हर्ष कुमार जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधरा अर्पित जैन, महेन्द्र जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन वैशाली जैन, आनंदिता जैन और शालिनी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधरा का उच्चारण किया।
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मुनिराज भाव भूषण महाराज ने कहा कि व्यक्ति धर्मस्थल पर उसी मछली के समान आता है, जो ऑक्सीजन लेने के लिए कुछ पल पानी से बाहर उछलती है और फिर वापस उसी पानी में चली जाती है। इसी प्रकार हम राग-द्वेष, क्रोध, लोभ और व्यसनों रूपी संसार में डूबे रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने भीतर के विकारों का त्याग नहीं करेगा, तब तक सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति संभव नहीं है।
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गुरुवर ने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे मोह और आसक्ति से ऊपर उठकर संयम, सदाचार और आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाएं, तभी जीवन सार्थक बन सकेगा। आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों का भक्तामर विधान का हुआ। 48 अघ्र्य चढ़ाए गए। शनिवार को 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
आज के विधान का विसर्जन गीता जैन, राजेन्द्र जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राखी जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन चंचल जैन, तमन्ना पलक पारस जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रेखा जैन और गुरुकुल के बच्चों ने किया। कार्यक्रम में जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र जैन, सुशील जैन, राकेश जैन, रोहित जैन, मुकेश जैन का सहयोग रहा।