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30 साल से जिस ट्रेन को देखते थे, उसी ने ले ली पूरे परिवार की जान

Mon, 21 Aug 2017 09:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ, मनु चौधरी
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ, मनु चौधरी Updated Mon, 21 Aug 2017 09:50 PM IST
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The train which was flagged off, died in the train itself, family three deaths
बड़ा ट्रेन हादसा

दो दशक से ज्यादा समय से मुरैना फाटक पर कलिंग उत्कल समेत कई ट्रेनों को झंडी दिखाने वाले राजाराम के लिए उत्कल एक्सप्रेस का सफर अंतिम साबित हुआ। इस भीषण हादसे में राजाराम, उनकी पत्नी और बेटी की मौत हुई है। रविवार को उनके दामाद का मोर्चरी पर रो रोकर बुरा हाल था।

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मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के दुर्गा कालोनी निवासी राजाराम (55) रेलवे में गेटकीपर थे। उनकी ड्यूटी मुरैना फाटक पर ट्रेनों को झंडी दिखाकर पास कराने की थी। करीब एक साल पहले ही राजाराम ने वीआरएस ले लिया था। सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में स्नान करने का सपना था, तो वह पत्नी सुखदेवी (50) और बेटी आरती (12) के साथ कलिंग उत्कल एक्सप्रेस से हरिद्वार जा रहे थे। शनिवार शाम खतौली में उत्कल के दुर्घटनाग्रस्त होने पर यह दंपति और बेटी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 
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सुखदेवी और आरती की शनिवार रात ही मुजफ्फरनगर अस्पताल में मौत हो गई थी जबकि मेडिकल अस्पताल मेरठ में भर्ती कराए गए राजाराम ने रविवार तड़के अंतिम सांस ली। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजित चौधरी की सूचना पर पहुंची मेडिकल थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। रात करीब आठ बजे पुलिस ने राजाराम का शव उनके दामाद राजू व अन्य रिश्तेदारों की सुपुर्दगी में देकर एंबुलेंस से मुरैना के लिए भेज दिया।

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‘अभी तो उम्र भी बची है’

The train which was flagged off, died in the train itself, family three deaths
पीड़ित परिजन

दामाद राजू ने मोर्चरी पर बिलखते हुए बताया कि राजाराम गंगा स्नान में बहुत आस्था रखते थे। बीच में डेढ़ या दो माह में वह हरिद्वार में पूर्णिमा व अमावस्या पर स्नान करने जाते रहते थे। अधिकांश वह मुरैना से कलिंग उत्कल एक्सप्रेस में ही जाते थे और उसी ट्रेन से लौटते थे। एक माह से कह रहे थे कि अभी तो उम्र भी बची है। इस बार सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में स्नान जरूर करना है। लेकिन हरिद्वार में सोमवार को अमावस्या पर स्नान करने का सपना अधूरा ही रह गया। 

पूरा परिवार बिखर गया
राजाराम के दामाद राजू ने बताया कि एक साल पहले ही तो राजाराम ने वीरआरएस लिया था। राजाराम की पांच बेटियां हैं, जिनमें चार की शादी हो चुकी है। इकलौता बेटा ब्रिजेश कुमार भी रेलवे में कर्मचारी है। परिवार के तीन सदस्यों की ट्रेन हादसे में मौत के बाद पूरा परिवार ही बिखर गया।

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