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परमात्मा ही समस्त ब्रह्मांड के संचालक : राजेश सेठी
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- आर्य समाज थापरनगर में हुआ रविवारीय सत्संग का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि वेदों के अनुसार इस सृष्टि का आधार परमपिता परमात्मा है। वही सृष्टि का निर्माणकर्ता, संचालक और संहारक है। उन्होंने कहा कि सृष्टि के निर्माण से पूर्व समस्त सूर्य, चंद्र और नक्षत्र परमात्मा के अंदर बीज रूप में स्थित थे। परमात्मा ने अपनी आकर्षण शक्ति से जीवात्माओं के कल्याण के लिए इस संसार की रचना की।
उन्होंने बताया कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व केवल परमात्मा की ही सत्ता थी। प्रकृति और जीवात्माएं सुषुप्त अवस्था में थीं। परमात्मा की प्रेरणा से ही सृष्टि का निर्माण हुआ और वही इसका एकमात्र स्वामी, संचालक एवं नियामक है। पृथ्वी और आकाश में स्थित सभी लोक लोकांतर परमात्मा की नियम व्यवस्था से संचालित हो रहे हैं। वही समस्त ब्रह्मांड का रक्षक और स्वामी है तथा हम सभी उसकी प्रजा हैं। परमात्मा ही समस्त जीवों का पालन पोषण करने वाला है। इसलिए योग साधना और प्रेमभाव से उसकी उपासना करनी चाहिए।
कार्यक्रम में गुरुकुल नवप्रभात बरगढ़ के विद्वान आचार्य बृहस्पति एवं प्रेमप्रकाश ने भी सत्संग का महत्व बताया। इसके साथ ही यज्ञ और दान कर्म को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। सत्संग में सुभाष मल्होत्रा, कमलेश चांदना एवं विमल मरवाह ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान श्रेय बत्रा एवं श्रुति बत्रा रहीं। कार्यक्रम में करुणा सागर बाली, भानु बत्रा, कृष्ण कुमार वर्मा, अशोक आनंद एवं प्रदीप सिंघल उपस्थित रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में प्रधान राजेश सेठी ने कहा कि वेदों के अनुसार इस सृष्टि का आधार परमपिता परमात्मा है। वही सृष्टि का निर्माणकर्ता, संचालक और संहारक है। उन्होंने कहा कि सृष्टि के निर्माण से पूर्व समस्त सूर्य, चंद्र और नक्षत्र परमात्मा के अंदर बीज रूप में स्थित थे। परमात्मा ने अपनी आकर्षण शक्ति से जीवात्माओं के कल्याण के लिए इस संसार की रचना की।
उन्होंने बताया कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व केवल परमात्मा की ही सत्ता थी। प्रकृति और जीवात्माएं सुषुप्त अवस्था में थीं। परमात्मा की प्रेरणा से ही सृष्टि का निर्माण हुआ और वही इसका एकमात्र स्वामी, संचालक एवं नियामक है। पृथ्वी और आकाश में स्थित सभी लोक लोकांतर परमात्मा की नियम व्यवस्था से संचालित हो रहे हैं। वही समस्त ब्रह्मांड का रक्षक और स्वामी है तथा हम सभी उसकी प्रजा हैं। परमात्मा ही समस्त जीवों का पालन पोषण करने वाला है। इसलिए योग साधना और प्रेमभाव से उसकी उपासना करनी चाहिए।
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कार्यक्रम में गुरुकुल नवप्रभात बरगढ़ के विद्वान आचार्य बृहस्पति एवं प्रेमप्रकाश ने भी सत्संग का महत्व बताया। इसके साथ ही यज्ञ और दान कर्म को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। सत्संग में सुभाष मल्होत्रा, कमलेश चांदना एवं विमल मरवाह ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान श्रेय बत्रा एवं श्रुति बत्रा रहीं। कार्यक्रम में करुणा सागर बाली, भानु बत्रा, कृष्ण कुमार वर्मा, अशोक आनंद एवं प्रदीप सिंघल उपस्थित रहे।
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