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Meerut News: सुभारती विवि परिसर को नो फ्यूल जोन घोषित किया
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- पैदल और साइकिल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट, पर्यावरण प्रदूषण और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच सुभारती विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने परिसर को ‘नो-फ्यूल जोन’ घोषित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की खपत कम करने के आवाहन से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह अभियान शुरू किया है।
इस बीच, विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित संगोष्ठी में डॉक्टरों, प्रशासनिक अधिकारियों, वरिष्ठ कर्मचारियों और विभिन्न फैकल्टियों के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा संकट, बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की अत्यधिक खपत से उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले छात्र-छात्राएं, अधिकारी, कर्मचारी और डॉक्टर परिसर के भीतर डीजल, पेट्रोल या सीएनजी से चलने वाले वाहनों का प्रयोग नहीं करेंगे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आवासीय खंडों से कार्यस्थलों की दूरी लगभग एक किलोमीटर तक होने के बावजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी पैदल चलेंगे या साइकिल का उपयोग करेंगे। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पैदल चलने में असमर्थ लोगों के लिए बैटरी चालित विशेष वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही नियमित रूप से पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुंचने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विश्वविद्यालय के वार्षिक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
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इस अवसर पर विवि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. शल्या राज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देगी बल्कि ईंधन की बचत कर देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट, पर्यावरण प्रदूषण और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच सुभारती विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने परिसर को ‘नो-फ्यूल जोन’ घोषित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की खपत कम करने के आवाहन से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह अभियान शुरू किया है।
इस बीच, विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित संगोष्ठी में डॉक्टरों, प्रशासनिक अधिकारियों, वरिष्ठ कर्मचारियों और विभिन्न फैकल्टियों के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा संकट, बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की अत्यधिक खपत से उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले छात्र-छात्राएं, अधिकारी, कर्मचारी और डॉक्टर परिसर के भीतर डीजल, पेट्रोल या सीएनजी से चलने वाले वाहनों का प्रयोग नहीं करेंगे।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आवासीय खंडों से कार्यस्थलों की दूरी लगभग एक किलोमीटर तक होने के बावजूद सभी अधिकारी और कर्मचारी पैदल चलेंगे या साइकिल का उपयोग करेंगे। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पैदल चलने में असमर्थ लोगों के लिए बैटरी चालित विशेष वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही नियमित रूप से पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुंचने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विश्वविद्यालय के वार्षिक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
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इस अवसर पर विवि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. शल्या राज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देगी बल्कि ईंधन की बचत कर देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देगी।