{"_id":"68d2ba0a090074abe3062580","slug":"the-ramcharit-performance-showcased-a-blend-of-harmony-and-devotion-with-an-emotional-view-of-dasharathas-separation-meerut-news-c-44-1-smrt1055-109795-2025-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: रामचरित मंचन में दिखा समरसता और श्रद्धा का संगम, भावुक होकर देखा दशरथ वियोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: रामचरित मंचन में दिखा समरसता और श्रद्धा का संगम, भावुक होकर देखा दशरथ वियोग
विज्ञापन
- श्रीराम तलैया मंदिर मंडल के कलाकारों ने किया वनगमन से चित्रकूट तक का सजीव चित्रण
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। श्रीराम लीला कमेटी द्वारा आयोजित श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव के अंतर्गत मंगलवार की रात्रि को श्रीराम तलैया मंदिर मंडल के कलाकारों द्वारा एक बार फिर श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों को भावनात्मक और सजीव मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया गया।
वन गमन से लेकर चित्रकूट प्रवास और दशरथ वियोग तक के दृश्य जब मंच पर प्रस्तुत हुए तो दर्शकगण भावविभोर हो उठे। हर प्रसंग में संवाद, संगीत, अभिनय और प्रकाश संयोजन की अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का आरंभ अयोध्या के जनमानस द्वारा श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन में साथ चलने की जिद से हुआ। यह दृश्य दर्शकों के मन को छू गया, जब प्रभु श्रीराम रात्रि में सभी नगरवासियों को सोता हुआ छोड़कर सुमंत के साथ गुपचुप वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
विज्ञापन
वनगमन के उपरांत भीलराज निषादराज के साथ हुई। प्रभु श्रीराम की मित्रता का दृश्य दर्शकों के लिए समरसता और समानता का संदेश लेकर आया। यह संदेश आज के समाज में भी प्रासंगिक है कि सच्चा प्रेम और भक्ति जाति, धर्म या वर्ग से ऊपर होता है। गंगा पार कराने वाले केवट के प्रसंग को विशेष भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। केवट का यह कथन कि प्रभु आपके चरणों में कमल हैं, मेरी नाव तो लकड़ी की है, कहीं यह भी तैरने न लगे पर दर्शकों से तालियों की गूंज उठी। चित्रकूट पहुंचने के बाद मंच पर दिखाया गया कि अयोध्या में राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्र श्रीराम के वियोग में प्राण त्याग देते हैं। यह दृश्य इतना मार्मिक रहा कि कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
इस दौरान सूर्यदेव त्यागी, पंकज टाली, राहुल त्यागी, संजीव शर्मा, मंगू प्रधान, प्रदीप बुद्धिराजा, अभिषेक, अनंत सैनी, ललित सैनी, गोविंद, हिमांशु आदि कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के चरित्रों में जान फूंक दी।
रामलीला कमेटी के संयोजक शरद त्यागी, मलखान सैनी, मूलचंद सैनी, मदन बंसल, नीरज गुप्ता, पुलकित, प्रदीप मित्तल, सुशील कुमार, सिद्धार्थ कंसल, संचालन विरेंद्र सैनी एडवोकेट ने किया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। श्रीराम लीला कमेटी द्वारा आयोजित श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव के अंतर्गत मंगलवार की रात्रि को श्रीराम तलैया मंदिर मंडल के कलाकारों द्वारा एक बार फिर श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों को भावनात्मक और सजीव मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया गया।
वन गमन से लेकर चित्रकूट प्रवास और दशरथ वियोग तक के दृश्य जब मंच पर प्रस्तुत हुए तो दर्शकगण भावविभोर हो उठे। हर प्रसंग में संवाद, संगीत, अभिनय और प्रकाश संयोजन की अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
विज्ञापन
कार्यक्रम का आरंभ अयोध्या के जनमानस द्वारा श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन में साथ चलने की जिद से हुआ। यह दृश्य दर्शकों के मन को छू गया, जब प्रभु श्रीराम रात्रि में सभी नगरवासियों को सोता हुआ छोड़कर सुमंत के साथ गुपचुप वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
विज्ञापन
वनगमन के उपरांत भीलराज निषादराज के साथ हुई। प्रभु श्रीराम की मित्रता का दृश्य दर्शकों के लिए समरसता और समानता का संदेश लेकर आया। यह संदेश आज के समाज में भी प्रासंगिक है कि सच्चा प्रेम और भक्ति जाति, धर्म या वर्ग से ऊपर होता है। गंगा पार कराने वाले केवट के प्रसंग को विशेष भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। केवट का यह कथन कि प्रभु आपके चरणों में कमल हैं, मेरी नाव तो लकड़ी की है, कहीं यह भी तैरने न लगे पर दर्शकों से तालियों की गूंज उठी। चित्रकूट पहुंचने के बाद मंच पर दिखाया गया कि अयोध्या में राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्र श्रीराम के वियोग में प्राण त्याग देते हैं। यह दृश्य इतना मार्मिक रहा कि कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
इस दौरान सूर्यदेव त्यागी, पंकज टाली, राहुल त्यागी, संजीव शर्मा, मंगू प्रधान, प्रदीप बुद्धिराजा, अभिषेक, अनंत सैनी, ललित सैनी, गोविंद, हिमांशु आदि कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के चरित्रों में जान फूंक दी।
रामलीला कमेटी के संयोजक शरद त्यागी, मलखान सैनी, मूलचंद सैनी, मदन बंसल, नीरज गुप्ता, पुलकित, प्रदीप मित्तल, सुशील कुमार, सिद्धार्थ कंसल, संचालन विरेंद्र सैनी एडवोकेट ने किया।