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जेल में बंदियों ने तोड़ा कोरोना का चक्रव्यूह
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मेरठ। जनपद में कोरोना के हालात चाहे जो हों परंतु जेल में बंदियों ने इसका चक्रव्यूह तोड़ने में खासी कामयाबी हासिल की है। इसके पीछे जेल प्रशासन की रणनीति ने काम किया है। एहतियात के तौर पर जेल के अंदर वे सारी व्यवस्थाएं की गईं जिससे बंदी, कर्मचारी और अधिकारी सुरक्षित रह सकें।
कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद जेल प्रशासन ने अस्थायी जेल बनाने का निर्णय किया। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार प्रशासन ने सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी जेल तैयार की। यह फार्मूला इतना कारगर साबित हुआ कि संक्रमण जेल तक पहुंच नहीं पाया। मुख्य जेल में 2360 बंदी मौजूद हैं। वहीं, सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज में बनाई अस्थायी जेल में 250 से अधिक हैं। यहां तीन माह में 39 बंदी संक्रमित मिल चुके हैं। रणनीति के तहत इन सभी बंदियों को क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। अभी तक 15 बंदी स्वस्थ होने के बाद मुख्य जेल आ चुके हैं। नियमानुसार 14 दिन क्वारंटीन सेंटर में रहने के बाद बंदी को मुख्य जेल में भेजा जाता है। यहां भी चार बैरक आरक्षित हैं। जहां एहतियात के तौर पर 14 दिन तक बंदी को रखा जाता है। यह अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बैरक में सभी के बीच भेजा जाता है।
काढ़ा बढ़ा रहा रोग प्रतिरोधक क्षमता
जेल प्रशासन ने बंदियों को स्वस्थ रखने की योजना बनाई है। यहां बंदियों को गिलोय, काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी, तुलसी और लेमन ग्रास से बना काढ़ा नियमित रूप से पिलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बंदियों को होम्योपैथिक दवा भी दी जा रही है। उन्हें नियमित रूप से योग अभ्यास भी कराया जा रहा है। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
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वर्जन
अस्थायी जेल में आने वाले बंदी का 24 घंटे में टेस्ट कराया जा रहा है। स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें अंदर भेजा जाता है। जेल के अंदर त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। जिसमें दिन में तीन बार सैनिटाइजेशन किया जाता है। बंदियों को सफाई के प्रति सजग किया जा रहा है।- डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद जेल प्रशासन ने अस्थायी जेल बनाने का निर्णय किया। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार प्रशासन ने सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी जेल तैयार की। यह फार्मूला इतना कारगर साबित हुआ कि संक्रमण जेल तक पहुंच नहीं पाया। मुख्य जेल में 2360 बंदी मौजूद हैं। वहीं, सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज में बनाई अस्थायी जेल में 250 से अधिक हैं। यहां तीन माह में 39 बंदी संक्रमित मिल चुके हैं। रणनीति के तहत इन सभी बंदियों को क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। अभी तक 15 बंदी स्वस्थ होने के बाद मुख्य जेल आ चुके हैं। नियमानुसार 14 दिन क्वारंटीन सेंटर में रहने के बाद बंदी को मुख्य जेल में भेजा जाता है। यहां भी चार बैरक आरक्षित हैं। जहां एहतियात के तौर पर 14 दिन तक बंदी को रखा जाता है। यह अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बैरक में सभी के बीच भेजा जाता है।
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काढ़ा बढ़ा रहा रोग प्रतिरोधक क्षमता
जेल प्रशासन ने बंदियों को स्वस्थ रखने की योजना बनाई है। यहां बंदियों को गिलोय, काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी, तुलसी और लेमन ग्रास से बना काढ़ा नियमित रूप से पिलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बंदियों को होम्योपैथिक दवा भी दी जा रही है। उन्हें नियमित रूप से योग अभ्यास भी कराया जा रहा है। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
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अस्थायी जेल में आने वाले बंदी का 24 घंटे में टेस्ट कराया जा रहा है। स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें अंदर भेजा जाता है। जेल के अंदर त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। जिसमें दिन में तीन बार सैनिटाइजेशन किया जाता है। बंदियों को सफाई के प्रति सजग किया जा रहा है।- डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक