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छह कांवड़ियों की मौत का मामला: जांच में बड़ा खुलासा, सामने आई विद्युत निगम की ये लापरवाही, दर्दनाक था हादसा

Wed, 19 Jul 2023 08:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 19 Jul 2023 08:58 AM IST
सार

Meerut News : ग्रामीणों का दावा है कि हादसे के बाद फोन किया गया, लेकिन वह रिसीव नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट में भी बड़ी लापरवाही सामने आई है।

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negligence of Electricity Corporation has come to fore in death of six kanwariyas of Rali Chauhan village.
विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में राली चौहान गांव के छह कांवड़ियों की मौत के मामले में विद्युत निगम की लापरवाही सामने आई है। पुलिस-प्रशासन, विद्युत निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ग्रामीणों ने दावा है कि डाक कांवड़ का फ्रेम हाईटेंशन लाइन से टरकाने के बाद लोगों ने रैसना विद्युत फीडर पर कई बार फोन किया, लेकिन सब स्टेशन ऑपरेटर (एसएसओ) ने फोन रिसीव नहीं किया था। समय पर फोन उठ जाता तो शायद कांवड़ियों की जान बच जाती। ग्रामीणों ने कुछ साक्ष्य भी पुलिस प्रशासन को सौंपे हैं।

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एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह, एसपी ट्रैफिक जितेंद्र श्रीवास्तव, विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता एके सिंह व पीडब्ल्यूडी विभाग से संजय सिंह की संयुक्त टीम का गांव में कैंप लगा था। सोमवार को इस टीम ने डाक कांवड़ में शामिल ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। ग्रामीणों ने विद्युत निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया।

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ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद फोन किया गया, लेकिन वह रिसीव नहीं हुआ। इससे पहले रविवार को पीवीवीएनएल की एमडी चैत्रा वी ने प्रेसवार्ता में बताया था कि हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई मानकों के आधार पर ठीक है।

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जांच में पता चला कि राली चौहान गांव के बाहर अम्हैड़ा और रैसना विद्युत फीडर लगता है। दोनों फीडरों की लाइन 30-30 मीटर की दूरी पर है। जिस लाइन से करंट लगा है, वह रैसना फीडर के तहत आती है। अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी कि हाईटेंशन लाइन का कनेक्शन किस फीडर से है। इसके चलते ग्रामीण अम्हैड़ा फीडर में फोन मिलाते रहे। हालांकि गांव के कई लोगों ने रैसना फीडर के एसएसओ और जेई को फोन करने की बात कही है। ग्रामीणों ने हादसे के दौरान की गई कुछ काॅल डिटेल्स भी दी हैं।

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हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई 16.7 फीट दिखाई
ग्रामीणों ने जांच टीम से हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई दोबारा नापने की मांग की। इसके बाद टीम ने लाइन नापी। इसमें मौके पर ऊंचाई 16.7 फीट मिली। इसे मानक से कम बताया गया। इस मामले पर ग्रामीणों ने काफी हंगामा किया। विद्युत निगम को हादसे का जिम्मेदार ठहराकर ग्रामीणों ने अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।

पहले भी कर चुके शिकायत
लोगों ने एसपी ट्रैफिक से कहा कि शुरू में जब हाईटेंशन लाइन गांव के बीच से निकाली जा रही थी, तभी गांव के लोगों ने विरोध किया था। आरोप है कि विद्युत अधिकारियों ने ट्रायल के लिए लाइन खींचने और बाद में उसे हटाने की बात कही थी। ग्रामीणों का कहना है कि हाईटेंशन लाइन का करंट लोहे के पोल में उतरने से कई बार पालतू पशुओं की मौत भी हो चुकी है। ऐसी घटनाओं में भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।

कुछ ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों ने विद्युत निगम पर लापरवाही का आरोप लगाकर हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई नापने की मांग रखी है। विद्युत अधिकारियों के मोबाइल की सीडीआर निकाली जाएगी। टीम अभी जांच में जुटी है। तथ्यों के आधार पर जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। - अमित कुमार सिंह, एडीएम प्रशासन

गांव के लोगों ने कई आरोप लगाए हैं। कई लोगों और विद्युत अधिकारियों के मोबाइल की सीडीआर निकाली जा रही है। हर पहलुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है, संबंधित लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। - दीपक मीणा, डीएम

पूर्व मंत्री सहित कई नेताओं ने परिवार को दी सांत्वना
पीड़ितों के घरों में पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के साथ एमएलसी अश्वनी त्यागी, लोकेश प्रजापति, राजकुमार सांगवान, शोराब ग्यास, नरेंद्र खजूरी, विक्की तनेजा, गौरव गिरी, सुभाष मलिक, सुरेश यादव, गिरीश त्यागी, रोहित गुर्जर सहित अन्य नेता पहुंचे। शाहिद मंजूर ने बताया कि गांव में हाईटेंशन लाइन के जाल से जान का खतरा बना हुआ है। इसे वह अपनी विधायक निधि से हटवाएंगे। उन्होंने कहा कि मुआवजे की रकम बढ़ाने के साथ ही मृतक आश्रितों के परिवार को सरकारी नौकरी, पक्के मकान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, भाजपा एमएलसी अश्वनी त्यागी ने कहा कि जिस पीड़ित का मकान जर्जर हालत में होगा, उसका शीघ्र ही पक्का मकान बनवाया जाएगा। परिवार का श्रम कार्ड बनवाकर भी मदद की जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष से भी उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।

पांच लोग अस्पताल में भर्ती, नौ घर पहुंचे
हादसे में गांव के हिमांशु, प्रशांत, लख्मी, मनीष, महेंद्र और लक्ष्य की मौत हो गई थी, जबकि 14 लोग झुलस गए थे। घायलों में प्रवीन, प्रिंस, योगेश, विनीत, अजय, रोहताश, अभिषेक, प्रदीप और अक्षय को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। सेंसर, विशाल, विवेक, सुमित और राहुल का अभी इलाज चल रहा है। वहीं, जिला प्रशासन के आदेश पर सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भावनपुर के चिकित्सा प्रभारी अश्वनी कुमार टीम के साथ पीड़ितों के घर पहुंचे और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की।

सपाइयों ने कलक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
राली चौहान में हुए हादसे के मामले में सपा नेताओं ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कांवड़ मेले के दौरान प्रशासन पर अधूरी तैयारियों का आरोप लगाया। कमिश्नरी चौराहे से कलक्ट्रेट तक जुलूस की शक्ल में पहुंचे सपा नेताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को देने से मना कर दिया।

जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी ने कहा कि ज्ञापन जिलाधिकारी को ही देंगे। हालांकि जिलाधिकारी के मवाना में होने के कारण बाद में उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को ही ज्ञापन दिया। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन मुस्तैद होता तो समय रहते शटडाउन लिया जा सकता था। इससे कांवड़ियों की मौत न होती। उन्होंने गांव गगसोना, टिटोड़ा, धनपुर सहित अन्य जगहों पर हुए हादसों पर भी चिंता जताई। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की।

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