दिल्ली के डॉक्टर के अपहरण में शक के घेरे में ओला कैब
प्रीत विहार इलाके में डॉक्टर श्रीकांत के अपहरण के मामले में ओला कैब की ओर से घोर लापरवाही बरते जाने की बातें सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों ने ओला से पैसा वसूलने के लिए पांच-छह माह पूर्व योजना बना ली थी। इसके लिए सुशील व अनुज ने फर्जी दस्तावेज से ओला में कैब लगाने की प्रक्रिया शुरू की। प्रक्रिया के दौरान जो भी दस्तावेज दिए गए वह किसी रामबीर नामक चालक के नाम से दिए गए। कैब की मालिक विनिता देवी नामक महिला को बताया गया। आरोपियों ने ओला का वेरिफिेशन करने वाले वेंडर को कुछ रुपये देकर जल्दी ही वेरिफिकेशन करवा लिया। इधर, अभी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी थी कि बदमाशों ने श्रीकांत को प्रीत विहार से अगवा कर लिया।
सुशील व अनुज अच्छी तरह जानते थे कि ओला के सामने साख बचाने के लिए पांच करोड़ की रकम कुछ भी नहीं है। यदि डॉक्टर श्रीकांत को कुछ हो जाता तो इससे पूरे विश्व में ओला की बड़ी बदनामी होती। इसलिए ओला के अधिकारी बदमाशों की मांगों के आगे झुक भी गए।
बदमाशों ने पांच करोड़ रुपये की मांग की थी
इसके अलावा बदमाशों ने पांच करोड़ रुपये की मांग की थी । पुलिस की एक टीम ओला अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए पांच करोड़ रुपये लेकर दौराला के पास सकोती पहुंची थी। लेकिन बदमाशों ने पांच-पांच सौ के नोट लेने से मना कर दिया था। बदमाशों के कहने पर पुलिस ने मेरठ व मुजफ्फरनगर से पांच करोड़ रुपये के नोटों को दो-दो हजार रुपये के नोटों में बदला था। लेकिन पुलिस का आभास होने पर बदमाश कार छोड़कर सकोती से फरार हो गए थे। कार में दो खाली बैग और एल्युमीनियम के मॉस्क बरामद हुए थे।
सुशील-अनुज थे ब्लैक लिस्ट, ओला सेपुलिस की छानबीन में पता चला है कि ओला कैब ने सुशील व अनुज को ब्लैक लिस्ट किया हुआ था। दरअसल दोनों भाई पहले ओला में चालक रह चुके थे। इनकी अपनी कैब हुआ करती थी। लेकिन सवारियों से दुर्व्यवहार और अन्य शिकायतों के कारण दोनों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। इसी बात से दोनों नाराज थे और बदला लेना चाहते थे।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/