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Meerut News: वेद-पुराणों में चमकते हस्तिनापुर पर छाई पर्यटन सुविधाओं के अभाव की धुंध
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पर्यटन विभाग द्वारा बनवाया गया हस्तिनापुर का मुख्य द्वार
16 करोड़ रुपये सुंदरीकरण पर खर्च के बावजूद पर्यटकों के ठहरने के लिए धर्मशाला तक नहीं
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। हस्तिनापुर की पहचान सिर्फ एक कस्बे के रूप में नहीं, बल्कि महाभारत की पौराणिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में भी है। कौरवों-पांडवों की राजधानी के दर्शनीय अवशेषों के साथ ही जैन धर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थ भी हैं। ऐसे में यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद सुविधाओं का टोटा कसक पैदा करता रहा है। सरकार भी इन संभावनाओं को बल देने के लिए हस्तिनापुर के विकास और सुंदरीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन सवाल है कि क्या सिर्फ सड़क, चौराहे, पार्क और प्रवेश द्वारों को संवार देने से हस्तिनापुर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन पाएगा।
करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराए जाने के बावजूद पर्यटकों के लिए ठहरने, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, सूचना केंद्र और ऐतिहासिक प्रतीकों की जानकारी के लिए सूचना बोर्ड लगाने जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हस्तिनापुर में सुंदरीकरण का उद्देश्य कस्बे को आकर्षक बनाना और पर्यटन को बढ़ावा देना है, लेकिन कहा जा रहा है कि पर्यटन की सफलता का पैमाना केवल शहर या कस्बे का बाहरी रूप संवारना ही नहीं होता। किसी पर्यटक के अनुभव में पहुंचने से लेकर ठहरने, खाने-पीने, घूमने, जानकारी हासिल करने और सुरक्षित लौटने तक की पूरी व्यवस्था शामिल होती है। यह उस हर पर्यटक की नजर में खलने वाली बात है जहां हस्तिनापुर की तस्वीर कमजोर दिखाई देती है। (संवाद)
सबसे बड़ी समस्या: पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था
दूरदराज से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के सामने सबसे बड़ी समस्या रात में ठहरने की है। हस्तिनापुर में पर्यटन विभाग की ओर से ऐसी धर्मशाला या पर्याप्त सरकारी गेस्ट हाउस की व्यवस्था नहीं है, जहां सामान्य पर्यटक उचित दर पर ठहर सकें। पर्यटकों को निजी होटल और धर्मशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक निजी आवासों की सीमित उपलब्धता और मनमानी दरें कई पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती हैं। ठहरने की सुविधा सीमित होने पर पर्यटन अक्सर एक दिवसीय यात्रा तक सिमट जाता है।
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बुनियादी सुविधाओं का सवाल
हस्तिनापुर में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पर्यटक सुविधाओं के स्तर पर अभी कई सवाल बाकी हैं। पर्यटकों के लिए पर्याप्त और साफ शौचालय, पीने के पानी की नियमित उपलब्धता, बैठने की जगह, कूड़ा निस्तारण, सूचना केंद्र और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक स्पष्ट मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं किसी भी पर्यटन केंद्र की आधारभूत जरूरत हैं, जिसे पूरा किए बिना हस्तिनापुर के पर्यटन को बढ़ावा मिलना दूर की कौड़ी के बराबर माना जा रहा है।
इतिहास को बताने के लिए साइनेज तक नहीं
हस्तिनापुर की सबसे बड़ी ताकत उसका इतिहास और धार्मिक महत्व है। लेकिन ऐतिहासिक स्थलों पर पर्याप्त साइनेज बोर्ड, व्याख्यात्मक पट्टिकाएं और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था न होने से पर्यटकों को इन स्थलों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। तीन महीने पहले निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने प्रमुख चौराहों पर साइनेज बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अमल नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों की मांग: पहले सुविधा, फिर सजावट
कस्बे के गोपाल शर्मा, जगदीश यादव, सतेंद्र कुमार और सुदेश कुमार समेत स्थानीय लोगों का कहना है कि सुंदरीकरण अच्छी पहल है, लेकिन प्राथमिकता पर्यटक सुविधाओं को मिलनी चाहिए। स्थानीय लोगों की यह चिंता केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है। पर्यटन का सीधा संबंध स्थानीय रोजगार और कारोबार से भी है। यदि पर्यटक कुछ घंटे रुककर लौट जाता है तो स्थानीय होटल, भोजनालय, दुकानदार, गाइड, परिवहन और अन्य छोटे कारोबारियों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।
बयान...
हस्तिनापुर के सुंदरीकरण और इसकी प्राचीन विरासत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से विभाग की ओर से परियोजना चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य हस्तिनापुर की ऐतिहासिक एवं पौराणिक पहचान को बेहतर ढंग से सामने लाना और यहां पर्यटन को बढ़ावा देना है। -दीपिका मदान, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। हस्तिनापुर की पहचान सिर्फ एक कस्बे के रूप में नहीं, बल्कि महाभारत की पौराणिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में भी है। कौरवों-पांडवों की राजधानी के दर्शनीय अवशेषों के साथ ही जैन धर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थ भी हैं। ऐसे में यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद सुविधाओं का टोटा कसक पैदा करता रहा है। सरकार भी इन संभावनाओं को बल देने के लिए हस्तिनापुर के विकास और सुंदरीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन सवाल है कि क्या सिर्फ सड़क, चौराहे, पार्क और प्रवेश द्वारों को संवार देने से हस्तिनापुर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन पाएगा।
करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराए जाने के बावजूद पर्यटकों के लिए ठहरने, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, सूचना केंद्र और ऐतिहासिक प्रतीकों की जानकारी के लिए सूचना बोर्ड लगाने जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हस्तिनापुर में सुंदरीकरण का उद्देश्य कस्बे को आकर्षक बनाना और पर्यटन को बढ़ावा देना है, लेकिन कहा जा रहा है कि पर्यटन की सफलता का पैमाना केवल शहर या कस्बे का बाहरी रूप संवारना ही नहीं होता। किसी पर्यटक के अनुभव में पहुंचने से लेकर ठहरने, खाने-पीने, घूमने, जानकारी हासिल करने और सुरक्षित लौटने तक की पूरी व्यवस्था शामिल होती है। यह उस हर पर्यटक की नजर में खलने वाली बात है जहां हस्तिनापुर की तस्वीर कमजोर दिखाई देती है। (संवाद)
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सबसे बड़ी समस्या: पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था
दूरदराज से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के सामने सबसे बड़ी समस्या रात में ठहरने की है। हस्तिनापुर में पर्यटन विभाग की ओर से ऐसी धर्मशाला या पर्याप्त सरकारी गेस्ट हाउस की व्यवस्था नहीं है, जहां सामान्य पर्यटक उचित दर पर ठहर सकें। पर्यटकों को निजी होटल और धर्मशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक निजी आवासों की सीमित उपलब्धता और मनमानी दरें कई पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती हैं। ठहरने की सुविधा सीमित होने पर पर्यटन अक्सर एक दिवसीय यात्रा तक सिमट जाता है।
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बुनियादी सुविधाओं का सवाल
हस्तिनापुर में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पर्यटक सुविधाओं के स्तर पर अभी कई सवाल बाकी हैं। पर्यटकों के लिए पर्याप्त और साफ शौचालय, पीने के पानी की नियमित उपलब्धता, बैठने की जगह, कूड़ा निस्तारण, सूचना केंद्र और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक स्पष्ट मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं किसी भी पर्यटन केंद्र की आधारभूत जरूरत हैं, जिसे पूरा किए बिना हस्तिनापुर के पर्यटन को बढ़ावा मिलना दूर की कौड़ी के बराबर माना जा रहा है।
इतिहास को बताने के लिए साइनेज तक नहीं
हस्तिनापुर की सबसे बड़ी ताकत उसका इतिहास और धार्मिक महत्व है। लेकिन ऐतिहासिक स्थलों पर पर्याप्त साइनेज बोर्ड, व्याख्यात्मक पट्टिकाएं और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था न होने से पर्यटकों को इन स्थलों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। तीन महीने पहले निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने प्रमुख चौराहों पर साइनेज बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अमल नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों की मांग: पहले सुविधा, फिर सजावट
कस्बे के गोपाल शर्मा, जगदीश यादव, सतेंद्र कुमार और सुदेश कुमार समेत स्थानीय लोगों का कहना है कि सुंदरीकरण अच्छी पहल है, लेकिन प्राथमिकता पर्यटक सुविधाओं को मिलनी चाहिए। स्थानीय लोगों की यह चिंता केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है। पर्यटन का सीधा संबंध स्थानीय रोजगार और कारोबार से भी है। यदि पर्यटक कुछ घंटे रुककर लौट जाता है तो स्थानीय होटल, भोजनालय, दुकानदार, गाइड, परिवहन और अन्य छोटे कारोबारियों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।
बयान...
हस्तिनापुर के सुंदरीकरण और इसकी प्राचीन विरासत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से विभाग की ओर से परियोजना चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य हस्तिनापुर की ऐतिहासिक एवं पौराणिक पहचान को बेहतर ढंग से सामने लाना और यहां पर्यटन को बढ़ावा देना है। -दीपिका मदान, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी

पर्यटन विभाग द्वारा बनवाया गया हस्तिनापुर का मुख्य द्वार