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Meerut News: त्याग, सेवा और बलिदान के लिए याद की जाती है गुरु परंपरा
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- गुरुओं ने मानवता की रक्षा के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव सराय खादर में स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा खारो वाला में चल रहे धार्मिक सिख समागम के तीसरे दिन संत बाबा कश्मीरा सिंह ने संगत को निहाल करते हुए सिख इतिहास और गुरुओं के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास त्याग, बलिदान और सेवा की भावना से परिपूर्ण है। जिसने हमेशा अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर समाज को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। समागम में संगत ने श्रद्धा भाव से गुरुवाणी का श्रवण किया।
संत बाबा कश्मीरा सिंह ने कहा कि सिख गुरुओं ने मानवता की रक्षा के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। हमेशा अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया और समाज को सत्य व धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। गुरुओं ने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी गुरु परंपरा पूरी दुनिया में सम्मान के साथ याद की जाती है। सिख गुरुओं ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य एक समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि गुरु साहिबानों ने हमेशा समाज को प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना से जोड़ने का कार्य किया। सिख परंपरा में सेवा का विशेष महत्व है। गुरु के लंगर के माध्यम से भी समानता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है।
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समागम के दौरान गुरुद्वारा साहिब में गुरुवाणी कीर्तन और कथा का आयोजन किया गया, जिसमें संगत ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया। गुरु का लंगर भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव सराय खादर में स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा खारो वाला में चल रहे धार्मिक सिख समागम के तीसरे दिन संत बाबा कश्मीरा सिंह ने संगत को निहाल करते हुए सिख इतिहास और गुरुओं के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास त्याग, बलिदान और सेवा की भावना से परिपूर्ण है। जिसने हमेशा अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर समाज को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। समागम में संगत ने श्रद्धा भाव से गुरुवाणी का श्रवण किया।
संत बाबा कश्मीरा सिंह ने कहा कि सिख गुरुओं ने मानवता की रक्षा के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। हमेशा अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया और समाज को सत्य व धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। गुरुओं ने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी गुरु परंपरा पूरी दुनिया में सम्मान के साथ याद की जाती है। सिख गुरुओं ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य एक समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है।
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उन्होंने बताया कि गुरु साहिबानों ने हमेशा समाज को प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना से जोड़ने का कार्य किया। सिख परंपरा में सेवा का विशेष महत्व है। गुरु के लंगर के माध्यम से भी समानता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है।
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समागम के दौरान गुरुद्वारा साहिब में गुरुवाणी कीर्तन और कथा का आयोजन किया गया, जिसमें संगत ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया। गुरु का लंगर भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।