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देश में खेलों को आगे बढ़ाना ही लक्ष्य : कर्णम मल्लेश्वरी
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देश में खेलों को आगे बढ़ाना ही लक्ष्य : कर्णम मल्लेश्वरी
मेरठ। मशहूर वेटलिफ्टर देश की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता मेरठ की बहू कर्णम मल्लेश्वरी को दिल्ली खेल विवि में कुलपति बनाने पर परिवार में जश्न का माहौल है। एफसीआई में चीफ जनरल मैनेजर कर्णम मल्लेश्वरी ने कहा कि उन्हें देश सेवा करने का मौका मिला है। खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने व देश में खेलों को आगे बढ़ाना ही उनका लक्ष्य होगा। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक डे पर कुलपति बनने पर परिवार उत्साहित है।
आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिला निवासी 46 वर्षीय मल्लेश्वरी 1997 में मेरठ की बहू बनी। परतापुर क्षेत्र के चांदसारा गांव निवासी उनके पति राजेश त्यागी भी वेटलिफ्टिंग में नेशनल व ऑल इंडिया विश्वविद्यालय चैंपियन रह चुके हैं। राजेश त्यागी ने बताया कि शादी के तीन साल बाद कर्णम मल्लेश्वरी ने महिला वर्ग ओलंपिक गेम्स में देश को पहला पदक दिलाकर कीर्तिमान स्थापित किया था। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो स्वर्ण, दो कांस्य, एशियन गेम्स में दो रजत पदक हासिल किए। उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न और पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। कर्णम मल्लेश्वरी एफसीआई में चीफ जनरल मैनेजर हैं और दिल्ली हेडक्वार्टर में ही पोस्टेड हैं। दोनों बेटे शरदचंद त्यागी व अंगत त्यागी के साथ परिवार यमुनानगर में ही रहता है। इससे पहले उत्तराखंड, हिमाचल सहित कई राज्यों में पोस्टेड रह चुकी हैं। पति राजेश त्यागी ने बताया कि मंगलवार को अप्वाइंटमेंट लेटर मिल गया था, जबकि बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व मंत्री मनीष सिसौदिया से मिले।
गांव से जोड़े रखा नाता
राजेश त्यागी ने बताया कि खेलों के साथ जुड़े रहने के अलावा गांव से नाता जोड़े रखा है। बताया वो तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परिवार के साथ अक्सर गांव में आते रहते हैं। उनकी पत्नी कर्णम मल्लेश्वरी ने एफसीआई में कार्यरत रहने के बावजूद खेलों को नहीं छोड़ा। यमुनानगर क्षेत्र के बिलासपुर रोड पर स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री की मदद से दो एकड़ में वेटलिफ्टिंग एकेडमी का निर्माण जारी है। खिलाड़ियों को वेटलिफ्टिंग के प्रति जागरूक करना ही हमारा लक्ष्य है।
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मेरठ। मशहूर वेटलिफ्टर देश की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता मेरठ की बहू कर्णम मल्लेश्वरी को दिल्ली खेल विवि में कुलपति बनाने पर परिवार में जश्न का माहौल है। एफसीआई में चीफ जनरल मैनेजर कर्णम मल्लेश्वरी ने कहा कि उन्हें देश सेवा करने का मौका मिला है। खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने व देश में खेलों को आगे बढ़ाना ही उनका लक्ष्य होगा। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक डे पर कुलपति बनने पर परिवार उत्साहित है।
आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिला निवासी 46 वर्षीय मल्लेश्वरी 1997 में मेरठ की बहू बनी। परतापुर क्षेत्र के चांदसारा गांव निवासी उनके पति राजेश त्यागी भी वेटलिफ्टिंग में नेशनल व ऑल इंडिया विश्वविद्यालय चैंपियन रह चुके हैं। राजेश त्यागी ने बताया कि शादी के तीन साल बाद कर्णम मल्लेश्वरी ने महिला वर्ग ओलंपिक गेम्स में देश को पहला पदक दिलाकर कीर्तिमान स्थापित किया था। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो स्वर्ण, दो कांस्य, एशियन गेम्स में दो रजत पदक हासिल किए। उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न और पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। कर्णम मल्लेश्वरी एफसीआई में चीफ जनरल मैनेजर हैं और दिल्ली हेडक्वार्टर में ही पोस्टेड हैं। दोनों बेटे शरदचंद त्यागी व अंगत त्यागी के साथ परिवार यमुनानगर में ही रहता है। इससे पहले उत्तराखंड, हिमाचल सहित कई राज्यों में पोस्टेड रह चुकी हैं। पति राजेश त्यागी ने बताया कि मंगलवार को अप्वाइंटमेंट लेटर मिल गया था, जबकि बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व मंत्री मनीष सिसौदिया से मिले।
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गांव से जोड़े रखा नाता
राजेश त्यागी ने बताया कि खेलों के साथ जुड़े रहने के अलावा गांव से नाता जोड़े रखा है। बताया वो तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परिवार के साथ अक्सर गांव में आते रहते हैं। उनकी पत्नी कर्णम मल्लेश्वरी ने एफसीआई में कार्यरत रहने के बावजूद खेलों को नहीं छोड़ा। यमुनानगर क्षेत्र के बिलासपुर रोड पर स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री की मदद से दो एकड़ में वेटलिफ्टिंग एकेडमी का निर्माण जारी है। खिलाड़ियों को वेटलिफ्टिंग के प्रति जागरूक करना ही हमारा लक्ष्य है।
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