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Meerut News: अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होता है लक्ष्य
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राज राजेश्वरी मंडप में शिव-पार्वती विवाह और ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने शुकदेव आगमन, व्यास नारद संवाद, सती चरित्र, शिव विवाह एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन किया।
शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए पंडित अंश वशिष्ठ ने कहा कि शिव विवाह केवल दो दिव्य स्वरूपों का मिलन नहीं बल्कि शिव और शक्ति के समन्वय का प्रतीक है। माता सती के आत्मत्याग और पुनर्जन्म के रूप में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कथा त्याग, तपस्या और अटूट भक्ति का संदेश देती है। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि माता के अपमान और पिता की उपेक्षा के बाद भी बालक ध्रुव निराश नहीं हुए। उन्होंने भगवान श्रीहरि की प्राप्ति का संकल्प लेकर कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और अटल पद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, सच्ची भक्ति और निरंतर साधना से बालक भी जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।
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कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह और ध्रुव चरित्र के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया। कथा स्थल जयकारों से गूंजता रहा। आलोक सिसोदिया ने बताया कि मंडपाचार्य आचार्य ध्रुव वशिष्ठ ने यजमान हरीश अरोरा, प्रवीण अरोरा और विनय अरोरा से व्यास पूजन संपन्न कराया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने शुकदेव आगमन, व्यास नारद संवाद, सती चरित्र, शिव विवाह एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन किया।
शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए पंडित अंश वशिष्ठ ने कहा कि शिव विवाह केवल दो दिव्य स्वरूपों का मिलन नहीं बल्कि शिव और शक्ति के समन्वय का प्रतीक है। माता सती के आत्मत्याग और पुनर्जन्म के रूप में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कथा त्याग, तपस्या और अटूट भक्ति का संदेश देती है। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
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ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि माता के अपमान और पिता की उपेक्षा के बाद भी बालक ध्रुव निराश नहीं हुए। उन्होंने भगवान श्रीहरि की प्राप्ति का संकल्प लेकर कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और अटल पद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, सच्ची भक्ति और निरंतर साधना से बालक भी जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।
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कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह और ध्रुव चरित्र के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया। कथा स्थल जयकारों से गूंजता रहा। आलोक सिसोदिया ने बताया कि मंडपाचार्य आचार्य ध्रुव वशिष्ठ ने यजमान हरीश अरोरा, प्रवीण अरोरा और विनय अरोरा से व्यास पूजन संपन्न कराया।