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Meerut News: नहीं चलेगा देरी से सूचना देने का बहाना, पूरा क्लेम देना होगा
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मेरठ। वाहन चोरी के बाद देरी से सूचना का हवाला देकर कंपनी बीमा राशि देने से इन्कार नहीं कर सकती। अगर बीमा कंपनी ऐसा करती है तो यह उपभोक्ता के प्रति उसकी सेवाओं में कमी है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्कूटी चोरी के मामले में यह टिप्पणी करते हुए उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि कंपनी को 30 हजार रुपये बीमा राशि ब्याज के साथ देनी होगी। इसके अलावा पांच हजार रुपये जुर्माने के तौर पर भी देने होंगे।
ये है मामला
सोमदत्त विहार की रहने वाली सीमा चौधरी ने मई 2015 में अपनी स्कूटी का 30 हजार रुपये का बीमा कराया था, जो अप्रैल 2016 तक लागू था। 27 अगस्त 2015 में जागृति विहार पुल के पास से स्कूटी चोरी हो गई। उसी दिन मेडिकल थाने में चोरी की शिकायत दे दी, लेकिन पुलिस ने जांच का हवाला देकर दो दिन बाद चोरी का केस दर्ज किया। पीड़िता ने उसी दिन स्कूटी चोरी की जानकारी कंपनी के बीमा एजेंट को दे दी थी। इसके बाद पीड़िता ने बीमा राशि के लिए संबंधित कंपनी में आवेदन किया। दिसंबर 2015 में कंपनी ने यह कहकर बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया कि स्कूटी चोरी की सूचना 48 घंटे के अंदर कंपनी को देनी थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने 57 दिन बाद सूचना दी। ऐसे में कंपनी बीमा राशि नहीं दे सकती।
जून 2018 में किया था आयोग में केस दायर
करीब तीन साल तक कंपनी और शिकायतकर्ता के बीच मामला चलता रहा। बीमा राशि नहीं मिलने पर जून 2018 में शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में केस दायर किया। तभी से यह मामला आयोग में चल रहा था। आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को समय पर सूचना दे दी थी। इसलिए वह बीमा राशि का हकदार है। आयोग ने आदेश दिया है कि दो माह के अंदर ब्याज समेत बीमा राशि और जुर्माना की रकम कंपनी उपभोक्ता को देगी।
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ये है मामला
सोमदत्त विहार की रहने वाली सीमा चौधरी ने मई 2015 में अपनी स्कूटी का 30 हजार रुपये का बीमा कराया था, जो अप्रैल 2016 तक लागू था। 27 अगस्त 2015 में जागृति विहार पुल के पास से स्कूटी चोरी हो गई। उसी दिन मेडिकल थाने में चोरी की शिकायत दे दी, लेकिन पुलिस ने जांच का हवाला देकर दो दिन बाद चोरी का केस दर्ज किया। पीड़िता ने उसी दिन स्कूटी चोरी की जानकारी कंपनी के बीमा एजेंट को दे दी थी। इसके बाद पीड़िता ने बीमा राशि के लिए संबंधित कंपनी में आवेदन किया। दिसंबर 2015 में कंपनी ने यह कहकर बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया कि स्कूटी चोरी की सूचना 48 घंटे के अंदर कंपनी को देनी थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने 57 दिन बाद सूचना दी। ऐसे में कंपनी बीमा राशि नहीं दे सकती।
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जून 2018 में किया था आयोग में केस दायर
करीब तीन साल तक कंपनी और शिकायतकर्ता के बीच मामला चलता रहा। बीमा राशि नहीं मिलने पर जून 2018 में शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में केस दायर किया। तभी से यह मामला आयोग में चल रहा था। आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को समय पर सूचना दे दी थी। इसलिए वह बीमा राशि का हकदार है। आयोग ने आदेश दिया है कि दो माह के अंदर ब्याज समेत बीमा राशि और जुर्माना की रकम कंपनी उपभोक्ता को देगी।
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