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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   The difficulties of the farmers have increased due to the rise in the water level of Ganga in Bijnor and Hastinapur

उफान पर नदी: गंगा में लगातार बढ़ रहा जलस्तर और टूटा पड़ा तटबंध, फिर बढ़ी किसानों की मुश्किल

Tue, 20 Jul 2021 02:41 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 20 Jul 2021 02:41 AM IST
सार

गंगा में जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर से किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। वहीं अभी तक बीते माह गंगा के टूटे तटबंध की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

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The difficulties of the farmers have increased due to the rise in the water level of Ganga in Bijnor and Hastinapur
बिजनौर में उफान पर नदी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके चलते खादर क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। वहीं अभी तक बीते माह गंगा के टूटे तटबंध की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। 

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बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि सोमवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर 55 हजार क्यूसेक था। हरिद्वार से करीब एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज चल रहा था। धीरे-धीरे यह पानी बिजनौर बैराज से छोड़ा जाएगा। जलस्तर में हो रही वृद्धि से गंगा के आसपास खेती करने वाले किसानों की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 
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खादर क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि फतेहपुर प्रेम और शेरपुर नई बस्ती के बीच गंगा का तीव्र कटान चल रहा है। अगर इसे रोकने के प्रयास नहीं हुए तो कच्चा तटबंध टूट सकता है। प्रशासनिक अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। 19 जून को पहाड़ों पर हुई बारिश के कारण क्षेत्र के फतेहपुर गांव के पास करीब दस करोड़ की लागत बना तटबंध टूट गया था। शेरपुर नई बस्ती के पास आठ करोड़ की लागत से बना रहा तटबंध भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण खादर क्षेत्र के कई गांव तक पानी पहुंच गया था।

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बिजनौर के रावली में बांध की ओर बढ़ी गंगा, ग्रामीण चिंतित
पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बारिश होने के कारण गंगा और मैदानी क्षेत्र में बहने वाली नदियों में पानी का स्तर बढ़ने लगा है। गंगा किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। वहीं बिजनौर के रावली क्षेत्र में गंगा ने बांध का कटान करना शुरू कर दिया है और आबादी की ओर बढ़ रही है। बंदे से गंगा मात्र 20 मीटर दूर ही बह रही है। 

अब से पहले गंगा रावली बांध से शुक्रताल की ओर दो किमी दूर थी, लेकिन जैसे-जैसे पेड़ों का कटान हुआ, गंगा रावली आबादी क्षेत्र में बढ़ने लगी। जिस कारण रावली सहित दर्जनभर गांव में गंगा का पानी आ जाता है, जिससे ग्रामीण बहुत परेशान होते हैं और उनको ऊंचे स्थानों पर जाकर रहना पड़ता है। अभी कुछ दिन पहले 19 जून को पहाड़ों पर बारिश होने के कारण गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर चल रहा था, जिसमें रावली व भागूवाला क्षेत्र के रहने वाले वन गुर्जर बाढ़ में फंस गए थे। पुलिस-प्रशासन ने रावली जाकर उन सभी को रेस्क्यू करके गंगा से बाहर निकाला था। बरसात के दिनों में मालन नदी का जलस्तर भी बढ़ जाता है। जलस्तर बढ़ने से रावली, ब्रह्मपुरी, बाकरपुरगढ़ी, खानजहांपुर बहादर, बड़कला, शहजादपुर, भोगपुर, चांदपुर, मंडावली, सेवारामपुर और मुजफ्फरपुर केशो सहित दर्जनभर गांव में पानी भर जाता है। 

प्रशासन ने कुछ दिन पहले आई बाढ़ के मद्देनजर बांध के किनारे चार स्टड भी बनाए हैं, लेकिन बांध का कटान लगातार जारी है। आसपास के गांव में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गंगा में सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा जमीन समा गई है। इस समय गंगा बांध से मात्र 20 मीटर की दूरी पर बह रही है और कटान करना शुरू कर दिया है।

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