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सीबीआई टीम ने 19 घंटे तक की जांच पड़ताल
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मेरठ। सूरजकुंड स्थित स्वास्थ्य भवन में केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) कार्यालय पर सीबीआई ने लगातार 19 घंटे तक जांच पड़ताल की। सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के आवास में भी छानबीन की। सीबीआई की जांच मंगलवार शाम चार बजे से बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे तक चली। जांच पूरी होने पर टीम तीनों आरोपियों को अपने साथ गाजियाबाद ले गई।
सीबीआई में शिकायत करने वाले नोएडा निवासी विशाल सलोनिया नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जैन के जैन मेडिकेयर अस्पताल समेत रोहटा रोड स्थित जेएमसी मेडिसिटी हॉस्पिटल और पेपला इदरीशपुर स्थित हाईफील्ड स्पेशलियटी हॉस्पिटल के भी संचालक हैं। विशाल ने शिकायत की थी कि सीजीएचएस के पैनल को बहाल कराने के नाम पर अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार 50 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। वह रिश्वत के रुपये किस्तों भी लेने को तैयार हैं। पहली किस्त में पांच लाख रुपये मांगे हैं। शिकायत और बातचीत की रिकॉर्डिंग मिलने के बाद सीबीआई ने जांच पड़ताल की और स्वास्थ्य भवन की रेकी की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद सीबीआई ने मंगलवार को ही विशाल सलोनिया की ओर से केस दर्ज किया।
विशाल पांच लाख रुपये लेकर मंगलवार शाम चार बजे सूरजकुंड स्थित स्वास्थ्य भवन में सीजीएचएस कार्यालय पहुंचे और डॉ. अजय कुमार के कहने पर निजी कर्मचारी रईस अहमद को रुपये दिए। रईस अहमद ने रिश्वत के रुपये ऑफिस में अंदर बैठे मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी को दिए और उन्होंने यह रुपये अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार को दिए। तभी सीबीआई की टीम ने कार्यालय पर छापा मारकर अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार, मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी और रईस अहमद को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने रिश्वत के पांच लाख रुपये बरामद कर लिए। इसके बाद सीबीआई टीम के पूरे कार्यालय में गहन जांच पड़ताल की।
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कर्मचारियों को एक साइड बैठाया, मोबाइल जब्त किए
मेरठ। सीबीआई टीम ने छापे की कार्रवाई के दौरान तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद कार्यालय में मौजूद एक चौकीदार, तीन चपरासी समेत करीब 22 कर्मचारियों को एक साइड बैठा दिया। सभी मोबाइल फोन टीम ने अपने कब्जे में ले लिए। इस कार्यालय में अफसरों समेत 27 कर्मचारी तैनात है। कुछ कर्मचारी मंगलवार को अवकाश पर थे। किसी भी कर्मचारी को अपने स्थान से उठने तक नहीं दिया। टीम ने गेट पर तालाबंदी कर दी थी, ताकि कोई बाहर न जाए। टीम ने सभी के नाम, पद और पते नोट किए। जिन कर्मचारियों की छह बजे छुट्टी होनी थी, उन्हें देर रात को जाने दिया।
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अलग-अलग कमरे में बैठाकर की पूछताछ
मेरठ। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम ने तीनों आरोपियों को कार्यालय में अलग-अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की। तीनों से टीम ने अलग-अलग गहन पूछताछ की। इसके बाद कार्यालय की तलाशी लेकर तमाम पत्रावली, कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क, दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए। पूछताछ के बाद टीम ने दोनों अफसरों के आवास की भी तलाशी ली। वहां से भी जरूरी दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए गए। डॉ अजय कुमार रुड़की रोड पर और लवेश सोलंकी का आवास गढ़ रोड स्थित मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में रह रहे हैं।
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दफ्तर में सन्नाटा पसरा
मेरठ। अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार और मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी के रिश्वत लेते हुए सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद बुधवार को सूरजकुंड स्थित स्वास्थ्य भवन में सीजीएचएस कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। यहां पर केंद्रीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के स्वास्थ्य कार्ड बनते हैं। रोजाना यहां काफी कर्मचारी कार्ड बनवाने आते हैं। छापे के कारण मंगलवार को किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं आने दिया। रोजाना की अपेक्षा कर्मचारी भी कम ऑफिस आए। टीम के जाने के बाद भी कार्यालय पर सन्नाटा पसरा रहा।
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सीबीआई में शिकायत करने वाले नोएडा निवासी विशाल सलोनिया नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जैन के जैन मेडिकेयर अस्पताल समेत रोहटा रोड स्थित जेएमसी मेडिसिटी हॉस्पिटल और पेपला इदरीशपुर स्थित हाईफील्ड स्पेशलियटी हॉस्पिटल के भी संचालक हैं। विशाल ने शिकायत की थी कि सीजीएचएस के पैनल को बहाल कराने के नाम पर अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार 50 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। वह रिश्वत के रुपये किस्तों भी लेने को तैयार हैं। पहली किस्त में पांच लाख रुपये मांगे हैं। शिकायत और बातचीत की रिकॉर्डिंग मिलने के बाद सीबीआई ने जांच पड़ताल की और स्वास्थ्य भवन की रेकी की। शिकायत की पुष्टि होने के बाद सीबीआई ने मंगलवार को ही विशाल सलोनिया की ओर से केस दर्ज किया।
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विशाल पांच लाख रुपये लेकर मंगलवार शाम चार बजे सूरजकुंड स्थित स्वास्थ्य भवन में सीजीएचएस कार्यालय पहुंचे और डॉ. अजय कुमार के कहने पर निजी कर्मचारी रईस अहमद को रुपये दिए। रईस अहमद ने रिश्वत के रुपये ऑफिस में अंदर बैठे मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी को दिए और उन्होंने यह रुपये अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार को दिए। तभी सीबीआई की टीम ने कार्यालय पर छापा मारकर अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार, मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी और रईस अहमद को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने रिश्वत के पांच लाख रुपये बरामद कर लिए। इसके बाद सीबीआई टीम के पूरे कार्यालय में गहन जांच पड़ताल की।
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कर्मचारियों को एक साइड बैठाया, मोबाइल जब्त किए
मेरठ। सीबीआई टीम ने छापे की कार्रवाई के दौरान तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद कार्यालय में मौजूद एक चौकीदार, तीन चपरासी समेत करीब 22 कर्मचारियों को एक साइड बैठा दिया। सभी मोबाइल फोन टीम ने अपने कब्जे में ले लिए। इस कार्यालय में अफसरों समेत 27 कर्मचारी तैनात है। कुछ कर्मचारी मंगलवार को अवकाश पर थे। किसी भी कर्मचारी को अपने स्थान से उठने तक नहीं दिया। टीम ने गेट पर तालाबंदी कर दी थी, ताकि कोई बाहर न जाए। टीम ने सभी के नाम, पद और पते नोट किए। जिन कर्मचारियों की छह बजे छुट्टी होनी थी, उन्हें देर रात को जाने दिया।
अलग-अलग कमरे में बैठाकर की पूछताछ
मेरठ। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम ने तीनों आरोपियों को कार्यालय में अलग-अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की। तीनों से टीम ने अलग-अलग गहन पूछताछ की। इसके बाद कार्यालय की तलाशी लेकर तमाम पत्रावली, कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क, दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए। पूछताछ के बाद टीम ने दोनों अफसरों के आवास की भी तलाशी ली। वहां से भी जरूरी दस्तावेज आदि अपने कब्जे में लिए गए। डॉ अजय कुमार रुड़की रोड पर और लवेश सोलंकी का आवास गढ़ रोड स्थित मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में रह रहे हैं।
दफ्तर में सन्नाटा पसरा
मेरठ। अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार और मुख्य निरीक्षक लवेश सोलंकी के रिश्वत लेते हुए सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद बुधवार को सूरजकुंड स्थित स्वास्थ्य भवन में सीजीएचएस कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। यहां पर केंद्रीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के स्वास्थ्य कार्ड बनते हैं। रोजाना यहां काफी कर्मचारी कार्ड बनवाने आते हैं। छापे के कारण मंगलवार को किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं आने दिया। रोजाना की अपेक्षा कर्मचारी भी कम ऑफिस आए। टीम के जाने के बाद भी कार्यालय पर सन्नाटा पसरा रहा।