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Meerut News: ‘सेंचुरी बुड्ढा’ की प्रस्तुति से मोहा दर्शकों का मन
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इकरार अहमद.....सीसीएसयू के अटल सभागार में नाटक का मंचन करते कलाकार और मौजूद दर्शक।
- फोटो : टीम
मेरठ। मेरठ रंगमंच के भीष्म पितामह स्वर्गीय शांति वर्मा की स्मृति में इप्टा के कलाकारों ने मंगलवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में हास्य नाटक ‘सेंचुरी बुड्ढा’ का शानदार मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता धम्मदीप सिंह और पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रशांत कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मनोज मित्र के लिखे और सांत्वना निगम के हिंदी अनुवाद में चर्चित हास्य नाटक भूत प्रेत, अंधविश्वास और अस्तित्वहीन चीजों से फैंटेसी पैदा करता है। दर्शकों ने भी नाटक के कई सीन पर जमकर तालियां बजाई। नाटक सेंचुरी बुड्ढा में शोषित और शोषक के बीच का संघर्ष दिखाया गया। बुजुर्ग अपनी बगिया के एक-एक पत्ते से प्यार करता है। वहीं जमींदार नौकोड़ी दत्त की नीयत बांछा की बगिया हथियाने की होती है। बगिया हथियाने में नाकामयाब नौकोड़ी मर जाता है और भूत बनकर बांछा को अक्सर परेशान करता है। बांछा का नाती गोपी और बहु अपने-अपने स्वार्थ की वजह से बांछा को जिंदा रखना चाहते हैं। नाटक में जमींदार की बांछा को मारने की तरकीबें और परिवार के लोगों की बांछा को जिंदा रखने की कोशिशाें ने दर्शकों को खूब हंसाया। आखिर में बांछा की मौत हो जाती है और उसकी करोड़ों की संपत्ति किसी के हाथ नहीं आती है। नाटक में बांछा के रोल में मोहम्मद राशिद युसूफ और नौकोड़ी दत्त के पिता छकौड़ी दत्त संयम वर्मा रहे। नाटक में इनके अलावा नौकोड़ी दत्त की पत्नी अवनि वर्मा, गोपी की पत्नी रुपाली गुप्ता, डॉ. गोविंद, संजीव मालिक आदि ने शानदार अभिनय किया। लाइट और मेकअप जितेंद्र सी राज, म्यूजिक हरीश वर्मा, मंच व्यवस्था साजिद सैफी, अयाज सैफी, समद अली और रुबीना ने की। संवाद
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मनोज मित्र के लिखे और सांत्वना निगम के हिंदी अनुवाद में चर्चित हास्य नाटक भूत प्रेत, अंधविश्वास और अस्तित्वहीन चीजों से फैंटेसी पैदा करता है। दर्शकों ने भी नाटक के कई सीन पर जमकर तालियां बजाई। नाटक सेंचुरी बुड्ढा में शोषित और शोषक के बीच का संघर्ष दिखाया गया। बुजुर्ग अपनी बगिया के एक-एक पत्ते से प्यार करता है। वहीं जमींदार नौकोड़ी दत्त की नीयत बांछा की बगिया हथियाने की होती है। बगिया हथियाने में नाकामयाब नौकोड़ी मर जाता है और भूत बनकर बांछा को अक्सर परेशान करता है। बांछा का नाती गोपी और बहु अपने-अपने स्वार्थ की वजह से बांछा को जिंदा रखना चाहते हैं। नाटक में जमींदार की बांछा को मारने की तरकीबें और परिवार के लोगों की बांछा को जिंदा रखने की कोशिशाें ने दर्शकों को खूब हंसाया। आखिर में बांछा की मौत हो जाती है और उसकी करोड़ों की संपत्ति किसी के हाथ नहीं आती है। नाटक में बांछा के रोल में मोहम्मद राशिद युसूफ और नौकोड़ी दत्त के पिता छकौड़ी दत्त संयम वर्मा रहे। नाटक में इनके अलावा नौकोड़ी दत्त की पत्नी अवनि वर्मा, गोपी की पत्नी रुपाली गुप्ता, डॉ. गोविंद, संजीव मालिक आदि ने शानदार अभिनय किया। लाइट और मेकअप जितेंद्र सी राज, म्यूजिक हरीश वर्मा, मंच व्यवस्था साजिद सैफी, अयाज सैफी, समद अली और रुबीना ने की। संवाद
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इकरार अहमद.....सीसीएसयू के अटल सभागार में नाटक का मंचन करते कलाकार और मौजूद दर्शक।- फोटो : टीम

इकरार अहमद.....सीसीएसयू के अटल सभागार में नाटक का मंचन करते कलाकार और मौजूद दर्शक।- फोटो : टीम
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