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सच्चाई देखकर भी नकार रहे सहायक नगर आयुक्त
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मेरठ। कूड़ा निस्तारण के नाम पर गड्ढे में दबा जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। अमर उजाला माई सिटी में शुक्रवार को यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद भाजपा पार्षद ललित नागदेव ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर जांच कराने की मांग की। वहीं, ग्रामीणों ने नगर आयुक्त से डंपिंग ग्राउंड हटाए जाने की मांग की।
डंपिंग ग्राउंड में गहरे गड्ढे खोदकर उनमें कूड़ा दफन करने की जानकारी पाकर सहायक नगरायुक्त ब्रजपाल एवं प्लांट हेड विशाल राजवंशी आज गांवड़ी पहुंचे। वहां उनके सामने मशीन से मिट्टी खोदकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरी जा रही थी। यह खेल देखने के बाद भी ये बोले कि गड्ढों में भरे कूडे़ को निकालकर प्लांट में पहुंचाया जा रहा है।
कूड़ा दबाया जाना था तो 70 लाख खर्च क्यों
पार्षद ललित नागदेव ने मंडलायुक्त को पत्र लिखा कि यदि कूड़ा जमीन में ही दबाया जाना था तो 70 लाख रुपये खर्च क्यों किए गए। हालांकि नगर निगम ठेकेदार को प्रतिमाह चार लाख 42 हजार रुपये का भुगतान कर रहा है। बीते 7-8 दिन से कुछ वार्डों का कूड़ा गांवड़ी भेजा जा रहा है। वहां उसे जमीन में दबाया जा रहा है। इसे स्वच्छ भारत मिशन एवं पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं है। वहीं, रीजनल सेंटर फॉर अरबन एंड एनवायरमेंट स्टडी, लखन्रऊ से प्रोजेक्ट का सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं है। इस धांधली की जांच कराई जाए। जिससे नगर निगम के धन का सदूपयोग हो सके तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। हालांकि एनजीटी ने 24 लाख रुपये की पेेनल्टी थी।
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शह पर दबाया जा रहा कूड़ा
ग्रामीणों का आरोप है गांवड़ी कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कूड़ा दबाने से भूजल दूषित हो रहा है। वहीं, गांवड़ी एवं मेदपुर के ग्राम प्रधानों ने चेतावनी दी कि नगरायुक्त को हटाए जाने की मुख्यमंत्री से मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भाजपा नेता व नगर निगम अधिकारियों की शह पर कूड़ा दबाया जा रहा है।
भूजल हो रहा दूषित
गांवड़ी स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर बेलेस्टिक मशीन द्वारा कम्पोस्ट खाद व ईंट, पत्थर, पालिथीन को अलग किया जाता था। नगर निगम की अनदेखी के कारण यहां कूड़ा जमीन में दबाया जा रहा है। जिससे गांवड़ी, मेदपुर समेत अन्य गांवों का भूजल दूषित हो रहा है।
धरे रह गए ग्रामीणों से किए वादे
पूर्व प्रधान इंद्रपाल गांवड़ी का कहना है कि नगर निगम के अधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण से पहले वादा किया था कि उक्त कूडे़ से बिजली, टायल्स व खाद तैयार की जाएगी। गांव के युवकों को रोजगार एवं ग्रामीणों को बिजली दी जाएगी। अब सच्चाई सामने आ रही है।
अफसरों एवं भाजपा नेता की मिलीभगत
मेदपुर निवासी पूर्व प्रधान महेश कुमार ने आरोप लगाया कि कूडे़ को दबाने में भाजपा नेता एवं नगर निगम अधिकारी शामिल हैं। उनकी बिना शह के कूडे़ को जमीन में नहीं दबाया सकता है।
दूषित भूजल से फैल रही बीमारियां
मेदपुर निवासी प्रधान आसिफ अली ने बताया कि भूजल दूषित होने से कैंसर, चर्म रोग, किडनी जैसी घातक बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
दूषित पानी का फसलों पर बुरा असर
मेदपुर निवासी मोहम्मद आजाद ने बताया कि दुषित ट्यूबवेलों से निकलने वाला पानी भी दूषित हो चुका है। फसल को अधिक पानी देने से उनमें बीमारियां लग जाती हैं। जिससे फसल सूखने लगती हैं।
ट्यूबवेल से हल्का लाल रंग का पानी
मेदपुर निवासी मोहम्मद नासिर ने बताया कि फसलों की सिंचाई के दौरान यदि किसान के हाथ-पैर भीग जाते हैं तो उनमें लाल रंग के दाने निकल जाते हैं। ट्यूबवेल का पानी हल्के लाल रंग का होता है।
पानी के इस्तेमाल से झड़ने लगते हैं बाल
गांव मेदपुर निवासी मोहम्मद औरंगजेब ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से बाल झड़ने लगे हैं। वहीं, खेतों की सिंचाई करने से पैरों में एलर्जी हो जाती है।
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डंपिंग ग्राउंड में गहरे गड्ढे खोदकर उनमें कूड़ा दफन करने की जानकारी पाकर सहायक नगरायुक्त ब्रजपाल एवं प्लांट हेड विशाल राजवंशी आज गांवड़ी पहुंचे। वहां उनके सामने मशीन से मिट्टी खोदकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरी जा रही थी। यह खेल देखने के बाद भी ये बोले कि गड्ढों में भरे कूडे़ को निकालकर प्लांट में पहुंचाया जा रहा है।
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कूड़ा दबाया जाना था तो 70 लाख खर्च क्यों
पार्षद ललित नागदेव ने मंडलायुक्त को पत्र लिखा कि यदि कूड़ा जमीन में ही दबाया जाना था तो 70 लाख रुपये खर्च क्यों किए गए। हालांकि नगर निगम ठेकेदार को प्रतिमाह चार लाख 42 हजार रुपये का भुगतान कर रहा है। बीते 7-8 दिन से कुछ वार्डों का कूड़ा गांवड़ी भेजा जा रहा है। वहां उसे जमीन में दबाया जा रहा है। इसे स्वच्छ भारत मिशन एवं पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं है। वहीं, रीजनल सेंटर फॉर अरबन एंड एनवायरमेंट स्टडी, लखन्रऊ से प्रोजेक्ट का सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं है। इस धांधली की जांच कराई जाए। जिससे नगर निगम के धन का सदूपयोग हो सके तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। हालांकि एनजीटी ने 24 लाख रुपये की पेेनल्टी थी।
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शह पर दबाया जा रहा कूड़ा
ग्रामीणों का आरोप है गांवड़ी कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कूड़ा दबाने से भूजल दूषित हो रहा है। वहीं, गांवड़ी एवं मेदपुर के ग्राम प्रधानों ने चेतावनी दी कि नगरायुक्त को हटाए जाने की मुख्यमंत्री से मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भाजपा नेता व नगर निगम अधिकारियों की शह पर कूड़ा दबाया जा रहा है।
भूजल हो रहा दूषित
गांवड़ी स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर बेलेस्टिक मशीन द्वारा कम्पोस्ट खाद व ईंट, पत्थर, पालिथीन को अलग किया जाता था। नगर निगम की अनदेखी के कारण यहां कूड़ा जमीन में दबाया जा रहा है। जिससे गांवड़ी, मेदपुर समेत अन्य गांवों का भूजल दूषित हो रहा है।
धरे रह गए ग्रामीणों से किए वादे
पूर्व प्रधान इंद्रपाल गांवड़ी का कहना है कि नगर निगम के अधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण से पहले वादा किया था कि उक्त कूडे़ से बिजली, टायल्स व खाद तैयार की जाएगी। गांव के युवकों को रोजगार एवं ग्रामीणों को बिजली दी जाएगी। अब सच्चाई सामने आ रही है।
अफसरों एवं भाजपा नेता की मिलीभगत
मेदपुर निवासी पूर्व प्रधान महेश कुमार ने आरोप लगाया कि कूडे़ को दबाने में भाजपा नेता एवं नगर निगम अधिकारी शामिल हैं। उनकी बिना शह के कूडे़ को जमीन में नहीं दबाया सकता है।
दूषित भूजल से फैल रही बीमारियां
मेदपुर निवासी प्रधान आसिफ अली ने बताया कि भूजल दूषित होने से कैंसर, चर्म रोग, किडनी जैसी घातक बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
दूषित पानी का फसलों पर बुरा असर
मेदपुर निवासी मोहम्मद आजाद ने बताया कि दुषित ट्यूबवेलों से निकलने वाला पानी भी दूषित हो चुका है। फसल को अधिक पानी देने से उनमें बीमारियां लग जाती हैं। जिससे फसल सूखने लगती हैं।
ट्यूबवेल से हल्का लाल रंग का पानी
मेदपुर निवासी मोहम्मद नासिर ने बताया कि फसलों की सिंचाई के दौरान यदि किसान के हाथ-पैर भीग जाते हैं तो उनमें लाल रंग के दाने निकल जाते हैं। ट्यूबवेल का पानी हल्के लाल रंग का होता है।
पानी के इस्तेमाल से झड़ने लगते हैं बाल
गांव मेदपुर निवासी मोहम्मद औरंगजेब ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से बाल झड़ने लगे हैं। वहीं, खेतों की सिंचाई करने से पैरों में एलर्जी हो जाती है।