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चुप्पी के दवाब से बढ़ रहा तनाव
Tue, 13 May 2025 12:48 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 13 May 2025 12:48 AM IST
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बिजनौर। जिले में बीते दो सप्ताह में आत्महत्या के लगभग दस मामले सामने आ चुके हैं। मनोरोग विशेषज्ञों के पास रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों ने आत्महत्या का कारण मानसिक तनाव व परेशानियों को किसी से साझा न करना बताया है। मेडिकल अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास रोज लगभग 100 मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
इनमें बड़ी संख्या में लोग भविष्य को लेकर तनाव या गृह क्लेश के चलते परेशान हैं। यही आगे जाकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। चिकित्सकों ने बताया कि मनकक्ष में कई लोगों ने बताया कि कई बार उनके दिमाग में आत्महत्या करने का विचार आया है। ऐसा सोचने वालों में एक बात सामान्य रही कि वे अपने तनाव या जीवन की परेशानी को किसी से साझा नहीं करते। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सकारात्मक सोच से ही आत्महत्या करने की घटनाओं को रोका जा सकता है।
मनकक्ष में समस्याएं बता रहे लोग : 24 वर्षीय छात्र ने बताया कि वह भविष्य में रोजगार की चिंता को लेकर परेशान है। इस समस्या को किसी के सामने साझा नहीं कर पा रहा। कभी कभी मन में आता है कि आत्महत्या कर ले। चिकित्सकों ने उसे समझाया कि आत्महत्या करना समाधान नहीं है।
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35 वर्षीय युवक ने बताया कि मजदूरी करके अपने परिवार को पालता है। घर वालों की छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है। आर्थिक दबाव परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के सामने नहीं बता पा रहा हूं। कभी कभी ये भी विचार आता है कि आत्महत्या कर ले।
तनाव जीवन का हिस्सा है : डॉ. नितिन : मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि मरीजों को देखते हुए उनकी दवाइयां व काउंसिलिंग की जा रही है। तनाव, परेशानियां सभी के जीवन का हिस्सा है। इनसे घबराकर कोई गलत विचार अपने मन में हावी न होने दें। अपनी परेशानी परिजनों या किसी भरोसेमंद इंसान से साझा करें।
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इनमें बड़ी संख्या में लोग भविष्य को लेकर तनाव या गृह क्लेश के चलते परेशान हैं। यही आगे जाकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। चिकित्सकों ने बताया कि मनकक्ष में कई लोगों ने बताया कि कई बार उनके दिमाग में आत्महत्या करने का विचार आया है। ऐसा सोचने वालों में एक बात सामान्य रही कि वे अपने तनाव या जीवन की परेशानी को किसी से साझा नहीं करते। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सकारात्मक सोच से ही आत्महत्या करने की घटनाओं को रोका जा सकता है।
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मनकक्ष में समस्याएं बता रहे लोग : 24 वर्षीय छात्र ने बताया कि वह भविष्य में रोजगार की चिंता को लेकर परेशान है। इस समस्या को किसी के सामने साझा नहीं कर पा रहा। कभी कभी मन में आता है कि आत्महत्या कर ले। चिकित्सकों ने उसे समझाया कि आत्महत्या करना समाधान नहीं है।
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35 वर्षीय युवक ने बताया कि मजदूरी करके अपने परिवार को पालता है। घर वालों की छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है। आर्थिक दबाव परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के सामने नहीं बता पा रहा हूं। कभी कभी ये भी विचार आता है कि आत्महत्या कर ले।
तनाव जीवन का हिस्सा है : डॉ. नितिन : मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि मरीजों को देखते हुए उनकी दवाइयां व काउंसिलिंग की जा रही है। तनाव, परेशानियां सभी के जीवन का हिस्सा है। इनसे घबराकर कोई गलत विचार अपने मन में हावी न होने दें। अपनी परेशानी परिजनों या किसी भरोसेमंद इंसान से साझा करें।