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स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में आवेदन का ‘गेम’
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:08 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग
- फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग की भूमिका एएनएम भर्ती घोटाले के बाद फिर से विवादों में घिर गई है। अब ताजा मामला शनिवार को विभाग द्वारा विभिन्न भर्ती के लिए जारी विज्ञापन का है। सीएमओ दफ्तर ने आवेदन के लिए मात्र छह दिन का समय दिया है, जबकि नियमानुसार कम से कम दो सप्ताह का समय होना चाहिए। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि सबकुछ पहले से ही फिक्स है, विज्ञापन जारी करना तो महज औपचारिकता है।
शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा 18 पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए 28 जुलाई की शाम पांच बजे तक पंजीकृत, स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन मांगे गए हैं। इसमें शनिवार तो ऐसी ही बीत गया है और रविवार को सरकारी छुट्टी है। इस लिहाज से अभ्यर्थी को महज चार दिन आवेदन के लिए मिल पाएंगे। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि काफी कुछ पहले से निर्धारित है।
इन पदों पर होनी है भर्ती
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित चार प्रोग्रामों में संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ है। इसमें नवजात स्टेबलाइजेशन इकाई सीएचसी मवाना, दौराला और सरधना के लिए 9 स्टाफ नर्स, नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम के लिए डॉक्टर, असिस्टेंट समेत तीन पद हैं। इसी तरह से नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवसकूलर डिसीस (एनपीसीडीसीएस) के साथ ही एनपीपीसीडी प्रोग्राम के लिए तीन पदों पर तैनाती होनी है।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कुलदीप चौहान का कहना है कि हर नियुक्ति के लिए आवेदन करने का समय सीमा निर्धारित है। अधिकांश नियुुक्ति के लिए विज्ञापन जारी होने से आवेदन करने का एक माह का समय दिया जाता है।
जबकि कुछ नियुक्तियों के लिए 30 दिन से कम का समय दिया जा सकता है। किसी भी नियुक्ति के लिए कम से कम 15 दिन का आवेदन समय दिया जाना जरूरी है। यह नियम संविदा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों पर भी लागू होता है। कुलदीप चौहान का कहना है कि यदि कोई विभाग 6 दिन का समय देता है तो सवाल उठना लाजिमी है।
भर्तियों में होती है जमकर वसूली
डेढ़ साल के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भर्तियों में धांधली का मुद्दा शासन तक गूंजा। बीते साल प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई थी। धांधली से नाराज प्रमुख सचिव ने यह तक कह दिया था कि तुम्हारी भर्ती प्रक्रिया पूरे साल चलती है और तुम जेल जाओगे। सीएमओ दफ्तर में तैनात दो सगे भाइयों के ऊपर एएनएम भर्ती में धनराशि इकट्ठा करने की मामला उजागर हो ही चुका है।
इससे साफ होता है कि विभाग में भर्ती के नाम पर वसूली होती रही है। उधर, प्रमुख सचिव ही नहीं पूर्व नेशनल हेल्थ मिशन निदेशक अमित घोष ने दवा व सामान खरीद के घोटाले पर सीएमओ की क्लास ली थी और सारे मामले की जांच वित्त एवं लेखा विभाग से कराई थी।
पंकज यादव
स्वास्थ्य विभाग में धांधली पर पूर्व जिलाधिकारी पंकज यादव ने कड़ी नजर रखी। जिसके चलते उन्होंने एएनएम भर्ती में धांधली की खबर छपते ही तत्काल एडीएम वित्त को जांच सौंपी और रिपोर्ट आते ही भर्ती पर ब्रेक लगा दिया। इसके साथ ही भर्ती में धांधली को लेकर स्वास्थ्य विभाग के पांच लोगों के खिलाफ शासन से अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी थी। स्वास्थ्य विभाग अब अपने तरीके से भर्ती को कराने की कोशिश में लगा है।
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शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा 18 पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए 28 जुलाई की शाम पांच बजे तक पंजीकृत, स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन मांगे गए हैं। इसमें शनिवार तो ऐसी ही बीत गया है और रविवार को सरकारी छुट्टी है। इस लिहाज से अभ्यर्थी को महज चार दिन आवेदन के लिए मिल पाएंगे। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि काफी कुछ पहले से निर्धारित है।
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इन पदों पर होनी है भर्ती
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित चार प्रोग्रामों में संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ है। इसमें नवजात स्टेबलाइजेशन इकाई सीएचसी मवाना, दौराला और सरधना के लिए 9 स्टाफ नर्स, नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम के लिए डॉक्टर, असिस्टेंट समेत तीन पद हैं। इसी तरह से नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवसकूलर डिसीस (एनपीसीडीसीएस) के साथ ही एनपीपीसीडी प्रोग्राम के लिए तीन पदों पर तैनाती होनी है।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कुलदीप चौहान का कहना है कि हर नियुक्ति के लिए आवेदन करने का समय सीमा निर्धारित है। अधिकांश नियुुक्ति के लिए विज्ञापन जारी होने से आवेदन करने का एक माह का समय दिया जाता है।
जबकि कुछ नियुक्तियों के लिए 30 दिन से कम का समय दिया जा सकता है। किसी भी नियुक्ति के लिए कम से कम 15 दिन का आवेदन समय दिया जाना जरूरी है। यह नियम संविदा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों पर भी लागू होता है। कुलदीप चौहान का कहना है कि यदि कोई विभाग 6 दिन का समय देता है तो सवाल उठना लाजिमी है।
भर्तियों में होती है जमकर वसूली
डेढ़ साल के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भर्तियों में धांधली का मुद्दा शासन तक गूंजा। बीते साल प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई थी। धांधली से नाराज प्रमुख सचिव ने यह तक कह दिया था कि तुम्हारी भर्ती प्रक्रिया पूरे साल चलती है और तुम जेल जाओगे। सीएमओ दफ्तर में तैनात दो सगे भाइयों के ऊपर एएनएम भर्ती में धनराशि इकट्ठा करने की मामला उजागर हो ही चुका है।
इससे साफ होता है कि विभाग में भर्ती के नाम पर वसूली होती रही है। उधर, प्रमुख सचिव ही नहीं पूर्व नेशनल हेल्थ मिशन निदेशक अमित घोष ने दवा व सामान खरीद के घोटाले पर सीएमओ की क्लास ली थी और सारे मामले की जांच वित्त एवं लेखा विभाग से कराई थी।
पंकज यादव
स्वास्थ्य विभाग में धांधली पर पूर्व जिलाधिकारी पंकज यादव ने कड़ी नजर रखी। जिसके चलते उन्होंने एएनएम भर्ती में धांधली की खबर छपते ही तत्काल एडीएम वित्त को जांच सौंपी और रिपोर्ट आते ही भर्ती पर ब्रेक लगा दिया। इसके साथ ही भर्ती में धांधली को लेकर स्वास्थ्य विभाग के पांच लोगों के खिलाफ शासन से अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी थी। स्वास्थ्य विभाग अब अपने तरीके से भर्ती को कराने की कोशिश में लगा है।