तेल के काले खेल पर आपूर्ति विभाग मेहरबान, आरटीआई में खुलासा
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आपूर्ति विभाग तेल के काले खेल पर कितना मेहरबान है, यह आरटीआई में प्राप्त आंकड़ों से स्पष्ट हो जाता है। तेल में मिलावट का खेल कितना पुराना है इससे कोई अनजान नहीं है। इसे लेकर तमाम शिकायतें भी विभाग के पास लगातार आती रही हैं।
लेकिन आपूर्ति विभाग ने जनपद के 159 पेट्रोल पंपों में से साल 2015 से 2018 के बीच मात्र 5 नमूने लिए। जिसमें दो नमूनों की आज तक जांच रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई, जबकि दो नमूने सही निकले। मात्र डीजल के एक नमूने में केरोसिन का मिश्रण मिला, जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
सच संस्था के अध्यक्ष डा. संदीप पहल एडवोकेट ने जिला आपूर्ति कार्यालय से पेट्रोल डीजल पंपों से सैंपल संबंधी जानकारी मांगी थी। जिसमें उन्होंने जनवरी 2015 से जून 2018 तक की कार्रवाई का विवरण सूचना के अधिकार में मांगा था। इस पर सूचना विभाग ने जो आंकड़ा दिया वह बहुत ही चौंकाने वाला है।
उठ रहे हैं लगातार सवाल
आपूर्ति विभाग के अनुसार 20 फरवरी 2015 को सरधना तहसील के गांव रार्धना स्थित मै. भारद्वाज फिलिंग सेंटर से पेट्रोल और डीजल के नमूने लिए थे। इसमें तीन साल बाद जांच रिपोर्ट प्राप्त हुईऱ्, जिसमें पेट्रोल तो सही पाया गया। लेकिन डीजल में केरोसिन का मिश्रण मिला। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। लेकिन दर्ज रिपोर्ट को दबा दिया गया।
इसके अलावा मै. हस्तिनापुर फिलिंग स्टेशन से 21 अप्रैल 2015 को पेट्रोल और डीजल के नमूने लिए गए। दोनों का परिणाम चार दिन बाद मिल गया। ये दोनों नमूने सही पाए गए। वहीं मैं सरगोधा ऑटो फ्यूल से 24 अप्रैल 2015 को नमूने लिए गए। लेकिन आज तक इसकी जांच रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई।
मै. राकेश सर्विस स्टेशन से 18 अप्रैल 2016 को तीन कंटेनरों के अलग-अलग नमूने लिए गए थे। सभी की जांच में हाई स्पीड डीजल पाया गया। इसके अलावा मै. राकेश सर्विस स्टेशन से ही 2 मई 2017 को नमूने लिए गए। लेकिन आज तक इसकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
आपूर्ति विभाग जो नमूने जांच के लिए भेजता है, आरटीआई के अनुसार उसकी रिपोर्ट कई-कई साल में प्राप्त होती है। इस पूरी कार्यप्रणाली पर आपूर्ति विभाग सवालों के घेरे में है। जब जांच रिपोर्ट में ही इतना समय लगेगा तो कार्रवाई कैसे होगी? यह सब आपूर्ति विभाग की लापरवाही नही बल्कि साठगांठ के कारण हो रहा है।
जनपद में 159 पेट्रोल और डीजल पंप है। जिन पर मिलावटी तेल आदि की तमाम शिकायतें विभाग के पास आती हैं। लेकिन 42 माह में मात्र 5 नमूने लेना आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली को स्पष्ट दर्शाता है। क्योंकि साल में एक-एक बार प्रत्येक पेट्रोल पंप का नमूना भी यदि विभाग लेता तो यह आंकड़ा बहुत ऊपर होता।
काले तेल के कारोबार में भी घिरा विभाग
दो केमिकल फैक्ट्रियों में नकली तेल बनाने का खुलासा होने के बाद आपूर्ति विभाग को मजबूरन नमूने लेने पड़े। लेकिन इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी विभाग अपने खेल से बाज नहीं आया। आपूर्ति विभाग ने तीनों नमूने गाजियाबाद की लैब में परीक्षण के लिए पहुंचा दिए। जबकि एसआईटी इनकी जांच अलग-अलग लैब में कराने की करती रही। अब जब दबाव पड़ा तो विभाग इसके लिए तैयार हुआ।
केरोसिन ऑयल में हो रहा है बड़ा खेल
जनपद में इस समय 4.60 लाख लीटर प्रति माह केरोसिन का कोटा है। लेकिन सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर इसका आधा भी सप्लाई नहीं हो रहा है। केरोसिन ऑयल के डीलर आपूर्ति विभाग के साथ साठगांठ कर नकली डीजल बनाने में इसकी खुलकर कालाबाजारी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासन भी इस तरफ से आंख बंद किए है।
सीबीआई जांच होनी चाहिए
इस पूरे प्रकरण पर सच संस्था के अध्यक्ष डा. संदीप पहल एडवोकेट का कहना है कि नकली तेल का कारोबार बहुत पुराना है। लेकिन आपूर्ति विभाग और पुलिस-प्रशासन की साठगांठ से तेल माफिया धड़ल्ले से इसे अंजाम दे रहे हैं। अब इस कारोबार से जुड़े असली लोगों के चेहरे सामने आने चाहिए और पूरे मामले की सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जांच में दोषी पाये जाने वालों की संपत्ति कुर्क कर सरकार में निहित की जाये और उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई तय हो।