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नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य

Sun, 08 Dec 2019 03:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 03:36 AM IST
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sugarcane price not increased, farmer on protest
मेरठ। पेराई सत्र 2019-20 में गन्ने का दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को दूसरे साल भी मायूसी हाथ लगी है। प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में दूसरे साल भी कोई बढ़ोतरी नहीं करते हुए इसे यथावत रखा है। गन्ने का दाम नहीं बढ़ने पर किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दलों में उबाल आ गया है। किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने आंदोलन का एलान कर दिया है।
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वर्ष 2017 में बनी भाजपा सरकार ने पेराई सत्र 2017-18 में गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में दस रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने न तो वर्ष 2018-19 में रेट बढ़ाया और न ही चालू पेराई सत्र 2019-20 के लिए बढ़ोतरी की। शनिवार को प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने अगेती प्रजाति के लिए 325, सामान्य प्रजाति के लिए 315 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 310 रुपये प्रति कुंतल रेट घोषित किया। रेट की घोषणा होते ही किसान संगठनों में उबाल आ गया।
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को उद्योगपतियों से चुनावी चंदा मिलता है। किसान सरकार के एजेंडे से बाहर हो गए हैं। किसान संगठित होकर हक के लिए लड़ाई लड़ेंगे। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि दो साल से गन्ने का रेट न बढ़ाकर प्रदेश सरकार ने यह दिखा दिया है वह किसान विरोधी है। खाद, बिजली, पानी, डीजल, जुताई आदि महंगी होने के बाद भी गन्ने का दाम नहीं बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है। सरकारी संस्थानों ने भी गन्ने की प्रति कुंतल लागत 297-298 रुपये आंकी है। लागत पर 50 फीसदी लाभ के हिसाब से गन्ने का रेट 450 रुपये बैठता है। सिंह ने कहा कि इसे संगठन सहन नहीं करेगा और जल्द ही आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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विपक्षी दलों का आंदोलन का एलान
गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं होने पर रालोद के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान और क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के हक छीनकर उद्योगपतियों को दे रही है। आज किसानों के बच्चों के पास रोजगार नहीं है। किसी तरह खेती से आजीविका चल रही है। लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों को बर्बाद करने में लगी है। रालोद इस पर चुप नहीं बैठेगा। किसानों को साथ लेकर सड़क से लखनऊ तक लड़ाई लड़ी जाएगी। सपा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने भी रेट नहीं बढ़ने पर गहरी नाराजगी जताई है। कहा कि गन्ना रेट नहीं बढ़ाना बताता है कि सरकार किसान विरोधी है। सपा चुप नहीं बैठेगी। रेट बढ़वाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला ने भी गन्ना रेट को लेकर आंदोलन करने की बात कही है।
कब कितना रहा गन्ना रेट
पेराई सत्र गन्ना रेट सरकार
2008-09 140-145 बसपा
2009-10 165-170 बसपा
2010-11 205-210 बसपा
2011-12 240-250 बसपा
2012-13 275-280-290 सपा
2013-14 275-280-290 सपा
2014-15 275-280-290 सपा
2015-16 275-280-290 सपा
2016-17 300-305-315 सपा
2017-18 305-315-325 बीजेपी
2018-19 305-315-325 बीजेपी
2019-20 310-315-325 बीजेपी
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