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माफिया पर पार नहीं पा सका गन्ना विभाग
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मेरठ। गन्ना विभाग प्लानिंग और एप के जरिए भले ही विभाग में पारदर्शिता लाने के दावे करता हो परंतु माफिया से पार नहीं पा सका है। पिछले साल 7186 मृत किसानों के बांड निरस्त कर सब कुछ दुरुस्त बताने वाले विभाग को इस बार सर्वे में 7996 मृत किसानों के नाम पर बांड चलते मिले। इतना ही नहीं मंडल में 707 भूमिहीनों और 997 किसानों के डबल बांड चालू मिले। हालांकि 28 फर्जी बांड मिले हैं। मंडल में सबसे ज्यादा गड़बड़ी बागपत जिले में पाई है।
गन्ना विभाग द्वारा संचालित गन्ना विकास समितियां, शुगर मिल और किसानों के बीच सेतु का काम करती हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक किसान शुगर मिल को गन्ना समितियों के माध्यम से आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को निर्धारित फीस देकर गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड (अनुबंध पत्र) जारी करती है। इसके आधार पर किसान गन्ना मिल को आपूर्ति करते हैं। गन्ना माफिया और रसूखदार किसान समिति एवं मिल कर्मियों की मिलीभगत से बांड में खेल करते हैं। मंडल के किसान हर साल मृत किसानों के बांड चलने, वास्तविक से ज्यादा रकबा दर्शाने और भूमिहीनों के बांड आदि चलने की शिकायत करते हैं। उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने गन्ना सर्वे की जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
कम रकबे में दोगुनी पर्ची
मंडल में 997 किसानों के डबल बांड मिले। इस फर्जीवाड़े में विभाग के कर्मचारी भी शामिल रहे हैं। किसान के नाम के आगे कुुमार एवं सिंह आदि लगाकर डबल बांड बनवाए हैं। इससे किसान की कम रकबे में दोगुनी पर्ची हो जाती हैं। इससे वह समय से पहले गन्ना मिल में डाल देता है। शेष पर्चियां गन्ना माफिया के काम आती हैं।
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तीन हजार से ज्यादा रकबा फर्जी
जांच में 7996 मृत किसानों के बांड चलते मिले हैं। वहीं, करीब 1800 किसानों के पास वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा मिला है। यह गड़बड़ी राजस्व विभाग से खसरा खतौनी की जांच कराने के बाद सामने आई है।
बोलते आंकड़े
जिला भूमिहीन फर्जी किसान मृत किसान डबल बांड
मेरठ 54 01 1389 87
बागपत 426 27 3220 609
गाजियाबाद 08 00 44 06
हापुड़ 135 00 1918 83
बुलंदशहर 84 00 1425 162
मंडल 707 28 7996 947
क्या बोले अधिकारी
किसानों के भू अभिलेखों की राजस्व विभाग से जांच कराई गई। इसमें वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा मिला। 7996 मृत किसानों के बांड चलते मिले। रिकार्ड को दुरुस्त करा दिया है।-राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ
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गन्ना विभाग द्वारा संचालित गन्ना विकास समितियां, शुगर मिल और किसानों के बीच सेतु का काम करती हैं। गन्ना एक्ट के मुताबिक किसान शुगर मिल को गन्ना समितियों के माध्यम से आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को निर्धारित फीस देकर गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड (अनुबंध पत्र) जारी करती है। इसके आधार पर किसान गन्ना मिल को आपूर्ति करते हैं। गन्ना माफिया और रसूखदार किसान समिति एवं मिल कर्मियों की मिलीभगत से बांड में खेल करते हैं। मंडल के किसान हर साल मृत किसानों के बांड चलने, वास्तविक से ज्यादा रकबा दर्शाने और भूमिहीनों के बांड आदि चलने की शिकायत करते हैं। उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने गन्ना सर्वे की जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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कम रकबे में दोगुनी पर्ची
मंडल में 997 किसानों के डबल बांड मिले। इस फर्जीवाड़े में विभाग के कर्मचारी भी शामिल रहे हैं। किसान के नाम के आगे कुुमार एवं सिंह आदि लगाकर डबल बांड बनवाए हैं। इससे किसान की कम रकबे में दोगुनी पर्ची हो जाती हैं। इससे वह समय से पहले गन्ना मिल में डाल देता है। शेष पर्चियां गन्ना माफिया के काम आती हैं।
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तीन हजार से ज्यादा रकबा फर्जी
जांच में 7996 मृत किसानों के बांड चलते मिले हैं। वहीं, करीब 1800 किसानों के पास वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा मिला है। यह गड़बड़ी राजस्व विभाग से खसरा खतौनी की जांच कराने के बाद सामने आई है।
बोलते आंकड़े
जिला भूमिहीन फर्जी किसान मृत किसान डबल बांड
मेरठ 54 01 1389 87
बागपत 426 27 3220 609
गाजियाबाद 08 00 44 06
हापुड़ 135 00 1918 83
बुलंदशहर 84 00 1425 162
मंडल 707 28 7996 947
क्या बोले अधिकारी
किसानों के भू अभिलेखों की राजस्व विभाग से जांच कराई गई। इसमें वास्तविक के मुकाबले तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा मिला। 7996 मृत किसानों के बांड चलते मिले। रिकार्ड को दुरुस्त करा दिया है।-राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ