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लाटरी सिस्टम से होगा गन्ना तौल लिपिकों का ताबदला
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मेरठ। गन्ना तौल लिपिकों के तबादलों में पारदर्शिता लाने के लिए इस बार लाटरी सिस्टम लागू किया गया है। यह जानकारी मेरठ मंडल के उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने दी।
उन्होंने बताया कि तौल लिपिकों का पाक्षिक (15 दिन में) तबादला किए जाने का नियम है। किसानों की तरफ से सबसे ज्यादा शिकायत घटतौली को लेकर तौल लिपिकों की होती है। कुछ तौल लिपिक एक क्षेत्र विशेष में ही तौल करते रहते हैं। किसान इन्हें हटाकर दूसरे तौल लिपिक को भेजने की मांग करते हैं, लेकिन जुगाड़बाज तौल लिपिक अंगद के पैर की तरह एक ही जगह जमे रहते हैं। इस बार इस मामले में पारदर्शिता अपनाई जा रही है। अब तौल लिपिकों के तबादलों के लिए लाटरी सिस्टम लागू किया जा रहा है। पाक्षिक तबादले को पारदर्शी बनाए जाने के लिए पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाते हुए उसे विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर निर्गत सूची को सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किया जाएगा। गत पांच सालों में जिन तौल लिपिकों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं या दंडित किया गया है ऐसे तौल लिपिकों के लाइसेंस निर्गत नहीं होंगे।
मिश्र ने बताया कि तौल लिपिकों को लाइसेंस और पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा। किसानों की समस्या के समाधान के लिए प्रत्येक शुगर मिल पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा गन्ना आयुक्त कार्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम का टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 अनिवार्य रूप से उचित स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा। घटतौली मिलने पर संबंधित चीनी मिल के साथ-साथ तौल मशीन निर्माता कंपनियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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उन्होंने बताया कि तौल लिपिकों का पाक्षिक (15 दिन में) तबादला किए जाने का नियम है। किसानों की तरफ से सबसे ज्यादा शिकायत घटतौली को लेकर तौल लिपिकों की होती है। कुछ तौल लिपिक एक क्षेत्र विशेष में ही तौल करते रहते हैं। किसान इन्हें हटाकर दूसरे तौल लिपिक को भेजने की मांग करते हैं, लेकिन जुगाड़बाज तौल लिपिक अंगद के पैर की तरह एक ही जगह जमे रहते हैं। इस बार इस मामले में पारदर्शिता अपनाई जा रही है। अब तौल लिपिकों के तबादलों के लिए लाटरी सिस्टम लागू किया जा रहा है। पाक्षिक तबादले को पारदर्शी बनाए जाने के लिए पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाते हुए उसे विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर निर्गत सूची को सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किया जाएगा। गत पांच सालों में जिन तौल लिपिकों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं या दंडित किया गया है ऐसे तौल लिपिकों के लाइसेंस निर्गत नहीं होंगे।
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मिश्र ने बताया कि तौल लिपिकों को लाइसेंस और पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा। किसानों की समस्या के समाधान के लिए प्रत्येक शुगर मिल पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा गन्ना आयुक्त कार्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम का टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 अनिवार्य रूप से उचित स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा। घटतौली मिलने पर संबंधित चीनी मिल के साथ-साथ तौल मशीन निर्माता कंपनियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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