पांवधोई नदी सहारनपुर की आत्मा, पौधे रोपकर सौंदर्य बढ़ाएं: अवधेशानंद गिरि महाराज
जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने पांवधोई नदी को सहारनपुर की आत्मा बताते हुए नदी की स्वच्छता के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने नदी के कायाकल्प के लिए इसके तटों पर छायादार विभिन्न प्रजाति के पौधे लगाने को कहा। वह जलोत्सव कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को पाइनवुड स्कूल के सभागार में हुए कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नारायण शब्द की उत्पत्ति भी जल से ही हुई है। पवित्रता के लिए भी जल का आह्वान किया जाता है। किसी नदी की सत्ता को रखने के लिए जरूरी है उसके तटों को पेड़-पौधों से हरा भरा रखा जाए। क्योंकि बिना पेड़ों के नदियों का संरक्षण नहीं किया जा सकता। कहा कि वृक्ष की सुगंध और छाया बादलों को बुलाती है। इसलिए पांवधोई के किनारे पौधे भी हम लोग लगाएं।
स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पांवधोई नदी की सफाई और सौंदर्य बनाने का यह अभियान अब रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि नदियां हमारी लाइफ लाइन हैं। योग का जिक्र करते हुए कहा कि योग हमारी सॉफ्टपावर है आज पूरा विश्व योग के अद्भुत प्रभाव को समझ रहा है। उन्होंने कहा कि पांवधोई नदी सहारनपुर की गंगा है, जिसकी सफाई के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।
महामंडलेश्वर योगी यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि नदियां विराट सृष्टि की नाड़ी हैं। यदि हमने नदियों को नहीं बचाया तो हम नहीं बचेंगे। इस लिए हमें जल और जंगल दोनों बचाने होंगे। उन्होंने भी नदी की सफाई के लिए उठाए जा रहे कदमों को सराहा। पद्मश्री भारत भूषण ने कहा कि मंडलायुक्त के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों को उद्योग, संपत्ति और पैसा देंगे, पर सांस लेने के लिए शुद्घ हवा नहीं। हमें सोचना होगा। इसलिए जल और जंगलों को बचाना होगा।
मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी ने कहा कि उनका सपना पांवधोई नदी के पानी को आचमन और स्नान योग्य बनाना है। उन्होंने नदी के इतिहास के बारे में भी बताया। यह भी बताया कि नदी की सफाई के लिए दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में उद्गम स्थल से बाबा लालदास बाड़ा तक नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाया गया है। दूसरे चरण में शहर के भीतर नदी पर काम होगा। उन्होंने स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के विकास के लिए मिलने वाली 1500 करोड़ रुपये से कुछ हिस्सा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए रखने की बात महापौर संजीव वालिया से की। और आगे के चरणों में नदी पर काम करने को कहा।
डीएम आलोक कुमार पांडेय ने नदियों की महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के अनेक शहरों के नाम नदियों के नाम पर पड़े हैं। यहां तक कि विश्व की सबसे पुरानी और व्यवस्थित सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता का नाम भी सिंधु नदी पर पड़ा। उन्होंने लोगों से पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने में सहयोग का आह्वान किया। महापौर संजीव वालिया ने कहा कि पांवधोई नदी की निर्मलता को बनाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उनको निरंतर जारी रखा जाएगा। कार्यक्रम में तमाम विभागों के अधिकारी और गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
जलोत्सव में पांवधोई नदी की पूजा अर्चना की गई
बाबा लालदास बाड़ा स्थित घाट पर शुक्रवार को पांवधोई जलोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी और डीएम आलोक कुमार पांडेय, जूना पीठाधीश्वर के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी चिदानंद महाराज, महामंडलेश्वर योगी यतींद्रानंद गिरि महाराज, योग गुरु पद्मश्री भारत भूषण आदि को साथ लेकर घाट पर पहुंचे। बैंडबाजों की धुन पर धार्मिक गीत बजाकर मेहमानों का स्वागत किया गया। यहां धर्माचार्यों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पांवधोई नदी की पूजा अर्चना की गई।
पूर्वांचल कल्याण महासभा के 51 युवाओं ने पांवधोई नदी में स्नान किया। इस अवसर पर पांवधोई नदी के पुनर्जीवन/सौंदर्यीकरण के अंतर्गत सिंचाई निर्माण खंड और सहारनपुर विकास प्राधिकरण के सौजन्य से चेकडेम, पैदल पुल नवनिर्मित सम्मुख घाट का निर्माण के कार्यों का शिलान्यास किया गया। 175 मीटर लंबी नदी का चेन लाइजेशन, बोल्डर पेचिंग, पैदल मार्ग के इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के कार्य का भी लोकार्पण किया गया। इस मौके पर महापौर संजीव वालिया, एसडीए के उपाध्यक्ष सुखलाल भारती, नगर निगम के जलकल महाप्रबंधक अमरनाथ श्रीवास्तव, एसपी सिटी विनीत भटनागर समेत अनेक अधिकारी मौजूद रहे।
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