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सोशल साइट पर भारी पड़ा शहर, अफवाहों को नकारा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Apr 2018 01:23 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सोशल साइट पर चल रही भारत बंद की अफवाहों पर जागरूक शहर भारी पड़ा। मंगलवार को ये अफवाहें पूरी तरह बेअसर साबित हुईं। हालांकि दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुए उपद्रव की अनजानी दहशत भी बरकरार रही। स्कूल-कॉलेज, बाजार, सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान सब खुले। लेकिन आम दिनों के मुकाबले दोपहर तक भीड़ कम नजर आई।
शहर को पांच जोन और 15 सेक्टरों में बांटकर तीन कंपनी आरएएफ और पांच कंपनी पीएसी के अलावा 32 सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। दलित बहुल बस्तियों में आंबेडकर प्रतिमाएं सुरक्षा घेरे में रहीं। कंकरखेड़ा हाइवे और बाईपास के अलावा शोभापुर गांव और कचहरी में ज्यादा सतर्कता रही। एडीजी जोन, डीएम और एसएसपी यूनिवर्सिटी कैंपस, कॉलेजों, कंकरखेड़ा, अंबेडकर चौराहा, कचहरी, परतापुर, कोतवाली आदि क्षेत्रों का दिन भर जायजा लेते रहे।
बाजारों से रही भीड़ गायब
शहर के स्कूल-कॉलेज, बाजार, पेट्रोल पंप, बैंक सहित सभी सरकारी और गैर सरकारी दफ्तर आम दिनों की तरह निर्धारित समय पर खुले। लेकिन शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी दोपहर तक बहुत कम आवाजाही दिखाई दी। कलक्ट्रेट और कचहरी परिसर में कार्य दिवस होने के बावजूद यहां भी बहुत कम भीड़ रही। दो अप्रैल के उपद्रव से सबक लेते हुए कचहरी को छावनी में तब्दील किया गया था। दरअसल शहर के बाजारों में देहात के ग्राहकों की संख्या अमूमन ज्यादा होती है। ग्रामीण अंचलों के अधिकांश लोग मध्याह्न तक खरीददारी कर लौट जाते हैं। लेकिन एक अनजाने डर की वजह से गांव के लोग मंगलवार को शहर आने से बचते रहे। वहीं, जिले के लोगों ने इंटरनेट सुविधा बंद न होने पर राहत महसूस की।
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देहात इलाकों में सब सामान्य रहा
जनपद के सरधना, मवाना, दौराला, परीक्षितगढ़, खरखौदा, जानी, बहसूमा और फलावदा आदि में बंद को लेकर उड़ रहीं अफवाहों का कोई असर देखने को नहीं मिला। सभी इलाकों में रूटीन की तरह स्कूल-कॉलेज और बाजार खुले। सब जगह सामान्य स्थिति रही। हालांकि बाजारों में दोपहर तक सन्नाटे की स्थिति रही। पुलिस फोर्स पूरी तरह अलर्ट रही। एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल और एसपी देहात राजेश कुमार सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
लोगों ने दिखाई समझदारी
पुलिस प्रशासन ने एहतियाती तौर पर कडे़ सुरक्षा इंतजाम किए थे। लेकिन लोगों ने समझदारी और सूझबूझ से काम लिया। उन्होंने बंद की अफवाहों को सिरे से नकारकर एक अच्छे नागरिक होने का फर्ज निभाया है। -प्रशांत कुमार एडीजी मेरठ जोन
केवल अफवाहें थीं
कोई बंद नहीं था। केवल बंद की अफवाहें थी। इसलिए ही हमने न स्कूल बंद किए और न इंटरनेट सेवा। हमें पता था कि मेरठवासी इन अफवाहों पर ध्यान नहीं देंगे। लोगों ने समझदारी दिखाई और शहर में सब कुछ सामान्य रहा। -अनिल ढींगरा डीएम
मेरठ की जनता को बधाई
किसी भी संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया था। केवल सोशल मीडिया पर ही अफवाहें फैलाई जा रही थीं। लेकिन लोगों ने इन अफवाहों को दरकिनार कर शरारती तत्वों के मंसूबे नाकाम कर दिए। मेरठ की जनता इसके लिए बधाई की पात्र है। -मंजिल सैनी एसएसपी
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शहर को पांच जोन और 15 सेक्टरों में बांटकर तीन कंपनी आरएएफ और पांच कंपनी पीएसी के अलावा 32 सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। दलित बहुल बस्तियों में आंबेडकर प्रतिमाएं सुरक्षा घेरे में रहीं। कंकरखेड़ा हाइवे और बाईपास के अलावा शोभापुर गांव और कचहरी में ज्यादा सतर्कता रही। एडीजी जोन, डीएम और एसएसपी यूनिवर्सिटी कैंपस, कॉलेजों, कंकरखेड़ा, अंबेडकर चौराहा, कचहरी, परतापुर, कोतवाली आदि क्षेत्रों का दिन भर जायजा लेते रहे।
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बाजारों से रही भीड़ गायब
शहर के स्कूल-कॉलेज, बाजार, पेट्रोल पंप, बैंक सहित सभी सरकारी और गैर सरकारी दफ्तर आम दिनों की तरह निर्धारित समय पर खुले। लेकिन शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी दोपहर तक बहुत कम आवाजाही दिखाई दी। कलक्ट्रेट और कचहरी परिसर में कार्य दिवस होने के बावजूद यहां भी बहुत कम भीड़ रही। दो अप्रैल के उपद्रव से सबक लेते हुए कचहरी को छावनी में तब्दील किया गया था। दरअसल शहर के बाजारों में देहात के ग्राहकों की संख्या अमूमन ज्यादा होती है। ग्रामीण अंचलों के अधिकांश लोग मध्याह्न तक खरीददारी कर लौट जाते हैं। लेकिन एक अनजाने डर की वजह से गांव के लोग मंगलवार को शहर आने से बचते रहे। वहीं, जिले के लोगों ने इंटरनेट सुविधा बंद न होने पर राहत महसूस की।
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देहात इलाकों में सब सामान्य रहा
जनपद के सरधना, मवाना, दौराला, परीक्षितगढ़, खरखौदा, जानी, बहसूमा और फलावदा आदि में बंद को लेकर उड़ रहीं अफवाहों का कोई असर देखने को नहीं मिला। सभी इलाकों में रूटीन की तरह स्कूल-कॉलेज और बाजार खुले। सब जगह सामान्य स्थिति रही। हालांकि बाजारों में दोपहर तक सन्नाटे की स्थिति रही। पुलिस फोर्स पूरी तरह अलर्ट रही। एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल और एसपी देहात राजेश कुमार सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
लोगों ने दिखाई समझदारी
पुलिस प्रशासन ने एहतियाती तौर पर कडे़ सुरक्षा इंतजाम किए थे। लेकिन लोगों ने समझदारी और सूझबूझ से काम लिया। उन्होंने बंद की अफवाहों को सिरे से नकारकर एक अच्छे नागरिक होने का फर्ज निभाया है। -प्रशांत कुमार एडीजी मेरठ जोन
केवल अफवाहें थीं
कोई बंद नहीं था। केवल बंद की अफवाहें थी। इसलिए ही हमने न स्कूल बंद किए और न इंटरनेट सेवा। हमें पता था कि मेरठवासी इन अफवाहों पर ध्यान नहीं देंगे। लोगों ने समझदारी दिखाई और शहर में सब कुछ सामान्य रहा। -अनिल ढींगरा डीएम
मेरठ की जनता को बधाई
किसी भी संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया था। केवल सोशल मीडिया पर ही अफवाहें फैलाई जा रही थीं। लेकिन लोगों ने इन अफवाहों को दरकिनार कर शरारती तत्वों के मंसूबे नाकाम कर दिए। मेरठ की जनता इसके लिए बधाई की पात्र है। -मंजिल सैनी एसएसपी