पहाड़ों पर बर्फबारी: तपने लगा मैदान, इस वजह से बदल रहा मौसम, फसलें प्रभावित, वैज्ञानिक भी हैरान
जलवायु परिवर्तन के चलते मार्च से ही जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। अप्रैल की शुरुआत भी गर्मी से हुई। वहीं मौसम में इस तरह बदलाव से फसलें प्रभावित हो रही हैं। वहीं वैज्ञानिकों को भी हैरानी हो रही है।
विस्तार
जलवायु परिवर्तन के चलते मार्च से ही इस बार गर्मी ने रुलाना शुरू कर दिया। अप्रैल का पहला दिन भी गर्म रहा। आगे भी भीषण गर्मी के लिए तैयार हो जाएं। मैदानी इलाकों में धरती गर्मी से तपना शुरू हो गई है, वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हो रही है। आने वाले दिनों में हीट वेव की स्थिति पैदा हो सकती है।
मार्च के शुरुआत से ही मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा था। आधा महीना बीत जाने के बाद तापमान लगातार सामान्य से ऊपर पहुंच रहा था, जिस कारण लोगों ने दोपहर के समय में घर से निकलना बंद कर दिया था।
मार्च में ही तापमान 35 के पार पहुंच गया था, जो चिंता का विषय है। न्यूनतम तापमान भी 21 के पार पहुंच गया, जो सामान्य से लगभग चार डिग्री अधिक रहा। पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, श्रीनगर में रुक-रुककर बर्फबारी हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो मौसम में आए इस तरह के परिवर्तन का कारण जलवायु परिवर्तन है।
देरी से आए पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ देर से आए हैं, जिसके चलते हिमालय क्षेत्र में हिमपात भी देर से शुरू हुआ। यही कारण है कि अब भी हिमालय में ऊंचाई वाले इलाकों में रुक-रुककर हिमपात जारी है।
क्या होता है हीट वेव
तापमान 43-44 डिग्री के पार हो तो हीट वेव कहलाता है। हीट स्ट्रोक से सिर्फ सावधानी ही बचा जा सकता है। ऐसे में बीपी, शुगर वाले मरीजों को अपना परीक्षण कराते रहना चाहिए और नियमित रूप से दवाई भी लेनी चाहिए।
आसमान पर दिखे बादल
सोमवार को कभी धूप तो कभी आसमान में बादल दिखाई दिए। दिन व रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिन का तापमान लुढ़कर 31 से नीचे आ गया है, जबकि रात का तापमान भी 18 से नीचे चल रहा है। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल वार्मिंग बना चिंता का विषय
मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि लगातार क्लाइमेट चेंज हो रहा है। समय से पहले ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। आम जनमानस तो परेशान है ही, साथ ही फसलों पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा। मार्च में पारा 35 के पार पहुंच गया था और रात का तापमान 21 पार पहुंच गया था, जो चिंता का विषय है।