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WORLD COPD DAY : धूम्रपान और वायु प्रदूषण बना रहा सांस का रोगी
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धूम्रपान और वायु प्रदूषण बना रहा सांस का रोगी
मेरठ। धूम्रपान और वायु प्रदूषण लोगों को सांस का रोगी बना रहा है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही 20 नवंबर को विश्व सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव प्लमोनरी डिजीज) दिवस मनाया जा रहा है। सीओपीडी को आमतौर पर सांस का रोग कहते हैं।
सांस एंव छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि सीओपीडी भयावह होता जा रहा है। एक रिपोर्ट केमुताबिक भारत में हर दिन 2300 मौतें सीओपीडी की वजह से हो रही हैं। इसमें फेफड़े में एक काली तार बन जाती है। यह अस्थमा के दमा से अलग होता है। अस्थमा एलर्जी प्रकार का रोग होता है, जो वंशानुगत और पर्यावरण कारकों के मेल द्वारा होता है। इसमें इतनी खांसी आती है कि फेफड़ा बढ़ जाता और रोगी चलने लायक नहीं रहता। यहां तक कि मुंह से सांस छोड़ना पड़ता है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान और वायु प्रदूषण है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में आठ करोड़ लोग मध्यम से गंभीर स्तर की सीओपीडी समस्या से पीड़ित हैं। ऐसा अनुमान है वैश्विक स्तर पर यह मौत का तीसरा सबसे बड़ा और विकलांगता का पांचवा सबसे बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त 300 से अधिक मरीजों के विश्लेषण से पता चला कि 75 प्रतिशत दमा ग्रस्त मरीजों में सीओपीडी जैसे लक्षण उभरे थे।
छाती रोग एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि सीओपीडी तीन तरह की होती है, माइल्ड सीओपीडी, जिसमें खांसी में बलगम आने के साथ ही सांस फूलता है। वहीं मोडरेट सीओपीडी में इन दोनों लक्षणों के साथ छाती में इंफेक्शन को ठीक होने में कई सप्ताह लग जाते हैं और सीवियर सीओपीडी में इन तीनों लक्षणों के अलावा बैठे हुए भी सांस फूलने लगता है।
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सीओपीडी के प्रमुख लक्षण
- लंबे समय तक बलगम वाली खांसी
- सांस की कमी महसूस होना
- छाती में घरघराहट
- छाती में जकड़न
बचाव
धूम्रपान न करें, घरों में चूल्हे, अंगीठी और स्टोव का प्रयोग न कर गैस चूल्हे का प्रयोग करें। वायु प्रदूषण रोकने के प्रयास करें, कूड़े को जलाने की आदत को बदलें, पुराने डीजल और खटारा वाहनों पर सख्ती से रोक लगें। फेफड़ों को नुकसान से बचाने के लिए धूम्रपान छोड़ दें। नियमित रूप से जांच कराएं। श्वांस संबंधी व्यायाम करें। नियमित पैदल चलें। स्वस्थ और सेहतमंद बनाने वाला भोजन करें।
आज लगेगा निशुल्क शिविर
मेरठ। डॉ. वीरोत्तम तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बुधवार को सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक डॉ. शिवराज मेमोरियल चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर पर एक निशुल्क परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा। 11 बजे बेगमपुल पर और एक बजे कचहरी पर नुक्कड़ नाटक कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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मेरठ। धूम्रपान और वायु प्रदूषण लोगों को सांस का रोगी बना रहा है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ही 20 नवंबर को विश्व सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव प्लमोनरी डिजीज) दिवस मनाया जा रहा है। सीओपीडी को आमतौर पर सांस का रोग कहते हैं।
सांस एंव छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि सीओपीडी भयावह होता जा रहा है। एक रिपोर्ट केमुताबिक भारत में हर दिन 2300 मौतें सीओपीडी की वजह से हो रही हैं। इसमें फेफड़े में एक काली तार बन जाती है। यह अस्थमा के दमा से अलग होता है। अस्थमा एलर्जी प्रकार का रोग होता है, जो वंशानुगत और पर्यावरण कारकों के मेल द्वारा होता है। इसमें इतनी खांसी आती है कि फेफड़ा बढ़ जाता और रोगी चलने लायक नहीं रहता। यहां तक कि मुंह से सांस छोड़ना पड़ता है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान और वायु प्रदूषण है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में आठ करोड़ लोग मध्यम से गंभीर स्तर की सीओपीडी समस्या से पीड़ित हैं। ऐसा अनुमान है वैश्विक स्तर पर यह मौत का तीसरा सबसे बड़ा और विकलांगता का पांचवा सबसे बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त 300 से अधिक मरीजों के विश्लेषण से पता चला कि 75 प्रतिशत दमा ग्रस्त मरीजों में सीओपीडी जैसे लक्षण उभरे थे।
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छाती रोग एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि सीओपीडी तीन तरह की होती है, माइल्ड सीओपीडी, जिसमें खांसी में बलगम आने के साथ ही सांस फूलता है। वहीं मोडरेट सीओपीडी में इन दोनों लक्षणों के साथ छाती में इंफेक्शन को ठीक होने में कई सप्ताह लग जाते हैं और सीवियर सीओपीडी में इन तीनों लक्षणों के अलावा बैठे हुए भी सांस फूलने लगता है।
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सीओपीडी के प्रमुख लक्षण
- लंबे समय तक बलगम वाली खांसी
- सांस की कमी महसूस होना
- छाती में घरघराहट
- छाती में जकड़न
बचाव
धूम्रपान न करें, घरों में चूल्हे, अंगीठी और स्टोव का प्रयोग न कर गैस चूल्हे का प्रयोग करें। वायु प्रदूषण रोकने के प्रयास करें, कूड़े को जलाने की आदत को बदलें, पुराने डीजल और खटारा वाहनों पर सख्ती से रोक लगें। फेफड़ों को नुकसान से बचाने के लिए धूम्रपान छोड़ दें। नियमित रूप से जांच कराएं। श्वांस संबंधी व्यायाम करें। नियमित पैदल चलें। स्वस्थ और सेहतमंद बनाने वाला भोजन करें।
आज लगेगा निशुल्क शिविर
मेरठ। डॉ. वीरोत्तम तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बुधवार को सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक डॉ. शिवराज मेमोरियल चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर पर एक निशुल्क परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा। 11 बजे बेगमपुल पर और एक बजे कचहरी पर नुक्कड़ नाटक कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।