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आखिर कब होगा मेरठ स्मार्ट, असमंजस बरकरार

Fri, 29 Jan 2016 01:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 29 Jan 2016 01:34 AM IST
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smart city meerut
स्मार्ट सिटी के लिए देश के बीस शहरों की सूची बृहस्पतिवार को जारी हो गई, लेकिन इसमें उत्तर प्रदेश का एक भी शहर अपनी जगह नहीं बना पाया है। उधर, मेरठ का तो अभी यह ही साफ नहीं है कि उसे सौ स्मार्ट शहरों में शामिल किया गया है या नहीं। केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों ही स्तर पर मामला अभी अटका है और यहां के जन प्रतिनिधि भी मानों सो गए हैं।
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केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन में ऐसे शहरों का चयन होना था, जो निर्धारित किए गए मानकों पर खरे उतरते। पिछले साल 29 जुलाई को लखनऊ में केंद्र सरकार की टीम और राज्य सरकार के नगर विकास सचिव एवं अन्य अधिकारियों ने उप्र के 15 शहरों की परीक्षा ली। जिसमें मेरठ नगर निगम भी शामिल रहा। मेरठ को पहले 80 अंक मिले थे, लेकिन पांच अंक जलकर की कम राजस्व वसूली के काट दिए गए। फिर भी 29 जुलाई को शाम के समय जारी की गई सूची में मेरठ का नाम उप्र के स्मार्ट सिटी के लिए चयनित शहरों में शामिल किया गया। मेरठ को 13वें स्थान पर रखा गया था।
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मेरठ के साथ हुआ धोखा
मेरठ का नाम इस सूची में आने पर मेरठ की जनता खुश थी पर यहीं राजनीतिक पैंतरेबाजी हुई। अगले ही दिन लखनऊ में मेरठ के साथ धोखा हुआ और मेरठ के साथ रायबरेली को भी खड़ा कर दिया गया। खेल यह हुआ कि रायबरेली को 13 ए तथा मेरठ को रखा गया 13 बी स्थान पर रखा गया। रायबरेली को भी 75 अंक दिए गए।
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नेता फोड़ते रहे एक दूसरे पर ठीकरा

सही तरीके से अपने शहर की पैरवी करने की बजाय मेरठ केनेता इसका ठीकरा भी एक दूसरे केसिर पर फोड़ने में जुट गए। भाजपा और सपा के जनप्रतिनिधि तो इसके लिए एक दूसरे को दोषी ठहराने लगे। नतीजा केंद्र सरकार ने मेरठ की जनता को करारा झटका देते हुए स्मार्ट सिटी चयन की गेंद फिर से राज्य सरकार के पाले में डाल दी। कहा कि प्रदेश सरकार खुद किसी एक का चयन कर केंद्र को नाम भेजे। प्रदेश सरकार ने भी फिर से दोनों नाम भेजकर गेंद को फिर केंद्र सरकार के पाले में डाल दिया।

अंकों में हुआ खेल
पिछले साल 29 जुलाई को सरकार ने इस बाबत जो विज्ञप्ति जारी की थी उसमें रायबरेली का नाम तक नहीं था। पहली सूची में मेरठ 13 वें तथा रायबरेली 14 वें स्थान पर था। दूसरी सूची में 13 ए रायबरेली तथा 13 बी मेरठ कर दिया गया। सवाल यह है कि यदि ए या बी ही करना था तो ए पर मेरठ तथा बी पर रायबरेली होना चाहिए था। इसे उल्टा क्याें किया गया। इसका कोई कारण भी नहीं बताया गया। लिपिकीय त्रुटि में मेरठ के पांच अंक कम हो गए।

तो मिल सकते थे 83 अंक
गंगा पेयजल लाइन नहीं बन पाने के कारण 2013 में 50 करोड़ रुपये नगर विकास से सिंचाई विभाग ने मांगे थे। यह रकम नहीं दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि पेयजल आपूर्ति पूर्ण नहीं हो पाई। इससे तीन अंकों का नुकसान हुआ। अन्य त्रुटियां भी हुईं और मेरठ को कुल 75 अंक मिले, जबकि मिलने चाहिए थे 83 अंक।


लंबी लड़ाई लड़नी होगी
बृहस्पतिवार को जो लिस्ट जारी हुई उसमें यूपी का एक भी शहर नहीं है। जिन शहरों का चयन हो गया है जब उन्हें ही पहली सूची में शामिल नहीं किया गया तो फिर मेरठ की राह तो और मुश्किल है। ऐसे में लड़ाई लड़नी होगी। यहां के जन प्रतिनिधियों को जागरूक होना होगा क्योंकि वास्तव में मेरठ का दावा हर सूरत में रायबरेली से बड़ा है। रायबरेली ही क्या अन्य कई शहरों पर मेरठ भारी है।
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