फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   smart city meerut

मेरठ हकदार फिर राजनीति क्यों

Wed, 23 Sep 2015 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ Updated Wed, 23 Sep 2015 01:46 AM IST
विज्ञापन
smart city meerut
स्मार्ट सिटी मेरठ का हक है, यह दबी जुबान में केंद्र और राज्य सरकार भी मान रही है। बावजूद मेरठ के साथ राजनीति हो रही है। मेरठ को स्मार्ट सिटी की बैठकों में बार-बार अवसर दिया जा रहा है, लेकिन स्पष्ट रूप से मेरठ के नाम की घोषणा में कोताही बरती जा रही है।
विज्ञापन


जबकि मेरठ की जनता और जनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक के दरबार में अपना पक्ष रख चुके हैं।मेरठ के साथ 29 जुलाई के बाद से धोखे की पटकथा लिखी जा रही है।
विज्ञापन


गत सोमवार को लखनऊ में आयोजित बैठक में उप्र के 14 विभागों के प्रमुख सचिवों के सामने मेरठ के महापौर हरिकांत अहलुवालिया, नगरायुक्त उमेश प्रताप ने तर्क के साथ मेरठ का पक्ष रखा। इसमें उम्मीद थी कि कमेटी मेरठ का नाम स्मार्ट सिटी के लिए चयनित करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर से पूर्व की भांति मेरठ और रायबरेली का नाम स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय ले लिया। मंगलवार को लखनऊ से लौटे महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने रायबरेली और मेरठ की तरफ से रखे गए तर्क और अधिकारियों की प्रक्रिया को बयान किया। जिससे साफ जाहिर हो गया कि उप्र सरकार की मंशा मेरठ के पक्ष में साफ नहीं है।

पीएमओ, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में मंथन
प्रदेश सरकार भले ही स्मार्ट सिटी को लेकर मेरठ के नाम पर राजनीति कर रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में मेरठ के नाम पर मंथन चल रहा है। पीएमओ और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने जहां जनता के पोस्ट कार्डों पर गंभीरता दिखाई है वहीं महापौर द्वारा भेजे गए पत्रों पर संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से महापौर को पत्र मिले हैं। जिसमें उन्होंने उचित कार्रवाई किए जाने का उल्लेख किया है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि केद्रं सरकार मेरठ को लेकर गंभीर है, लेकिन उप्र सरकार नहीं।

रायबरेली नहीं दे पाया जवाब, कहां से आएंगे 50 करोड़
सोमवार को लखनऊ में स्मार्ट सिटी को लेकर हुई बैठक में रायबरेली नगर पालिका अधिशासी अधिकारी स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े बिंदुओं पर सही से तर्क देने में भी सफल नहीं हो सके। प्रमुख सचिव राजस्व ने जब 50 करोड़ रुपये की आय का स्त्रोत पूछा तो रायबरेली के अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं था। वैसे भी चार लाख की आबादी वाले शहर से इतने राजस्व की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। जबकि वहीं देखा जाए तो मेरठ की आबादी 20 लाख से अधिक है। टैक्स के अलावा आय के स्रोत भी दर्जनभर हैं। मेरठ 50 तो क्या 70 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी मिशन में प्रतिवर्ष खर्च कर सकता है।   

 
बैठक में ये थे रायबरेली के तर्क
रायबरेली में लगवाए हैंडपंप, घर-घर में शौचालय बनवाए।
जेएनएनयूआरएम की परियोजना सोलिड वेस्टमेंट प्लांट चालू।
उड़ान एकेडमी है।
फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री लगी है।
राजनीतिक परिवारों की भूमि है।  

मेरठ ने ये रखेे तर्क
मेरठ में हजारों हैंडपंप लगे, जेएनएनयूआरएम की परियोजना महानगर बस सेवा चल रही है। गंगाजल और सीवर का कार्य भी पूर्ण।
अधिकतर घरों में शौचालय बने हैं, बाकी के आवेदन मिले हैं अब शीघ्र बनेंगे।
देश की सबसे बड़ी छावनियों में तीसरे स्थान पर है मेरठ की छावनी।
मेरठ में दो पेराशूट इकाई हैं।
मेरठ में हवाई पट्टी से प्रशिक्षण उड़ाने होती हैं।
मेरठ की आबादी 20 लाख है।
मेरठ वर्ष में 50 करोड़ ही नहीं बल्कि 70 करोड़ के राजस्व का रखता है मादा।
मेरठ-धर्म नगरी उत्तराखंड का प्रवेश द्वार है।  
दिल्ली एनसीआर गाजियाबाद, नोएडा से पलायन कर रहे उद्योगों को स्थान देने के लिए मेरठ तैयार है।
1857 की क्रांतिधरा के साथ महाभारत-रामायण कालीन धरोहर है मेरठ।
कैंची, स्पोर्ट्स, विश्वस्तरीय ज्वेलरी का उद्योग।
उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थान, मेडिकल कॉलेज और चिकित्सालय।
फ्रेट कॉरिडोर के साथ मेट्रो रेल का प्रोजेक्ट।

रायबरेली को एक परियोजना पर 10 नंबर, मेरठ को तीन पर शून्य
जेएनएनयूआरएम योजना के तहत मेरठ में गंगाजल, सीवर, सोलिड वेस्टमेंट, महानगर बस सेवा परियोजना ह। जिनमें से महानगर बस सेवा पूरी तरह संचालित है। जबकि गंगाजल और सीवर की परियोजना पूर्ण हो चुकी है। केवल सोलिड वेस्टमेंट प्लांट परियोजना अधूरी है। वह भी राज्य सरकार की लापरवाही के कारण। तीन परियोजनाओं का कार्य पूर्ण होने के बाद भी 29 जुलाई को लखनऊ में हुई बैठक में मेरठ को शून्य अंक दिया गया। वहीं दूसरी तरफ रायबरेली में जेएनएनयूआरएम की मात्र एक परियोजना सोलिड वेस्टमेंट प्लांट पूरी हुई। उसपर रायबरेली को 10 अंक दिए गए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार ने मेरठ को जानबूझकर अनदेखा किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed